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बतौर PM अटल जी का देश के नाम अंतिम संबोधन: हम भले हार गए लेकिन हमारे देश और दृढ़ निश्चय की जीत हुई

अटल जी ने कहा था कि जनता सरकारें बनाती है, बदलती है। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की खूबी है।

Atal ji on 2004 election: my party may have lost, but India has won

नई दिल्ली। हम चुनाव हार गए लेकिन हमारा निश्च अभी नहीं हारा है। हमारी पार्टी हारी है लेकिन देश की जीत हुई है। हम अपना कार्यालय छोड़ रहे हैं लेकिन देश की सेवा करने की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। ये बातें देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2004 लोकसभा चुनाव हारने के बाद अपने छोटे से संबोधन में कही थी। इसी संबोधन के बाद से ही अटल जी सक्रिय राजनीति से भी दूर होने लगे थे।

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था हमारी खूबी

13 मई 2014 को अपने संबोधन में अटल जी ने कहा था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहां जनता अपनी सरकार चुनती है। जनता की मर्जी से ही यहां सरकारें बनती हैं, सरकारें बदलती हैं, और यही हमारे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की खूबी है। हम अपनी खूबी को बचाकर रखते हैं और उसे लगातार मजबूत करते रहते हैं।

 

जनता तय करेगी कि हमने कैसा काम किया

अटल जी का कहना था कि जनता ने हमें सरकार बनाने का मौका दिया था। जनता का भरोसा और प्यार ही हमारी सबसे बड़ी संपत्ति थी, जनता का सपोर्ट ही हमारे लिए सबसे बड़ी मजबूती रही है। अब जनता को ही यह तय करना है कि हमारा कार्यकाल उनके भरोसे पर कितना खरा उतरा है।

 

उन्होंने कहा कि जब जनता ने हमें चुनकर सरकार बनाने का मौका दिया तो देश में स्थिरता नहीं थी।  विकास काम रुके हुए थे, गुड गवर्नेंस की कमी थी। ऐसे में आपको यह तय करना है कि हम देश्न के लिए क्या कर पाए।

 

हम हारे लेकिन देश जीत गया

 

अटल जी ने कहा कि पिछले 3 साल के दौरान देश पहले से मजबूत हुआ, दुनियाभर में देश की साख बढ़ी है। कई तरह के सामाजिक और आर्थिक विकास हुए और देश देश जल्द ही विकसित देशों में अपनी जगह बनाने की राह पर है। ऐसे में भले ही हमारी पार्टी इस बार नहीं जीत पाई, लेकिन हमारा देश जरूरत जीत गया है। 

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