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ऐसे हुआ था 900 करोड़ का चारा घोटाला, लालू पर दर्ज हैं 6 मामले

बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव को चारा घोटाले मामले में बड़ा झटका लगा है।

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नई दिल्‍ली। बिहार के पूर्व सीएम लालू यादव को चारा घोटाले मामले में बड़ा झटका लगा है। उन्‍हें कोर्ट ने दोषी करार दिया है और इस मामले में अब सजा 3 जनवरी को सुनाई जाएगी। आज हम आपको चारा घोटाले से जुड़े घटनाक्रम को सिलसिलेवार बताने जा रहे हैं।

सबसे पहले जानिए, किस मामले में आया फैसला?


- यह मामला देवघर कोषागार से 1992 से 1994 के दौरान फर्जी अलॉटमेंट लेटर और चालान पर 89 लाख की सरकारी राशि की गैर कानूनी निकासी से संबंधित है।
- चारा घोटाले से संबंधित लालू प्रसाद पर कुल छह मामले दर्ज हैं। एक केस की पटना और 5 की रांची में सुनवाई चल रही है।
- देवघर का यह मामला आरसी 68 (ए)-96 के तहत 1996 में दर्ज हुआ था।

 

ट्रक की जगह लिखा स्कूटर का नंबर

 

- ट्रेजरी से निकलने वाले पैसे में सभी का हिस्सा पहले से तय होता था। घोटालेबाजों ने चारा के अलावा पशुओं को ढोने से लेकर दवा खरीद तक हर काम के फर्जी बिल बनाए और उससे पैसे निकाल लिए।

- जांच में खुलासा हुआ कि पशुपालन विभाग के अफसरों ने कागजों में 100-120 क्विंटल चारा और 10-12 बैल को स्कूटर पर लादकर एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाना दिखाया। हकीकत में ये चीजें कागजों पर तो ट्रक से ढोना बताया गया था, लेकिन उसमें ट्रक की जगह स्कूटर के नंबर लिखे गए थे।

 

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न चारा खरीदा, न उसे फार्म हाउस पहुंचाया

 

- सीबीआई की जांच में पता चला कि न तो चारे की खरीदी हुई थी और न ही उसे फॉर्म हाउस तक पहुंचाया गया था। सब काम कागज पर कर लिया गया था।

सबका हिस्सा पहले से तय रहता था
- इस मामले में आरोप था कि घोटालेबाजों के रैकेट से पशुपालन विभाग के अधिकारी व ट्रेजरी ऑफिसर से लेकर सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री तक जुड़े थे।

- ट्रेजरी से निकलने वाले पैसे में सभी का हिस्सा पहले से तय होता था। घोटालेबाजों ने चारा के अलावा पशुओं को ढोने से लेकर दवा खरीद तक हर काम के फर्जी बिल बनाए और उससे पैसे निकाल लिए।

 

900 करोड़ रुपए तक पहुंचा था घोटाला


- चारा घोटाले का मामला एक-दो करोड़ रुपए से शुरू होकर 900 करोड़ रुपए तक जा पहुंचा। हालांकि, कोई पक्के तौर पर नहीं कह सकता कि घोटाला कितने का है, क्योंकि इन सालों में हिसाब रखने में भी भारी गड़बड़ियां हुई थीं। इस घोटाले का खुलासा 1994 में हुआ था तब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था।

- बिहार पुलिस ने 1994 में गुमला, रांची, पटना, डोरंडा और लोहरदगा जैसे कई ट्रेजरी से फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए गैर कानूनी तरीके से निकालने के मामले दर्ज किए थे। सरकारी ट्रेजरी और पशुपालन विभाग के कई कर्मचारी गिरफ्तार किए गए थे। कई ठेकेदारों और सप्लायर्स को हिरासत में लिया गया और 10-12 केस दर्ज किए गए थे।

 

अपोजिशन की मांग पर जांच CBI को सौंपी


- अपोजिशन की मांग पर इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराई गई। सीबीआई ने कहा था कि चारा घोटाले में शामिल सभी बड़े आरोपियों के संबंध राष्ट्रीय जनता दल और अन्य पार्टियों के टॉप लीडर्स से हैं और काली कमाई का हिस्सा नेताओं की झोली में भी गया।

- पशुपालन विभाग के अफसरों ने चारे और पशुओं की दवा की सप्लाई के लिए करोड़ों रुपए के फर्जी बिल ट्रेजरी से कई सालों तक नियमित रूप से भुनाए।

 

लालू ने भी दी थी पैसे निकालने की मंजूरी

 

- सीबीआई के मुताबिक, तत्कालीन मुख्यमंत्री (लालू यादव) को न सिर्फ इस मामले की जानकारी थी, बल्कि उन्होंने कई मौकों पर वित्त मंत्रालय के प्रभारी के रूप में इन पैसों को निकालने की अनुमति दी थी। लालू के खिलाफ सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और वे कई महीनों तक जेल में रहे।

 

चारा घोटाले में लालू गए थे जेल, CM बनी थीं राबड़ी


- चारा घोटाले के एक मामले में जब मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद को जेल की सजा हुई थी, उसके बाद ही लालू ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को बिहार का सीएम बनाया था।

- सीएम बनने के बाद राबड़ी देवी ने साइन करना सीखा था। उस समय बिहार में जंगल राज की बात भी खूब चर्चा में थी। राबड़ी के सीएम रहते कहा जाता था कि सत्ता उनके दो भाई साधु यादव और सुभाष यादव चलाया करते थे।

 

10 बड़े नेता और 8 ऑफिसर्स के खिलाफ मुकदमा

 

- 31 मई 2007 को सीबीआई के स्पेशल जज यूएसपी सिन्हा ने आरसी 66 (ए)-96 के तहत 82 लोगों को सजा सुनाई थी, जिनमें लालू प्रसाद के दो भतीजे वीरेंद्र यादव और नागेंद्र राय भी थे।

- चारा घोटला में 10 बड़े राजनेता और आठ अफसरों के खिलाफ मुकदमा किया गया। सुनवाई के दौरान बिहार के पूर्व पशुपालन मंत्री भोलाराम तूफानी, पूर्व केंद्रीय मंत्री चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, पूर्व सांसद राजो सिंह की मौत हो गई।

- बाकी आरोपियों में लालू प्रसाद, डॉ. जगन्नाथ मिश्र, पीएसी के पूर्व चेयरमैन ध्रुव भगत, जगदीश शर्मा, आरके राणा, विद्यासागर निषाद, पीएसी की पूर्व मेंबर ज्योति कुमारी थीं।
- अफसरों में पूर्व पशुपालन सचिव आईएएस बेक जूलियस, श्रम सचिव के अरुमुगम, महेश प्रसाद, एमसी सुवर्णो, फूलचंद सिंह, एसएन दुबे, एसी चौधरी।

 

चारा घोटाला की खास तारीखें


- 27 जनवरी 1996 को पहला मामला चाईबासा थाने में 04/96 दर्ज किया गया।
- 11 मार्च 1996 को पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।
- 19 मार्च 1996 को पटना हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने राज्य पुलिस द्वारा दर्ज 41 मामलों को अपने अंडर में लेकर जांच शुरू की।

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