संकट /बेरोजगारी बड़ी चुनौती, पांच साल में छोटे उद्योगों को पैदा करनी होंगी 5 करोड़ नौकरियां - गडकरी

  • एमएसएमई को जीडीपी में अपना योगदान बढ़ाकर 50 फीसदी करना होगा
  • छोटे उद्योगपतियों को समय से पेमेंट सुनिश्चित करने के लिए कानून ला सकती है सरकार

Moneybhaskar.com

Aug 23,2019 04:29:54 PM IST

नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बेरोजगारी की समस्या को बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि, भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए छोटे, लघु व सूक्ष्म उद्योगों (MSME) को पांच करोड़ नौकरियां पैदा करनी होंगी। नई दिल्ली में शुक्रवार को छठें इंडिया इंटरनेशनल एक्सपो में उन्होंने कहा कि, फिलहाल एमएसएमई का देश की जीडीपी में योगदान 29 फीसदी है और हाल के वर्षों में इसने 11 करोड़ नौकरियां पैदा की हैं।

MSME को बढ़ाना होगा जीडीपी में अपना योगदान

नितिन गडकरी ने देश को 5 लाख करोड़ रुपए की अर्थव्यवस्था बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि एमएसएमई को जीडीपी में अपना योगदान बढ़ाकर 50 फीसदी करना होगा और अगले पांच साल में पांच करोड़ रोजगार भी सृजित करने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, सरकार ने एमएसएमई के सामने मौजूद चुनौतियों का समाधान ढूंढने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें उनके प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग और उन्हें समय से भुगतान मिलने का मामला शामिल है।

दो साल में भारतक्राफ्ट पोर्टल से 10 लाख करोड़ टर्नओवर पाने का लक्ष्य

गडकरी ने बताया कि चीन की अर्थव्यवस्था में अलीबाबा ई-कॉमर्स का बड़ा योगदान है, ऐसे में एमएसएमई मंत्रालय ने देश का नया ई-कॉमर्स मार्केटिंग पोर्टल स्थापित करने के लिए कॉमर्स मिनिस्ट्री के तहत गवर्नमेंट ई-मार्केट (GeM) पोर्टल से एग्रीमेंट किया है। इस नए पोर्टल को भारतक्राफ्ट नाम दिया गया है। यह प्लेटफॉर्म व्यापकता में अमेजन और अलीबाबा के स्तर का होगा। गडकरी ने यह भी बताया कि इस पोर्टल के लिए अगले दो साल में कम से कम 10 लाख करोड़ रुपए का टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

समय से पेमेंट सुनिश्चित करने के लिए कानून ला सकती है सरकार

गडकरी ने कहा कि एमएसएमई को समय से पेमेंट सुनिश्चित करने और उनके वर्किंग कैपिटल को बर्बाद होने से बचाने के लिए सरकार कानून लाने के बारे में गंभारता से विचार कर ही है, जिससे प्रोडक्ट की डिलीवरी के 45 दिन के अंदर उद्योगों को पेमेंट मिल जाए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने वर्ल्ड बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक और KfW जैसी वैश्विक एजेंसियों से एमएसएमई सेक्टर का कॉस्ट कैपिटल कम किए जाने की बात की है।

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