मनी भास्कर खास /सरकारी उपेक्षा से बदहाल है सहारनपुर का वुडकार्विंग उद्योग, पॉलीथीन पर प्रतिबंध भी बना मुसीबत

  • एक दशक में एक तिहाई पर सिमटा कारोबार, कभी होता था एक हजार करोड़ रुपए का निर्यात, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना भी बनी सरकारी शो

Moneybhaskar.com

Aug 03,2019 01:03:11 PM IST

नई दिल्ली। देश के लघु एवं मध्यम उद्योग से अपने पाठकों को रूबरू कराने के लिए मनी भास्कर एक विशेष सीरीज चला रहा है। पहले दिन अलीगढ़ के ताला उद्योग के हालातों के बाद आज दूसरी किस्त में हम आपके लिए सहारनपुर के वुडकार्विंग उद्योग की जानकारी लेकर आए हैं। लकड़ी पर नक्काशी के हुनर के लिए पूरी दुनिया में नाम कमाने वाला पश्चिम उत्तर प्रदेश का यह प्रमुख शहर आज कई संकटों का सामना कर रहा है।

कलस्टर न बनने से लगातार पिछड़ रही है वुडकार्विंग

सहारनपुर का वुडकार्विंग उद्योग पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां इमारती लकड़ी पर नक्काशी का कार्य किया जाता है। इसके देश-विदेश में काफी मांग रहती है। लेकिन सरकारी उपेक्षा के कारण यह उद्योग लगातार पिछड़ रहा है। यहां के कारोबारी इस कला को जिंदा रखने के लिए कई बार कलस्टर बनाए जाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन इस पर केंद्र या प्रदेश सरकार ने कभी ध्यान नहीं दिया है। हालात यह हैं कि कभी यहां से 10 हजार करोड़ रुपए का निर्यात होता था, लेकिन आज यह मात्र 250 करोड़ रुपए पर सिमट चुका है। सरकारी सहायता और सुविधाएं नहीं मिलने के कारण बीते एक दशक में यहां का कारोबार एक तिहाई तक सिमट गया है।

पॉलीथीन पर प्रतिबंध बना मुसीबत

वुडकार्विंग उद्योग से जुड़े व्यापारी बताते हैं कि यहां से अधिकांश उत्पाद विदेशों को निर्यात किए जाते हैं। विदेशों को भेजे जाने वाले उत्पाद पॉलीथीन में पैक किए जाते हैं, लेकिन इस पर प्रतिबंध होने के कारण मुसीबत बढ़ रही है। दूसरे, निर्यात के लिए अधिकांश परिवहन समुद्री मार्ग के जरिए किया जाता है। पॉलीथीन में पैकिंग समुद्र से परिवहन के कारण उत्पादों में नमी आ जाती है। निर्धारित मात्रा से अधिक नमी आ जाने के कारण विदेशी आयातक माल को अस्वीकार कर देते हैं। इससे व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। सरकार निर्यात पॉलिसी में भी इस पर कोई ठोस नियम नहीं बनाती है। इसके अलावा सहारनपुर में कंटेनर डिपो नहीं होने के कारण यहां के व्यापारियों को मुरादाबाद या गाजियाबाद पर निर्भर रहना पड़ता है।

यूपी सरकार की ओडीओपी योजना भी फेल

उत्तर प्रदेश सरकार ने छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना चला रखी है। इसके तहत हर जिले में एक उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाती है। इसमें निर्यात को बढ़ावा देना भी शामिल है। सहारनपुर के वुडकार्विंग उद्योग को भी इस योजना के लिए चुना गया है। हालांकि, यहां के कारोबारियों को ओडीओपी का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। यहां ओडीओपी योजना पूरी तरह से सरकारी शो बनकर रह गई है।

नोटबंदी के बाद बढ़ी मुसीबत

सहारनपुर में मुफ्ती स्ट्रीट पर जकारिया वुडकार्विंग के नाम से कारोबार करने वाले मोहम्मद सुभान का कहना है कि इस समय कारोबार मंदी की मार झेल रहा है। उनका कहना है कि नोटबंदी के बाद यह कारोबार ज्यादा परेशानियों का सामना कर रहा है। सुभान की मानें तो पहले लोग अपनी बेटियों की शादियों में नक्काशी वाला फर्नीचर देना पसंद करते थे। इस पर लोग 80 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक खर्च करते थे। लेकिन अब लोगों के पास पैसे की कमी हो गई है। यही कारण है कि अब बेटियों की शादी में प्लाइबोर्ड से बने फर्नीचर को देने का चलन बढ़ रहा है। इस पर करीब 30 से 40 हजार रुपए का खर्च आता है। सुभान के अनुसार, बड़े कारोबारी और निर्यातक अधिकांश सरकारी सुविधाओं का लाभ ले लेते हैं और घरेलू कारोबारी इससे महरूम रह जाते हैं।

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