न्यू पेंशन स्कीम (NPS) के विरोध में हड़ताल पर जाने पर 48 लाख कर्मचारियों के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई

केंद्र ने अपने 48.41 लाख कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे 13 मार्च को न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के विरोध में हड़ताल पर जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। कार्मिक मंत्रालय ने एक आदेश में कहा है कि सभी ऑफिसों में 13 मार्च को किसी तरह का आकस्मिक अवकाश व अन्य छुट्‌टी मंजूर न की जाए। यही नहीं  जिम्मेदार अफसर यह तय करें कि किसी भी कर्मचारी को ऑफिस आने में कोई दिक्कत न हो।

money bhaskar

Mar 06,2019 05:54:00 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र ने अपने 48.41 लाख कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे 13 मार्च को न्यू पेंशन स्कीम (NPS) के विरोध में हड़ताल पर जाते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। कार्मिक मंत्रालय ने एक आदेश में कहा है कि सभी ऑफिसों में 13 मार्च को किसी तरह का आकस्मिक अवकाश व अन्य छुट्‌टी मंजूर न की जाए। यही नहीं जिम्मेदार अफसर यह तय करें कि किसी भी कर्मचारी को ऑफिस आने में कोई दिक्कत न हो। यदि कोई उन्हें रोकता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कार्मिक मंत्रालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के संबंधित अधिकारियों को कहा है कि महत्वपूर्ण सरकारी भवनों के अधिकांश गार्डों को प्रवेश के सभी गेटों पर कड़ी निगरानी सुनिश्चित कराई जाए और यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों को तैनात किए जाए।

जंतर मंतर पर किया धरने का ऐलान

कर्मचारियों की यूनियन National Joint Council of Action (NJCA) ने एनपीएस के विरोध में 13 मार्च को जंतर-मंतर, नई दिल्ली और देश भर में धरना / प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया है। यूनियनें चाहती है कि सरकार 14 साल पहले 2004 में लागू की न्यू पेंशन स्कीम को खत्म कर पुरानी पेंशन स्कीम चालू करे। सरकार इसके लिए राजी नहीं है।

यह कहा है आदेश में

कार्मिक मंत्रालय ने मौजूदा नियमों का हवाला देते हुए आदेश में कहा है कि सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल या इसके किसी भी रूप में भाग लेने से रोका जाए। इसमें सामूहिक, आकस्मिक अवकाश, धीमी गति से काम करना आदि है। इसलिए प्रस्तावित हड़ताल की अवधि के दौरान आकस्मिक अवकाश या किसी अन्य प्रकार की छुट्टी को मंजूरी नहीं दी जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि इच्छुक कर्मचारियों को कार्यालय परिसर में बाधा मुक्त प्रवेश मिले। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की स्थिति में मंत्रालय ने सभी मंडल प्रमुखों से रिपोर्ट भी मांगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हड़ताल के दिन अनुपस्थित कर्मचारियों की संख्या और विवरण को दर्शाने वाली रिपोर्ट दी जाए।

14 साल पहले लागू हुई थी नई पेंशन स्कीम

करीब 14 साल पहले 2004 में लागू की गई नई पेंशन नीति का सरकारी कर्मचारी विरोध कर रहे हैं। पहले अलग-अलग राज्यों में शुरू हुए प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रदर्शन किया। इनका कहना है कि नई पेंशन स्कीम में उनसे कई सुविधाएं छीन ली जा रही हैं। इस वजह से वह मांग उठा रहे हैं कि पुरानी पेंशन नीति को ही लागू कर दिया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि 2004 में लाई गई यह न्यू पेंशन स्कीम नहीं बल्कि नो पेंशन स्कीम है. नई पेंशन नीति खामियों से भरी हुई है। कर्मचारियों के मुताबिक पुरानी पेंशन जहां सरकार देती थी, वहीं नई पेंशन बीमा कंपनियां देंगी। अगर कभी कोई भी समस्या होती है, तो हमें बीमा कंपनी से लड़ना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि पुरानी पेंशन स्कीम में सेवानिवृत्त‍ि के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी थी लेक‍िन नई पेंशन नीति में कितनी पेंशन मिलेगी, यह तय नहीं है। इसके अलावा पुरानी पेंशन नीति में जीपीएफ की सुविधा भी मिलती थी लेक‍िन नई यह सुविधा खत्म कर दी गई है। जनरल प्रोविडेंट फंड अथवा जीपीएफ एक प्रोविडेंट फंड खाता होता है, जो सिर्फ सरकारी कर्मचारियों की खातिर होता है। कोई भी सरकारी कर्मचारी इसका सदस्य बन सकता है। इसके लिए उसे हर महीने अपनी सैलरी से कुछ फीसदी कॉन्ट्रीब्यूट करना पड़ता है। पुरानी पेंशन में जहां वेतन से कोई कटौती नहीं होती है, वहीं नई पेंशन नीति में वेतन से 10 फीसदी की कटौती तय की गई है।

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