सुझाव /कुटीर एवं लघु उद्योगों के लिए अलग नीति बनाये सरकार: MSME काउंसिल 

  • एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल आगामी 13 से 16 फरवरी को लखनऊ में कृषि ग्रामीण उद्यमशीलता पर शिखर बैठक और व्‍यापार मेले का आयोजन करेगी

Moneybhaskar.com

Nov 18,2019 06:08:00 PM IST

नई दिल्ली. सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) मंत्रालय से संबद्ध निर्यात संवर्धन संस्था ने सरकार से कुटीर एवं लघु उद्योग इकाइयों के लिए अलग नीति बनाने का सुझाव देते हुए कहा है कि गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे इस क्षेत्र को राहत दिलाने के लिए सरकारों को प्राथमिकता के आधार पर काम करना चाहिए। एमएसएमई निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसी) के चेयरमैन डी. एस. रावत ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि अर्थव्‍यवस्‍था में एमएसएमई क्षेत्र के उल्लेखनीय योगदान के बावजूद यह क्षेत्र अब भी अनेक बाधाओं से जूझ रहा है। छोटी इकाइयों को समय पर पर्याप्त कर्ज नहीं मिलना, ऊंची ब्याज दर, समानांतर आवश्यकताएं, इक्विटी कैपिटल और बीमारू इकाइयों के पुनरुद्धार की ठोस व्यवस्था नहीं होना इस क्षेत्र की बड़ी समस्याओं में है।


कृषि ग्रामीण उद्यमशीलता पर शिखर बैठक और व्‍यापार मेले का आयोजन की जाएगी

उन्होंने कहा कि केंद्र तथा राज्य सरकारों और भारतीय रिजर्व बैंक को एमएसएमई क्षेत्र के सामने खड़ी इन चुनौतियों से प्राथमिकता के आधार पर निपटना चाहिए। रावत ने कहा कि मौजूदा समस्याओं के मद्देनजर सरकार को कुटीर एवं लघु उद्योगों के लिए अलग से नीति बनानी चाहिए और उत्तर प्रदेश में सरकार की महत्वाकांक्षी 'एक जिला एक उत्पाद' योजना को उस नीति से जोड़ देना चाहिए। रावत ने बताया कि एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल आगामी 13 से 16 फरवरी को लखनऊ में कृषि ग्रामीण उद्यमशीलता पर शिखर बैठक और व्‍यापार मेले का आयोजन करेगी। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस मौके पर गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रावत और परिषद की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद हरिनारायण राजभर ने ‘एमएसएमई सेक्‍टर- उत्‍तर प्रदेश’ शीर्षक वाली अध्‍ययन रिपोर्ट भी संयुक्‍त रूप से जारी की।

उत्‍तर प्रदेश ने वर्ष 2015-16 और 2017-18 में एमएसएमई क्षेत्र में शत प्रतिशत बढ़ोत्‍तरी दर्ज की है

रिपोर्ट के मुताबिक उत्‍तर प्रदेश ने वर्ष 2015-16 और 2017-18 में एमएसएमई क्षेत्र में शत प्रतिशत बढ़ोत्‍तरी दर्ज की है। इस दौरान ऐसी इकाइयों की संख्‍या 44.03 लाख से बढ़कर 88.89 लाख हो गयी। विकास की यह रफ्तार अगर बनी रही तो उम्‍मीद है कि वर्ष 2021-22 तक उत्‍तर प्रदेश में एमएसएमई इकाइयों की संख्‍या 1.40 करोड़ हो जाएगी और उनसे 3 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा। राजभर ने कहा कि परिषद वर्ष 2025 तक उत्‍तर प्रदेश में एमएसएमई इकाइयों की संख्‍या 3 करोड़ तक पहुंचाने के उद्देश्‍य से पांच साल का रोडमैप तैयार करने के लिये राज्‍य सरकार के साथ साझीदारी करेगी। ऐसा होने से 10 करोड़ लोगों को प्रत्‍यक्ष और 12 करोड़ लोगों को अप्रत्‍यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

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