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1 जनवरी से बिकेंगे केवल BIS अप्रूवड सोलर प्रोडक्‍ट, चीन को लगेगा झटका

एक जनवरी से भारत में केवल भारतीय मानक ब्‍यूरो (बीआईएस) अप्रूव्‍ड सोलर प्रोडक्‍ट्स ही बिकेंगे। यह नियम सोलर प्रोडक्‍ट के मैन्‍युफैक्‍चरिंग, स्‍टोरेज, सेल्‍स या डिस्ट्रिब्‍यूटिंग पर भी लागू होगा। इसके पीछे सरकार का मकसद चीन से आ रहे सस्‍ते सोलर प्रोडक्‍ट्स पर अंकुश लगाना है। इसके लिए बुधवार को मिनिस्‍ट्री ऑफ न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) ने सोलर फोटोवोलेटिक सिस्‍टम, डिवाइस, कंपोनेंट गुड्स ऑर्डर 2017 जारी किया है। हालांकि यह आदेश पहले अगस्‍त 2018 से लागू होना था, लेकिन अब एमएनआरई ने इसे 1 जनवरी 2018 से लागू करने को कहा है। पहले कराना होगा रजिस्‍ट्रेशन आदेश में कहा गया है कि यदि कोई व्‍यक्ति देश में सोलर प्रोडक्‍ट्स की मैन्‍युफैक्‍चरिंग करना चाहता है तो उसे पहले मानक ब्‍यूरो में अपना रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा। इसी तरह सोलर प्रोडक्‍ट्स का स्‍टोर, सेल्‍स या डिस्ट्रिब्‍यूशन करने वाले भी मानक ब्‍यूरो में रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा। आदेश में स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि विदेशों से इंपोर्ट कर भारत में सोलर प्रोडक्‍ट्स का बिजनेस करने वालों को भी मानक ब्‍यूरो में रजिस्‍ट्रेशन कराना अनिवार्य है। ये प्रोडक्‍ट्स आएंगे दायरे में एमएनआरई के आदेश में सोलर प्रोडक्‍ट्स की व्‍याख्‍या की गई है, जिसमें क्रिसटलाइन सिलिकॉन पीवी मॉड्यूल, थिन-फिन पीवी मॉड्यूल, पीवी मॉड्यूल, पावर कन्‍वर्टर फॉर यूज इन पीवी सिस्‍टम, यूटिलिटी - इंटरकनेक्‍टेड पीवी इंवर्टर, स्‍टोरेज बैटरी शामिल हैं। चीन को लगेगा झटका एमएनआरई के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार के इस आदेश से चीन से आने वाले सस्‍ते सोलर प्रोडक्‍ट्स पर अंकुश लगेगा। इम्‍पोर्ट होने वाले ये प्रोडक्‍ट्स बीआईएस के मानकों पर खरे नहीं उतर पाएंगे। ऐसे में चीन के सोलर मैन्‍युफैक्‍चरर्स को सोलर प्रोडक्‍ट्स की क्‍वालिटी बेहतर करनी होगी। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि भारत के सोलर मार्केट में चीन की हिस्‍सेदारी 80 फीसदी से अधिक पहुंच गई है। यही वजह है कि भारत में सोलर पैनल मैन्‍युफैक्‍चरर्स को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सरकार भी इस बात से परेशान थी कि अच्‍छी क्‍वालिटी न होने के कारण देश में लग रहे सोलर प्‍लांट की परफॉरमेंस काफी खराब थी। जिससे सरकार का टारगेट प्रभावित हो सकता था।

Raju Sajwan

Nov 17,2017 03:00:00 AM IST

नई दिल्‍ली। एक जनवरी से भारत में केवल भारतीय मानक ब्‍यूरो (बीआईएस) अप्रूव्‍ड सोलर प्रोडक्‍ट्स ही बिकेंगे। यह नियम सोलर प्रोडक्‍ट के मैन्‍युफैक्‍चरिंग, स्‍टोरेज, सेल्‍स या डिस्ट्रिब्‍यूटिंग पर भी लागू होगा। इसके पीछे सरकार का मकसद चीन से आ रहे सस्‍ते सोलर प्रोडक्‍ट्स पर अंकुश लगाना है। इसके लिए बुधवार को मिनिस्‍ट्री ऑफ न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी (एमएनआरई) ने सोलर फोटोवोलेटिक सिस्‍टम, डिवाइस, कंपोनेंट गुड्स ऑर्डर 2017 जारी किया है। हालांकि यह आदेश पहले अगस्‍त 2018 से लागू होना था, लेकिन अब एमएनआरई ने इसे 1 जनवरी 2018 से लागू करने को कहा है।

पहले कराना होगा रजिस्‍ट्रेशन
आदेश में कहा गया है कि यदि कोई व्‍यक्ति देश में सोलर प्रोडक्‍ट्स की मैन्‍युफैक्‍चरिंग करना चाहता है तो उसे पहले मानक ब्‍यूरो में अपना रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा। इसी तरह सोलर प्रोडक्‍ट्स का स्‍टोर, सेल्‍स या डिस्ट्रिब्‍यूशन करने वाले भी मानक ब्‍यूरो में रजिस्‍ट्रेशन कराना होगा। आदेश में स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि विदेशों से इंपोर्ट कर भारत में सोलर प्रोडक्‍ट्स का बिजनेस करने वालों को भी मानक ब्‍यूरो में रजिस्‍ट्रेशन कराना अनिवार्य है।

ये प्रोडक्‍ट्स आएंगे दायरे में
एमएनआरई के आदेश में सोलर प्रोडक्‍ट्स की व्‍याख्‍या की गई है, जिसमें क्रिसटलाइन सिलिकॉन पीवी मॉड्यूल, थिन-फिन पीवी मॉड्यूल, पीवी मॉड्यूल, पावर कन्‍वर्टर फॉर यूज इन पीवी सिस्‍टम, यूटिलिटी - इंटरकनेक्‍टेड पीवी इंवर्टर, स्‍टोरेज बैटरी शामिल हैं।

चीन को लगेगा झटका
एमएनआरई के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार के इस आदेश से चीन से आने वाले सस्‍ते सोलर प्रोडक्‍ट्स पर अंकुश लगेगा। इम्‍पोर्ट होने वाले ये प्रोडक्‍ट्स बीआईएस के मानकों पर खरे नहीं उतर पाएंगे। ऐसे में चीन के सोलर मैन्‍युफैक्‍चरर्स को सोलर प्रोडक्‍ट्स की क्‍वालिटी बेहतर करनी होगी। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि भारत के सोलर मार्केट में चीन की हिस्‍सेदारी 80 फीसदी से अधिक पहुंच गई है। यही वजह है कि भारत में सोलर पैनल मैन्‍युफैक्‍चरर्स को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सरकार भी इस बात से परेशान थी कि अच्‍छी क्‍वालिटी न होने के कारण देश में लग रहे सोलर प्‍लांट की परफॉरमेंस काफी खराब थी। जिससे सरकार का टारगेट प्रभावित हो सकता था।

यह होगा असर
सरकार के इस फैसले से सोलर प्रोडक्‍ट्स के लगातार सस्‍ते होने का सिलसिला रूक जाएगा। पिछले साल के मुकाबले सोलर मॉड्यूल की कीमत में 29 फीसदी कमी आई है। इसकी वजह से चीन से आने वाले सस्‍ते पैनल माने जाते हैं।

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