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लालू फैमि‍ली की बढ़ी मुसीबत : पटना में 750 करोड़ में बन रहा निर्माणाधीन मॉल सील

एक नए मामले में लालू यादव के परिवार के निर्माणाधान मॉल को प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को सीज कर दिया।

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पटना. लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। एक नए मामले में लालू यादव के परिवार के निर्माणाधान मॉल को प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को सीज कर दिया। यह मॉल पटना के बेली रोड पर डिलाइट मार्केटिंग कंपनी बनवा रही है, जि‍‍‍‍‍सकी लागत करीब 750 करोड़ रुपए बताई जा रही है। वहीं, इसे बि‍हार का सबसे बड़ा मॉल भी बताया जा रहा है। पिछले साल उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इसके निर्माण पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे टेंडर घोटाले के एवज में लालू यादव और उनके परिवार ने 2 एकड़ जमीन हासिल की थी। आज इसी पर मॉल बनाया जा रहा है।
 
कोर्ट को बताना होगा कैसे मि‍ली जमीन 
 
प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद अब मॉल की जमीन हासिल करने के लिए डिलाइट मार्केटिंग को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। इस बात के सबूत देने होंगे कि उन्हें यह प्रापर्टी कैसे मिली या किससे इसे खरीदा था। 
 
पहले भी रुका था मॉल का काम 
 
इससे पहले भी पिछले साल मई में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने मॉल के निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसका कारण यह बताया गया था कि मॉल बनाने से पहले पर्यावरण विभाग से मंजूरी नहीं ली गई थी। गौरतलब है कि इस मॉल के निर्माणाधीन मालिकों में तेजस्वी यादव और उनकी मां राबड़ी देवी शामिल हैं। 
 
मॉल के लिए रेलवे टेंडर घोटाले से जमीन मिली : भाजपा 
 
सुशील मोदी के मुताबिक, 2006 में रेल मंत्री रहते हुए लालू ने रांची और पुरी में रेलवे के दो होटल गलत तरीके से कारोबारी हर्ष कोचर को दिए थे। बदले में पटना में 200 करोड़ रुपए कीमत की 2 एकड़ से ज्यादा जमीन बेनामी तरीके से डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड के नाम कराई। तब कंपनी का मालिकाना हक राजद सांसद प्रेम चंद्र गुप्ता की पत्नी के पास था। इसी जमीन पर पटना में मॉल बनाया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में मिट्टी घोटाले का भी आरोप लगाया है। सुशील मोदी ने दावा किया कि मॉल बनाने के लिए खोदी गई मिट्टी गलत तरीके से संजय गांधी जैविक उद्यान (चिड़ियाघर) को 90 लाख में बेची गई। इसके लिए सौंदर्यीकरण की गैरजरूरी योजना तैयार हुई।
 
लालू के परिवार तक कैसे पहुंची जमीन? 
 
सीबीआई ने कहा था कि 2014 में लालू के बेटे तेजप्रताप, तेजस्वी, बेटी चंदा और रागिनी को डिलाइट मार्केटिंग में डायरेक्टर बनाया गया। नवंबर, 2016 को कंपनी का नाम बदलकर लारा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। ला मतलब लालू, रा यानी राबड़ी। प्रोजेक्ट का नाम बदलते ही जमीन पर लालू के परिवार का मालिकाना हक हो गया। 14 फरवरी, 2017 से राबड़ी देवी, तेज प्रताप और तेजस्वी को इसका डायरेक्टर बनाया गया था। 
 
घोटाले के खुलासे पर शुरू हुई थी जांच 
 
जुलाई, 2017 में सीबीआई ने लालू के आवास पर छापा मारा। जांच एजेंसी ने पूर्व रेलमंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स, विजय कोचर, विनय कोचर और आईआरसीटीसी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया था। इसके बाद 27 जुलाई को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर लालू परिवार की बेनामी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। 

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