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बिज़नेस न्यूज़ » States » Bihar​चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू यादव दोषी, पूर्व सीएम जगन्‍नाथ मिश्रा बरी

​चारा घोटाले के चौथे मामले में लालू यादव दोषी, पूर्व सीएम जगन्‍नाथ मिश्रा बरी

नई दिल्‍ली. चारा घोटाले के चौथे मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने लालू यादव को दोषी करार दिया है। लालू यादव को दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी मामले में दोषी ठहराया गया है। लालू की सजा पर बहस 21, 22 और 23 मार्च को होगी। वहीं, इस मामले में पूर्व सीएम जगन्‍नाथ मिश्रा को कोर्ट ने बरी कर दिया है। इस  मामले में लालू समेत 31 आरोपी थे। बता दें कि लालू पर दर्ज 6 मामलों में यह चौथा मामला है, जिसमें फैसला आया है। चारों मामलों में लालू यादव को दोषी ठहराया गया है। वे फिलहाल बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं।

 

अबतक चार मामलों में दोषी करार 

लालू यादव इस तरह अब तक चारा घोटाले के 6 में से 4 केस में लालू दोषी करार दिए जा चुके हैं। दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी से जुड़े मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के साथ महेंद्र सिंह बेदी, अधीप चंद, ध्रुव भगत और आनंद कुमार भी बरी कर दिए गए हैं। कोर्ट के फैसले के पहले लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव समेत कई आरजेडी नेता रांची पहुंचे। कोर्ट में लालू प्रसाद यादव मौजूद नहीं थे। वे अदालत परिसर में थे, लेकिन दोषी करार दिए जाते वक्त वे कोर्ट रूम में नहीं थे। रविवार को लालू की तबीयत खराब हो गई थी, उन्हें सीने में दर्द की शिकायत थी। जिसके बाद उन्हें रांची के रिम्स हॉस्पिटल में एडमिट किया गया था।

 

ये है नरेंद्र मोदी का खेल: रघुवंश   
लालू को दोषी करार दिए जाने के बाद आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, 'अजब है नरेंद्र मोदी और नीतीश का मेल, अजब है खेल, दोबारा से हो गया जगन्नाथ मिश्रा रिहा और लालू यादव को जेल। एक आदमी को जेल, एक आदमी को बेल, ये है नरेंद्र मोदी का खेल।' 

 

दो बार टल चुका है फैसला
लालू की सजा पर इस महीने दो बार फैसला टल चुका है। पहली बार 15 मार्च को फैसला सुनाए जाने के पहले लालू ने नई पिटीशन दाखिल कर अकाउंटेंट समेत तीन पूर्व अफसरों को केस में आरोपी बनाए जाने की मांग की थी। जिसके बाद फैसला 17 मार्च को आना तय हुआ था। 17 मार्च को लेकिन सीबीआई की विशेष अदालत के जज शिवपाल सिंह के ज्यूडिशियल एकेडमी के कार्यक्रम में शामिल होने की वजह से फैसला टाल दिया था। लालू की पिटीशन के बाद कोर्ट ने पीके मुखोपाध्याय, पूर्व अकाउंटेंट जनरल, बीएन झा, पूर्व डिप्टी अकाउंटेंट जनरल, प्रमोद कुमार, महालेखाकार कार्यालय के पूर्व सीनियर अकाउंटेंट जनरल को समन जारी किया था।

 

क्या है दुमका ट्रेजरी मामला?
दुमका ट्रेजरी से दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच गैर-कानूनी तरीके से 3.76 करोड़ रुपए निकाले गए। इस मामले में सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को 48 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 11 मई 2000 को पहली चार्जशीट दायर की गई।

 

1996 में सामने आया था घोटाला

जनवरी 1996 में करीब 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला पहली बार सामने आया था। इसके तहत 1990 के दशक में चारा सप्लाई के नाम पर सरकारी ट्रेजरी से ऐसी कंपनियों को फंड जारी हुआ, जो थी ही नहीं। घोटाला हुआ तब लालू बिहार के मुख्यमंत्री थे। उनके पास वित्त मंत्रालय भी था। आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए मामले की जांच के लिए आई फाइल को 5 जुलाई 1994 से 1 फरवरी 1996 तक अटकाए रखा। 2 फरवरी 1996 को जांच का आदेश दिया। 

 

दो मामलों में सजा काट रहे हैं लालू 
देवघर ट्रेजरी केस में लालू समेत 16 आरोपियों को 6 जनवरी 2017 को साढ़े तीन साल जेल की सजा सुनाई गई थी। लालू पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया गया था। वहीं, चाईबासा ट्रेजरी केस में 24 जनवरी 2018 को पांच साल की सजा सुनाई गई।

 

जारी है डोरंडा ट्रेजरी केस की सुनवाई 
1997 में लालू को पहली बार ज्यूडिशियल कस्टडी में लिया गया था। वे 137 दिन जेल में रहे थे और राबड़ी देवी बिहार की सीएम बनी थीं। 12 दिसंबर 1997 को लालू रिहा हुए थे। दूसरी बार लालू 28 अक्टूबर 1998 को पटना के बेऊर जेल गए। बाद में उन्हें जमानत मिली। इसी मामले में लालू को 28 नवंबर 2000 में एक दिन के लिए जेल जाना पड़ा था। चारा के नाम पर चाईबासा ट्रेजरी से 37 करोड़ रुपए के गबन का दोषी पाए जाने के बाद लालू को 2013 में भी जेल जाना पड़ा था। तब वे दो महीने रांची जेल में रहे थे। 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगा था। उसी साल दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी। चारा घोटाले के डोरंडा ट्रेजरी केस में भी सुनवाई चल रही है। चारा घोटाले का छठा केस भागलपुर ट्रेजरी से जुड़ा है। इस केस की सुनवाई पटना की सीबीआई कोर्ट में चल रही है।

 

 

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