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स्टेशनरी बिजनेस के नए सेंटर नोएडा, इंदौर और नागपुर, एशिया- अफ्रीका ने दिया मौका

State Team

Jun 27,2015 02:00:00 AM IST
नई दिल्‍ली। देश में शिक्षा के सुधरते स्‍तर और एक्‍सपोर्ट डिमांड के चलते स्‍टेशनरी और साइंटिफिक इक्विपमेंट इंडस्‍ट्री तेजी से विकास कर रही है। बढ़ती डिमांड के साथ देश के सबसे बड़े स्‍टेशनरी क्‍लस्‍टर अंबाला के बाद बाद नोयडा, नागपुर, इंदौर, रांची, कानपुर जैसे कई नए उत्‍पादन केंद्र तेजी से विकसित हो रहे हैं। ये केंद्र पेपर स्‍टेशनरी, ज्‍योमेट्री बॉक्‍स, राइटिंग पैड से लेकर स्टिकर, विजिटिंग कार्ड, राइटिंग बोर्ड, पैड, पर्मानेंट मार्कर, डस्‍टर, चार्ट, बोर्ड पिन, बोर्ड मैग्‍नेट, पिन जैसे प्रॉडक्‍ट का उत्‍पादन कर रहे हैं। देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में मौजूद इन केंद्रों को एक ओर जहां भौगोलिक फायदा हो रहा है। वहीं इंडस्‍ट्री को एक्‍सपोर्ट के लिए भी बड़े मौके मिल रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक सार्क देशों के साथ ही इंडो‍नेशिया, मलेशिया, सिंगापुर भारतीय इंडस्‍ट्री के लिए प्रमुख बाजार हैं। वहीं यूएन के शिक्षा मिशन के साथ जुड़कर इंडस्‍ट्री को अफ्रीकी देश टोगा, केन्‍या, मोजांबिक, नाइजीरिया और साउथ अफ्रीका जैसे देशों भारतीय प्रोडक्‍ट की डिमांड हर सा 20 फीसदी की दर से बढ़ रही है।
अंबाला को मिल रही है कड़ी टक्‍कर
फिलहाल देश में अंबाला स्‍टेशनरी कैपिटल के रूप में पहचानी जाती है। अंबाला क्‍लस्‍टर में फिलहाल 400 यूनिट्स हैं, जिनका वार्षिक टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये से अधिक का है। ये यूनिट्स हर साल 250 करोड़ रुपये का निर्यात करती हैं। लेकिन अब नोयडा, इंदौर और नागपुर जैसे नए केंद्र अंबाला को बड़ी टक्‍कर दे रहे हैं। नोयडा के स्‍टेशनरी कारोबारी दिव्‍यांशु जैन बताते हैं कि नोयडा में ऑफिस और एजुकेशनल दोनों प्रकार की स्‍टेशनरी का प्रोडक्‍शन हो रहा है। नोयडा और गुड़गांव में मल्‍टीनेशनल कंपनियों के चलते इंडस्‍ट्री को लोकल लेवल पर पेपर और राइटिंग स्‍टेशनरी के लिए बड़ा बाजार मिल गया है। एनसीआर के साथ ही पड़ोसी बाजारों में इंडस्‍ट्री तेजी से कदम बढ़ा रही है।
भौगोलिक दूरी का मिल रहा है फायदा
नागपुर के स्‍टेशनरी निर्माता शिवमंगल बामेर बताते हैं कि देश की भौगोलिक स्थिति कारोबार को बहुत प्रभावित करती है। नागपुर देश के मध्‍य में स्थित होने के चलते यहां से देश में कहीं भी माल भेजना ट्रांसपोर्ट के लिए काफी सस्‍ता पड़ता है। वहीं बल्‍लारपुर में पेपर इंडस्‍ट्री के चलते यहां सस्‍ता रॉ मटेरियल भी यहां पर उपलब्‍ध हो जाता है। इंदौर के कारोबारी भरत अग्रवाल बताते हैं कि एमपी सरकार द्वारा सरकारी खरीद के चलते यहां पर एजुकेशनल स्‍टेशनरी की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। स्‍टेशनरी के लिए यहां पर गुजरात से प्‍लास्टिक और दूसरे रॉमटेरियल आसानी से उपलब्‍ध हो जाती है। वहीं राजस्‍थान और छत्‍तीसगढ़ जैसे मार्केट में पहुंचा भी आसान होती है।
