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दुमका ट्रेजरी केस में लालू को 14 साल की सजा, 60 लाख रु का लगा जुर्माना

चारा घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में लालू प्रसाद यादव को 14 साल की सजा हुई है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दुमका ट्रेजर

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नई दिल्ली. चारा घोटाले से जुड़े एक अन्य मामले में लालू प्रसाद यादव को 14 साल की सजा हुई है। सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दुमका ट्रेजरी केस में शनिवार को दोषियों की सजा का एलान किया। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री को दो धाराओं में 14 साल की सजा सुनाई गई है और उन पर 60 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

जज शिवपाल सिंह की कोर्ट ने हाल में 3 करोड़ के इस मामले में लालू समेत 19 लोगों को दोषी करार दिया था। बता दें कि लालू पर चारा घोटाले से जुड़े 6 केस दर्ज हैं। इनमें से 4 में वह दोषी ठहराए जा चुके हैं। फिलहाल, लालू झारखंड की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

 

 

इन्हें मिलनी है सजा

लालू प्रसाद, अजीत कुमार वर्मा, अरुण कुमार सिंह, डॉ विमल कांत दास, गोपीनाथ दास, डॉ कृष्ण कुमार प्रसाद, डॉ. मनोरंजन प्रसाद, डॉ. नंदकिशोर प्रसाद, मोहिंदर सिंह बेदी, नरेश प्रसाद, ओपी दिवाकर, पंकज मोहन भुई, डॉ. पीतांबर झा, राधा मोहन मंडल, राजकुमार शर्मा, डॉ. रघुनंदन प्रसाद, राजेंद्र कुमार बगेड़िया, शरदेंदु कुमार दास और फूलचंद सिंह।

 

रिम्स में हैं एडमिट

लालू प्रसाद इन दिनों बीमार हैं और राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) में इलाज करा रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें एम्स में इलाज की सलाह दी है। इसकी जानकारी जेल अधीक्षक को दी गई थी।

 

लालू को 6 में से इन 4 केस में सजा

1.चाईबासा ट्रेजरी का पहला केस: 30 सितंबर 2013 को लालू यादव को दोषी माना। उन्हें पांच साल जेल की सजा सुनाई गई।

2. देवघर ट्रेजरी केस: 6 जनवरी 2017 को लालू समेत 16 आरोपियों को साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई गई। लालू पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया।

3. चाईबासा ट्रेजरी का दूसरा केस: 24 जनवरी 2018 को लालू को पांच साल की सजा सुनाई गई।

4. दुमका ट्रेजरी केस: लालू दोषी करार, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र बरी। लालू को सात की कैद।

 

इन 2 केस में चल रही सुनवाई

5. डोरंडा ट्रेजरी केस: सुनवाई चल रही है।

6. भागलपुर ट्रेजरी केस: इसकी सुनवाई पटना की सीबीआई कोर्ट में चल रही है।



 

क्या है दुमका ट्रेजरी मामला?

  - दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई।


 

1996 में सामने आया था घोटाला

- जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था। इसके तहत 1990 के दशक में चारा सप्लाई के नाम पर सरकारी ट्रेजरी से ऐसी कंपनियों को फंड जारी हुआ, जो थी ही नहीं।

- घोटाला हुआ तब लालू बिहार के मुख्यमंत्री थे। उनके पास वित्त मंत्रालय भी था। आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की जांच के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया।



 

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