एमएसएमई /छोटे व मध्यम उद्योगों की ग्रोथ के अवसरों पर चर्चा करने को एसएमई ग्रोथ समिट का हुआ आयोजन

लुधियाना सीआईसीयू प्रेसिडेंट उपकार सिंह आहूजा लुधियाना सीआईसीयू प्रेसिडेंट उपकार सिंह आहूजा

  • दैनिक भास्कर और आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से एसएमई की ग्रोथ के लिए किया गया कार्यक्रम का आयोजन
  • एमएसएमई के लिए घरेलू व वैश्विक बाजारों में व्यापार के अवसरों पर व्यापारियों ने रखे अपने विचार

Moneybhaskar.com

Nov 27,2019 10:29:15 PM IST

नई दिल्ली. छोटे व मध्यम उद्योगों की समस्याओं को जानने और उद्यमियों को घरेलू और वैश्विक बाजारों में उभरते हुए ट्रेंड और आने वाले अवसरों के बारे में चर्चा करने के लिए दैनिक भास्कर और आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से पंजाब के लुधियाना में एसएमई समिट का आयोजित किया गया। इस मौके पर कई दिग्गज उद्योगपतियों ने इस विषय पर अपने विचार रखे। कीनोट स्पीकर के तौर पर लुधियाना सीआईसीयू के प्रसिडेंट उपकार सिंह आहूजा ने उद्यमियों की कई समस्याओं को सामने रखा और उन्हें कई टिप्स भी दीं।

एमएसएमई की परिभाषा बदलने की जरूरत

उपकार सिंह ने कहा कि उद्यमियों को सबसे पहले कॉस्ट ऑटोमेशन के लिए अपने बिजनेस के साथ ही ऑटोमेशन यूनिट भी लगानी चाहिए। विदेश से ऑटोमेशन मंगाने पर खर्च भी ज्यादा आता है और इससे संतुष्टि भी नहीं मिलती है। साथ ही व्यापारियों को अपने बिजनेस का वैल्यूएशन कराने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि एमएसएमई की परिभाषा काफी पुरानी हो चुकी है जिसे अब बदलने की जरूरत है। 15 साल में मशीनरी पुरानी हो जाती है, लेकिन एमएसएमई की परिभाषा नहीं बदल रही।

एक बयान से ठप पड़ गई ऑटो इंडस्ट्री

उपकार सिंह ने कहा कि एक मंत्री ने बयान दिया कि 2025 में टू-व्हीलर बंद हो जाएंगे जिसके बाद पूरी ऑटो इंडस्ट्री रिसेशन में आ गई। 2015 तक ई-व्हीकल आने की उम्मीद बहुत कम है। नोटबंदी का असर अब तक है। लोग कह रहे हैं कि वे अब तक नोटबंदी का खामियाजा भुगत रहे हैं। सरकार का इकोसिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा है तभी स्किल्ड लोग नहीं आ रहे हैं मार्केट में। दूसरी समस्या यह है कि सरकार ने तो क्रेडिट रेटिंग सिस्टम शुरू कर दिया है, लेकिन बैंक क्रेडिट रेटिंग नहीं देखते हैं। बैंक अपना फायदा-नुकसान देखते हैं। सरकार को इस बारे में सख्त नियम बनाने चाहिए कि इतने क्रेडिट रेटिंग पर इतने ब्याज पर लोन मिलेगा।

चीनी कंपनियां पहुंचाती हैं सबसे ज्यादा नुकसान

उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करना जरूरी है। 10-15 साल पहले बड़े-बड़े टेक्नोलॉजी एक्जीबिशन में में एक-दो चीनी कंपनियां आती थी। अब अधिकतर स्टॉल चीनी कंपनियों के होते हैं। एमएसएमई को सबसे ज्यादा चीनी कंपनियों से नुकसान पहुंचता है। लेकिन सरकार ने उन्हें अच्छा ईकोसिस्टम दे रखा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एमएसएमई को बजट में कम पैसा दिया जाता है। बजट में एक एमएसएमई को 8 रुपए मिलते हैं, उससे क्या हो पाएगा।

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