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ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ

ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल) ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल)
ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल) ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल)

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने ट्रैक्‍टर को नॉन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की कैटेगिरी से बाहर करने का निर्णय लिया है। मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने इस संबंध में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इससे जहां ट्रेक्‍टर की कीमत बढ़ जाएगी, वहीं ट्रैक्‍टर मालिकों पर टैक्‍स का बोझ भी बढ़ जाएगा। क्‍या है ड्राफ्ट नोटिफिकेशन मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सेंट्रल मोटर व्‍हीकल रूल्‍स 1989 में संशोधन किया जा रहा है और नया रूल सेंट्रल मोटर व्‍हीकल (अमेंडमेंट) रूल्‍स 2017 के नाम से जाना जाएगा। रूल्‍स्‍ा 1989 के मुताबिक एग्रीकल्‍चर ट्रैक्‍टर को एक नॉन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल माना जाता है। लेकिन नए रूल्‍स में संशोधन करते हुए कहा गया है कि इस लाइन को हटा दिया जाए। यानी कि एग्रीकल्‍चर ट्रैक्‍टर को नॉन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की कैटेगिरी से हटा दिया जाए। मिनिस्‍ट्री ने इस अमेंडमेंट को लेकर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जो 27 अक्‍टूबर से पहले मिनिस्‍ट्री को भेजनी होगी। क्‍या है मकसद दी इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलो एसपी सिंह ने moneybhaskar.com से कहा कि दरअसल छोटे ट्रक व टेम्‍पो मालिकों की यह शिकायत रही है कि ट्रैक्‍टर मालिक ट्रॉली लगाकर सामान की ढुलाई करते हैं, जिससे उनका कारोबार प्रभावित होता है। ट्रक व टेम्‍पो मालिकों ने अपने-अपने राज्‍यों की सरकारों से यह शिकायत की तो राज्‍यों ने केंद्र के समक्ष यह मांग उठाई। संभव है कि राज्‍यों की मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया हो। इससे अब ट्रैक्‍टर मालिक एग्रीकल्‍चर के नाम पर मिल रही छूट का फायदा नहीं उठा पाएंगे और उन्‍हें भी कॉमर्शियल व्‍हीकल के तौर पर ट्रीट किया जाएगा। महंगे हो जाएंगे ट्रैक्‍टर सिंह ने बताया कि अब तक ट्रैक्‍टर को फार्मिंग इक्विपमेंट माना जाता है और खरीदते वक्‍त ट्रैक्‍टर पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है, लेकिन अब इन्‍हें टेम्‍पो, ट्रक की कैटेगिरी में डाला जाता है तो उस पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे ट्रैक्‍टर महंगे हो सकते हैं। पड़ेगा टैक्‍स का बोझ सिंह के मुताबिक, अब तक ट्रैक्‍टर पर रोड टैक्‍स में भी छूट है, लेकिन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की कैटेगिरी में आने के बाद ट्रैक्‍टर मालिकों से भी रोड टैक्‍स वसूला जाएगा। इससे उन पर टैक्‍स का बोझ बढ़ जाएगा।

Raju Sajwan

Oct 07,2017 01:55:00 PM IST
नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने ट्रैक्‍टर को नॉन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की कैटेगिरी से बाहर करने का निर्णय लिया है। मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने इस संबंध में ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इससे जहां ट्रेक्‍टर की कीमत बढ़ जाएगी, वहीं ट्रैक्‍टर मालिकों पर टैक्‍स का बोझ भी बढ़ जाएगा।

क्‍या है ड्राफ्ट नोटिफिकेशन
मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि सेंट्रल मोटर व्‍हीकल रूल्‍स 1989 में संशोधन किया जा रहा है और नया रूल सेंट्रल मोटर व्‍हीकल (अमेंडमेंट) रूल्‍स 2017 के नाम से जाना जाएगा। रूल्‍स्‍ा 1989 के मुताबिक एग्रीकल्‍चर ट्रैक्‍टर को एक नॉन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल माना जाता है। लेकिन नए रूल्‍स में संशोधन करते हुए कहा गया है कि इस लाइन को हटा दिया जाए। यानी कि एग्रीकल्‍चर ट्रैक्‍टर को नॉन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की कैटेगिरी से हटा दिया जाए। मिनिस्‍ट्री ने इस अमेंडमेंट को लेकर लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं, जो 27 अक्‍टूबर से पहले मिनिस्‍ट्री को भेजनी होगी।
क्‍या है मकसद
दी इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के सीनियर फेलो एसपी सिंह ने moneybhaskar.com से कहा कि दरअसल छोटे ट्रक व टेम्‍पो मालिकों की यह शिकायत रही है कि ट्रैक्‍टर मालिक ट्रॉली लगाकर सामान की ढुलाई करते हैं, जिससे उनका कारोबार प्रभावित होता है। ट्रक व टेम्‍पो मालिकों ने अपने-अपने राज्‍यों की सरकारों से यह शिकायत की तो राज्‍यों ने केंद्र के समक्ष यह मांग उठाई। संभव है कि राज्‍यों की मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह निर्णय लिया हो। इससे अब ट्रैक्‍टर मालिक एग्रीकल्‍चर के नाम पर मिल रही छूट का फायदा नहीं उठा पाएंगे और उन्‍हें भी कॉमर्शियल व्‍हीकल के तौर पर ट्रीट किया जाएगा।
महंगे हो जाएंगे ट्रैक्‍टर
सिंह ने बताया कि अब तक ट्रैक्‍टर को फार्मिंग इक्विपमेंट माना जाता है और खरीदते वक्‍त ट्रैक्‍टर पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है, लेकिन अब इन्‍हें टेम्‍पो, ट्रक की कैटेगिरी में डाला जाता है तो उस पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा। इससे ट्रैक्‍टर महंगे हो सकते हैं।
पड़ेगा टैक्‍स का बोझ
सिंह के मुताबिक, अब तक ट्रैक्‍टर पर रोड टैक्‍स में भी छूट है, लेकिन ट्रांसपोर्ट व्‍हीकल की कैटेगिरी में आने के बाद ट्रैक्‍टर मालिकों से भी रोड टैक्‍स वसूला जाएगा। इससे उन पर टैक्‍स का बोझ बढ़ जाएगा।
फार्म लैंड घटा पर बढ़ी ट्रैक्‍टर डिमांड
सिंह ने कहा कि जब भी आंकड़े सामने आते हैं तो पता चलता है कि फार्म लैंड तो घट रही है, लेकिन ट्रैक्‍टर की खरीददारी बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह यही है कि लगभग हर राज्‍य में ट्रैक्‍टर का कॉमर्शियल इस्‍तेमाल हो रहा है। कंस्‍ट्रक्‍शन सेक्‍टर में सामान की ढुलाई में ट्रैक्‍टर ट्रॉली का लगातार इस्‍तेमाल होता रहा है। सिंह ने कहा कि हालांकि जो लोग ट्रैक्‍टर ट्रॉली का कॉमर्शियल इस्‍तेमाल करते हैं और अगर वे टैक्‍स देना चाहते है तो उनके लिए सरकार का यह फैसला राहत देगा, क्‍योंकि उन्‍हें पुलिस और प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी बहुत परेशान करते हैं।
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ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल)ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल)
ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल)ट्रैक्टर को बस और ऑटो की कैटेगरी में डालेगी सरकार, बढ़ेगी कीमत और टैक्स का बोझ (फाइल)

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