निवेश  /स्पेस में छा रहे स्टार्टअप्स, विदेशी निवेश के साथ ही फिल्मी सितारों की निवेश में रुचि

Moneybhaskar.com

Jun 28,2019 11:46:32 AM IST

नई दिल्ली. हथेली के आकार के छोटे से उपग्रह से लेकर क्लीन एनर्जी युक्त उपग्रह बनाने के क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप तेजी से पैर पसार रही हैं। यही नहीं निवेशकों को भी यह क्षेत्र भा रहा है। वे इनमें जमकर पैसा लगा रहे हैं। आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक पर यह स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं।

बैलाट्रिक्स को मिले 30 लाख डॉलर, अभिनेत्री दीपिका भी शामिल


इलेक्ट्रिक रसायनों वाले थ्रस्टर्स की सहायता से उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने की योजना पर काम कर रही बेंगलूरु स्थित बैलाट्रिक्स एयरोस्पेस ने हाल ही में निवेशकों के एक समूह से 30 लाख डॉलर का निवेश पाया है। कंपनी के सह संस्थापक यशस कर्णम ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को यह जानकारी दी। वेंचर कैपिटल फंड आईडीएफसी परंपरा की अगुआई में बैलाट्रिक्स की प्री सीरीज-ए के लिए यह निवेश हुआ।। अन्य 7 निवेशकों में अरबपति परिवार से संबंध रखने वाले सुमन कांत मुंजाल तथा बॉलीवुड हस्ती दीपिका पदुकोण शामिल रहे।

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अंतरिक्ष में बड़ी कामयाबी है कंपनियों की


पृथ्वी निगरानी संबंधी उपग्रहों का निर्माण और परिचालन करने वाली मुंबई स्थित कावा स्पेस कंपनी ने सीड राउंड की वित्त उगाही की है। हालांकि कंपनी ने कुल राशि का खुलासा नहीं किया है। बैलाट्रिक्स और कावा उन दर्जनों भारतीय स्टार्टअप में से एक हैं जो उपग्रह, रॉकेट और अंतरिक्ष अभियानों में मददगार दूसरी सहायक सामग्रियों का निर्माण कर रहे हैं। इन स्टार्टअप को मिल रहे निवेश अंतरिक्ष के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की बड़ी छलांग लगाने की ओर इशारा करती है। अंतरिक्ष उत्पादों को ऑनलाइन बेचने वाले मार्केटप्लेस सैटसर्च के सह-संस्थापक नारायण प्रसाद बैलाट्रिक्स के निवेश के संदर्भ में कहते हैं, 'इससे पहले भारत में तकनीक के क्षेत्र में निवेश करने वाली किसी वीसी फर्म ने अंतरिक्ष क्षेत्र में इतना अधिक निवेश नहीं किया।'

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17 हजार उपग्रह प्रक्षेपित होंगे

स्टार्टअप डेटा पर नजर रखने वाली फर्म ट्रैक्सन और निवेशकों के साक्षात्कार के आधार पर बैलाट्रिक्स और कावा के अलावा अंतरिक्ष क्षेत्र की 7 अन्य भारतीय कंपनियों ने भी वित्त उगाही की है। पृथ्वी से 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित लो अर्थ ऑर्बिट में बढ़ती गतिविधियों से अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की रूचि बढ़ रही है। आज के समय फसल निगरानी से लेकर रक्षा, शहरी प्लानिंग, लागत कम करने और चित्रों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए छोटे और सस्ते उपग्रहों का चलन तेजी से बढ़ा है। सलाहकार फर्म फ्रॉस्ट एंड सुलिवन का अनुमान है कि साल 2018 से 2020 के अंदर करीब 17,000 छोटे उपग्रह प्रक्षेपित होंगे। अंतरिक्ष क्षेत्र के 3 भारतीय स्टार्टअप में निवेश करने वाले राजाराम कहते हैं, 'यहां काफी पैसा कमाया जा सकता है। यह उद्यमियों के लिए उत्साहजनक समय है।'
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