मुद्दा /कई चुनौतियों से जूझ रहा है निर्यात में करीब आधा योगदान करने वाला एसएमई सेक्टर

  • पांच करोड़ एसएमई देश में बड़े पैमाने पर रोजगार देता है
  • देश की ऊंची विकास दर को कायम रखने के लिए इस सेक्टर को मजबूत करना जरूरी

Moneybhaskar.com

Nov 26,2019 04:45:00 PM IST

नई दिल्ली. सरकार जहां देश का निर्यात बढ़ाने के लिए काफी जद्दोजहद कर रही है, वहीं निर्यात में करीब 40 फीसदी योगदान करने वाला लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) सेक्टर कई चुनौतियों से जूझ रहा है। देश में पांच करोड़ से अधिक एसएमई होने के कारण यह देश में बड़े पैमाने पर रोजगार भी देता है। देश में उद्यमिता की भावना, तकनीक के उपयोग और रोजगार को बढ़ावा देने के मामले में एसएमई सेक्टर में बेशुमार संभावनाएं हैं। साथ ही देश की उच्च विकास दर को बरकरार रखने के लिए एसएमई सेक्टर को मजबूत करना जरूरी है। इसके लिए इस सेक्टर की समस्याओं का निदान करना जरूरी है। देश के एसएमई सेक्टर के सामने खड़ी चुनौतियां इस प्रकार हैं:

1. उत्पाद और सेवाओं की मार्केटिंग करने की समुचित क्षमता का अभाव

एसएमई वेंचर की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के एसएमई मार्केटिंग के मामले में कमजोर हैं। सरकार की ओर से समुचित सहायता न मिल पाने, अच्छी मार्केटिंग सुविधाओं की कमी जैसे कारणों से एसएमई के लिए उत्पादों की मार्केटिंग करना भविष्य में भी चुनौतीपूर्ण रहेगा। उत्पादों और सेवाओं का प्रमोशन करने के लिए एसएमई को बजट की कमी का भी सामना करना पड़ता है। इससे उनका विकास भी कुंठित होता है।

2. टेक्नोलॉजी की उपलब्धता में कमी

एक्सेस कैपिटल एडवाइजर्स के मुताबिक उत्पादन की प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी के उपयोग का किसी भी कंपनी की सफलता व विफलता में अहम स्थान होता है। अच्छी तकनीक से कंपनी अपनी लागत कम कर सकती है और कंपनी की क्षमता भी बढ़ती है। लेकिन नकदी की कमी के कारण एसएमई सेक्टर सर्वोत्तम तकनीक का उपयोग नहीं कर पाता है। शहरों में स्थति एसएमई कंपनियों ने जहां टेक्नोलॉजी के उपयोग की दिशा में प्रगति दिखाई है, वहीं ग्रामीण एसएमई इस मामले में अब भी पीछे है।

3. कर्ज मिलने में दिक्कत

एसएमई वेंचर के मुताबिक देश में एसएमई के विकास में सबसे बड़ी बाधा पूंजी के अभाव और कर्ज की अनुपलब्धता का है। आने वाले वर्षों में भी एसएमई को भुगतान में देरी, कर्ज की ऊंची दर जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

4. बोझिल नियम व कानून

डिवलपमेंट लाइसेंस, बैंक्रप्सी का निपटारा, बीमा, सिक्युरिटीज या सर्टिफिकेशन और टैक्स असेसमेंट से जुड़ी कई समस्याओं से भी एसएमई को निपटना पड़ता है। साझा नियामकीय निकाय और स्टार्टअप्स के लिए समुचित प्रावधान एसएमई कंपनियों के विकास में सहायक हो सकते हैं।

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