बजट 2020 /एमएसएमई को भी मिले 25,000 करोड़ रुपए का फंड : पीएचडी चैंबर

  • बजट पूर्व बैठक में पीएचडी चैंबर ने वित्त मंत्री को आर्थिक सुधारों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए

Moneybhaskar.com

Dec 18,2019 01:39:13 PM IST

नई दिल्ली. जैसे फंसी हुई आवासी परियोजना को फिर से चालू करने के लिए विशेष फंड बनाया गया है, उसी तरह सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर के लिए भी 25,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक का कोई फंड बनाया जाना चाहिए, जिसमें एमएसएमई से कोई चीज बतौर जमानत देने के लिए ना कहा जाए। यह सुझाव पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारण के साथ हुई बजट पूर्व बैठक में दिया।

देर से भुगतान करने वालों को मिले दंड

चैंबर के अध्यक्ष डीके अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर को फाइनेंस की दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी प्रतिस्पर्धा और विकास प्रभावित होते हैं। सरकार का फोकस व्यवसायों के लिए सस्ती दर पर वित्त की आसान उपलब्धता पर होना चाहिए। एमएसएमई लंबे समय से अपने बड़े कॉर्पोरेट खरीदारों और सरकारी संगठनों से अपने बिलों और प्राप्तियों के विलंबित प्राप्ति की समस्या का सामना कर रहे हैं। इसलिए यह सुझाव दिया गया है कि आदतन बकाएदारों के खिलाफ दंडात्मक उपायों को पेश किया जाए जो 45 दिनों में अधिकतम स्वीकृत शर्तों के अनुसार अपने भुगतान दायित्वों को पूरा नहीं करते हैं। अग्रवाल ने साथ ही कहा कि एमएसएमई मानव संसाधनों की कम उपलब्धता और अफोर्डेबिलिटी जैसे मुद्दे के कारण कंपनी कानून का पूरी तरह से अमल करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में उन्हें कंपनी कानून में मामूली उल्लंघन के लिए अभियोजन प्रावधानों से छूट दी जानी चाहिए।

कारोबारी सहूलियत के लिए बने सिंगल विंडो सिस्टम

अग्रवाल ने बैठक में, उद्योग के लिए भूमि की आसान उपलब्धता, समयबद्ध एकल विंडो क्लीयरेंस, पॉलिसी रेपो रेट का पूर्ण क्रियान्वयन, निर्यात बढ़ाने के लिए कर राहत, एफटीए की समीक्षा और अपग्रेडेशन के लिए आवश्यकता आदि को लेकर भी उपयोगी एवं व्यापक सुझाव दिए गए। अग्रवाल ने कहा कि अर्थव्यवस्था में घरेलू और विदेशी निवेशों को प्रोत्साहित करने के लिए, प्रभावी सिंगल विंडो सिस्टम के साथ व्यापार करने में आसानी को बढ़ाना आवश्यक है। इस संबंध में सबसे महत्वपूर्ण सुधार एक समयबद्ध तरीके से एक ही जगह पर सभी सरकारी विभागों/सभी क्लीयरेंस की सिंगल विंडो क्लीयरेंस सुनिश्चित करना है।

भूमि की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो

राज्यों द्वारा भूमि बैंकों के रूप में आसानी से उपलब्ध भूमि को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य अपनी संबंधित वेबसाइट पर अपने संबंधित क्षेत्रों में भूमि की उपलब्धता प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि नीति आयोग जिला स्तर पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस इंडेक्स की बेंचमार्किंग का कार्य कर सकता है। इससे जमीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान करने और व्यवसायों के लिए फलदायी परिणामों में मदद मिलेगी।

निर्यात बढ़ाने की हो कोशिश

अग्रवाल ने कहा कि एक्सपोर्ट ग्रोथ ट्रैजेक्टरी को दोबारा से किक-स्टार्ट करने के लिए भी प्रयास करने चाहिए। देश की निर्यात क्षमता का दोहन करने के लिए, यह सुझाव दिया जाता है कि डेयरी उत्पादों और समुद्री खाद्य, ऑटोमोबाइल और मोटर वाहन कंपोनेंट्स, हथियारों और गोला बारूद, विद्युत मशीनरी और उपकरण, रत्नों सहित रक्षा और खाद्य प्रसंस्करण, आभूषण, तेल और गैस, फार्मास्यूटिकल्स, खेल के सामान, कपड़ा वस्त्र, हथकरघा और हस्तशिल्प और आईटी जैसे क्षेत्रों और आईटीईएस को ड्यूटी में रियायतों के साथ कच्चे माल की खरीद, उत्पादन प्रक्रियाओं में व्यापक सुविधाएं दी जानी चाहिए।

रेंटल हाउसिंग को मिले प्रोत्साहन

अग्रवाल ने कहा कि रेंटल हाउसिंग को प्रोत्साहित करने के लिए, रियल एस्टेट डेवलपर्स को किराये के आवास से अर्जित मुनाफे पर 10 साल की छुट्टी दी जाएगी क्योंकि यह निवेश को पुनर्जीवित करेगा और धीमी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा।

लॉजिस्टक खर्च कम किया जाए

लॉजिस्टिक्स के संबंध में अग्रवाल ने सिफारिश की कि देश में लॉजिस्टिक लागत 14 प्रतिशत से अधिक है और इसे कम करने की आवश्यकता है। देश में माल की आवाजाही बढ़ाने के लिए जल्द से जल्द रुकी हुई इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जाना चाहिए। माल की एक राज्य से दूसरे राज्यों में आवाजाही को बढ़ाने की आवश्यकता है।लॉजिस्टिक लागत को कम करने के लिए कोल्ड चेन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाया जाना चाहिए और कृषि उपज की वेस्टेज को कम किया जाना चाहिए। वेस्टेज में कमी से किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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