मनी भास्कर खास /नया बिजनेस शुरू करने के लिए भी महज 59 मिनट में मिलेगा 5 करोड़ का कर्ज, आरबीआई ने की सिफारिश 

Moneybhaskar.com

Jun 25,2019 03:36:05 PM IST

कुलदीप सिंगोरिया. नई दिल्ली
आपके पास जीएसटीएन नंबर नहीं है। आपके पास पैन कार्ड भी नहीं है। तब भी नया उद्योग शुरू करने के लिए सरकार आपको पांच करोड़ रुपए तक कर्ज मुहैया करा सकती है। लघु, मध्यम और छोटे उद्योगों (MSME) में सुधार के लिए गठित की गई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई ) की समिति ने इसकी सिफारिश की है। मंगलवार को आरबीआई ने रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में समिति ने छोटे उद्योगों के लिए 5 हजार करोड़ रुपए का फंड (stressed asset fund) बनाने का भी सुझाव दिया है। समिति ने एमएसएमई सेक्टर में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए बीमा कवरेज की जरूरत बताई है।

टेक्सटाइल अपग्रेडेशन फंड स्कीम जैसी योजना एमएसएमई के लिए भी बने


सेबी के पूर्व अध्यक्ष यूके सिन्हा की अध्यक्षता वाली इस समिति ने एमएसएमई सेक्टर में आमूलचूल बदलाव की सिफारिश की है। समिति ने उद्योगों के बंद होने का कारण प्लास्टिक पर प्रतिबंध और डंपिंग जैसी कई दिक्कतों को बताया है। लिहाजा इन उद्योगों को फिर से खड़ा करने के लिए टेक्सटाइल अपग्रेडेशन फंड स्कीम की तरह नई व्यवस्था लाए जाने का अहम सुझाव दिया है।

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PSBLoansIn59Minutes का बढ़ना चाहिए दायरा


समिति का मानना है कि 59 मिनट में लोन जैसी स्कीम अच्छा कदम है। इसलिए इसकी सीमा एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए की जानी चाहिए। इस स्कीम के तहत नए उद्यम स्थापित करना जरूरी है। लिहाजा यह ध्यान देना जरूरी है कि जिनके पास जीएसटी, इंकम टैक्स रिटर्न जैसे दस्तावेज नहीं है, उन्हें भी दायरे में लाने का प्रावधान किया जाए। 7 से 10 दिनों के भीतर आवेदन का निपटारा होना चाहिए। मुद्रा और स्टार्टअप इंडिया जैसी स्कीमें भी PSBLoansIn59Minutes.com पोर्टल पर होनी चाहिए। गौरतलब है कि 2 नवंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह पोर्टल लांच किया था।

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सिडबी का विस्तार करने की जरूरत


समिति ने एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए जिम्मेदार शीर्ष संस्था सिडबी की भूमिका का विस्तार करने की भी सिफारिश की। सिडबी को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस (एमएफआई) जैसे निजी ऋणदाताओं को नियंत्रित करना चाहिए। पिछड़े जिलों और क्षेत्रों में एमएसएमई के लिए क्रेडिट बाजारों की पहुंच आसान करने में सिडबी का काम करना चाहिए। सिडबी को कर्ज के अतिरिक्त नए उपायों के जरिए उद्योगों को पैसा जुटाने में मदद करनी चाहिए।

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