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मजदूरों के कल्याण पर SC ने सरकार से पूछा - लैपटॉप खरीदने के अलावा आपने क्‍या किया?

मजदूरों के कल्याण पर सरकार के रवैये से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र को फटकार लगाई।

SC Slams Govt For Exploiting The Poor Ask Question

नई दिल्‍ली... मजदूरों के कल्याण पर सरकार के रवैये से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र को फटकार लगाई। केंद्र ने कहा कि मजदूरों के कल्याण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की समय सीमा तय करने के लिए हमने कमेटी का गठन किया है। इस जवाब पर जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने नाराजगी जताई।

 

बेंच ने कहा, "समय सीमा तय करने के लिए आपने कमेटी का गठन किया है? ये चल क्या रहा है? हमारे हिसाब से आप 20-25 हजार करोड़ रुपए पर बैठे हुए हैं।" कुछ राज्यों की तरफ से पेश हुए वकील ने कहा कि हमने निर्देशों का पालन किया है। इस पर बेंच ने कहा कि आपने लैपटॉप और वॉशिंग मशीन खरीदने के अलावा किया क्या है?

 

क्या गरीबों के लिए सरकार का यही नजरिया है- सुप्रीम कोर्ट

 

- मजदूर दिवस पर उनके कल्याण के लिए दिए गए निर्देशों पर केंद्र और राज्य सरकारों के जवाब सुनकर सुप्रीम कोर्ट अचंभित रह गया।

- केंद्र के जवाब पर बेंच ने कहा, "ये तो हद है। ये गरीबों का शोषण है। क्या भारत के गरीबों के लिए सरकार का यही नजरिया है।"

- राज्यों से कहा, "क्या ये मजाक है? ये मजदूर वो हैं, जो अशिक्षित हैं और इनके पास कोई धन नहीं है। ऐसे में बिल्डर इनका शोषण कर रहे हैं और भारत सरकार कह रही है कि वह कुछ नहीं करेगी।"

 

'इतनी बड़ी रकम का किया क्या'

 

- कोर्ट ने सरकार से पूछा कि निर्माण कार्य के मजदूरों के कल्याण के लिए सरकार ने इतनी बड़ी रकम का क्या किया?

- अदालत ने निर्देश दिए कि श्रम मंत्रालय के सचिव 7 मई को सुनवाई के दौरान न्यायालय में मौजूद रहें और बताएं कि हमारे निर्देशों और इस बारे में संसद में बनाए गए दो कानूनों पर अमल के बारे में क्या कदम उठाए गए हैं।

- इससे पहले अदालत ने कहा था कि मजदूरों के कल्याण के लिए हमारे निर्देशों पर 37,400 करोड़ रुपए राशि जमा की गई थी, लेकिन उसमें से महज 9,500 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। देश के लाखों मजदूरों को शेष 28,000 करोड़ का लाभ क्यों नहीं दिया गया।

- अदालत ने कहा कि संसद में पारित 2 कानूनों और हमारे निर्देशों पर सरकारों ने क्या किया?

 

कैग ने दाखिल किया था हलफनामा

 

- इससे पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को बताया था कि मजदूरों के कल्याण की राशि लैपटॉप और वॉशिंग मशीन खरीदने में खर्च की गई है और 10 फीसदी से भी कम राशि का इस्तेमाल उनके भले के लिए किया गया है।


- कोर्ट ने केंद्र से 19 मार्च को कंस्ट्रक्शन वर्करों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसे मुद्दों के लिए 30 सितंबर से पहले मॉडल स्कीम तैयार करने के लिए कहा था।

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