निर्यात में बढ़ रहे हैं मौके
स्टेशनरी मैन्यूफैक्चरर्स के लिए विदेशी मार्केट काफी फायदेमंद बन रहा है। वहीं संयुक्त राष्ट्र द्वारा विकासशील देशों को दी जाने वाली शिक्षा सहायता से इन कंपनियों को निर्यात के लिए ऑर्डर पाने में मदद मिल रही है। यूएन के शिक्षा मिशन के साथ जुड़कर इंडस्‍ट्री को अफ्रीकी देश टोगा, केन्‍या, मोजांबिक, नाइजीरिया और साउथ अफ्रीका में सेल्‍स के मौके मिल रहे हैं। कारोबारी सिमरन जीत बताते हैं कि डोमेस्टिक मार्केट्स में डीलिंग करने से बेहतर एक्‍सपोर्ट मार्केट है। अपने प्रॉडक्ट्स के लिए सही प्राइस मिलने की वजह से मैन्युफैक्चरर्स एक्सपोर्ट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। यहां चीन से इंडस्‍ट्री को कड़ी टक्‍कर मिल रही है। लेकिन इसके बावजूद कारोबार विस्‍तार के बहुत से मौके इंडस्‍ट्री के पास मौजूद है। यही कारण है कि बहुत से कारोबारी अपने प्रॉडक्शन का 90 फीसदी इंटरनैशनल मार्केट में बेचते हैं। क्योंकि विदेशी क्लाइंट्स क्वॉलिटी प्रॉडक्ट के लिए सही कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं।
चीन से मुकाबले के लिए नए प्रॉडक्‍ट पर जोर
अंबाला के स्‍टेशनरी कारोबारी सिद्धार्थ आनंद बताते हैं कि चीन इस समय भारतीय स्‍टेशनरी इंडस्‍ट्री के सामने सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी कर रहा है। ऐसे में चीन से मुकाबले के लिए हम लगातार क्‍वालिटी और लागत में सुधार लाने की कोशिश कर रहे हैं। किड्स स्‍टेशनरी में चीन को टक्‍कर देने के लिए कार्टून करेक्‍टर और एजुकेशनल चार्ट का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। आनंद के अनुसार जून और जुलाई में शुरू होने वाले एजुकेशन के लिए मार्च और अप्रैल से सप्‍लाई शुरू हो जाती है। पिछले साल के मुकाबले इस साल सेल्‍स में 15 फीसदी की ग्रोथ मिली है। इसमें किड्स स्‍टेशनरी की हिस्‍सेदारी 60 फीसदी से भी ज्‍यादा है।
अगली स्‍लाइड में पढ़ें किस सेगमेंट में हैं इंडस्‍ट्री के लिए मौके...
एजुकेशनल के साथ ऑफिस स्टेशनरी की डिमांड कानपुर के कारोबारी इमरान खान बताते हैं कि आज से 3-4 साल पहले एजुकेशनल स्टेशनरी की डिमांड काफी रहती थी। लेकिन अब पैड, पर्मानेंट मार्कर, डस्टर, बोर्ड, चार्ट, बोर्ड पिन, बोर्ड मैग्नेट, पिन, पेपर के अलावा माउस पैड, विजिटिंग कार्ड होल्डर्स और फाइल फोल्डर्स जैसी ऑफिस स्टेशनरी की डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। इनके लिए कच्चा माल लोकल लेवल पर ही मिल जाता है। वहीं बढ़ती बिजनेस एक्टिविटी के चलते छोटे शहरों में भी इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। कोलकाता के एक्सपोर्टर मोहम्मद राफेल के अनुसार पहले भारत में सिर्फ एजुकेशनल स्टेशनरी बनती थी। ऑफिस स्टेशनरी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब नोयडा, कानपुर, चेन्नई, बेंगलुरू जैसे नए सेंटर्स से ऑफिस स्टेशनरी आ रही है। जिसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है।
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