उम्मीद /सरकारी पोर्टल जीईएम बन सकता है भारत का अमेजन : पीयूष गोयल

  • निजी सेक्टर के लिए खोला जा सकता है गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पोर्टल, अभी सरकारी क्षेत्र के लिए होता है इस्तेमाल

Moneybhaskar.com

Oct 14,2019 09:46:10 AM IST

नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि उनका मानना है कि सरकार का पोर्टल जीईएम (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) भारतीय उत्पादों को बेचने में अमेजन और फ्लिपकार्ट की तरह काम कर सकता है। भारत अंतरराष्ट्रीय सहकारी व्यापार मेला (आईआईसीटीएफ) के समापन समारोह में उन्होंने दिल्ली में कहा कि वह जीईएम पोर्टल को निजी कारोबार व निजी क्षेत्र के लिए खोलने पर विचार कर रहे हैं।

सरकारी खरीद के लिए इस्तेमाल होता है जीईएम

जीईएम विभिन्न सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के उपयोग में आने वाली वस्तुओं और सेवाओं की खरीद के लिए ऑनलाइन सुविधा प्रदान करता है जिसका मकसद सरकारी खरीद में पारदर्शिता लाना और उसकी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ खरीद में तेजी लाना है। गोयल ने कहा कि अमेजन और फ्लिपकार्ट की तरह जीईएम भारत का अपना ई-कॉमर्स पोर्टल बन सकता है जिसके जरिए भारत में निर्मित परंपरागत व विरासत की वस्तुओं के साथ-साथ सहकारी क्षेत्र की वस्तुओं को बेचा जा सकता है।

6500 रेलवे स्टेशनों पर खोले जा सकते हैं स्टॉल

सहकारी क्षेत्र के उत्पादों के लिए व्यापक बाजार मुहैया करवाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि जीईएम स्वदेशी वस्तुओं के लिए देश-विदेश में एक आउटलेट का काम कर सकता है। गोयल ने कहा कि 6,500 रेलवे स्टेशनों पर पारदर्शी तरीके से को-ऑपरेटिव उत्पादों के लिए स्टॉल खोले जा सकते हैं। उन्होंने इसी तरह के स्टॉल हवाई अड्डों और बस अड्डों पर खोले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि नए मॉलों में सहकारी या हस्तशिल्प की दुकानों के लिए किफायती दरों पर जगह उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

बदनामी से बचने के लिए गलत काम को उजागर करे सहकारी क्षेत्र : गोयल

पीयूष गोयल ने कहा कि सहकारी क्षेत्र का निर्माण करनेवालों को सोचना होगा कि स्व-विनियमन से क्षेत्र को किस तरह मजबूत किया जाए और गलत कामों को उजागर किया जाए। गोयल ने यह बात पंजाब एवं महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक घोटाले के संदर्भ में कही। उन्होंने कहा कि मैं नहीं मानता कि इतने बड़े बैंक में इतना बड़ा घोटाला सैकड़ों लोगों की संलिप्तता के बिना हो सकता है। इतने सारे खाते खुले होंगे। इतने सारे फंड की हेराफेरी हुई होगी। इसमें शाखाएं संलिप्त होंगी, प्रबंधन शामिल होगा, कर्मचारी संलिप्त होंगे। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि को-ऑपरेटिव सेक्टर के जो हितचिंतक हैं उनका, हम सबका दायित्व है कि पूरे सेक्टर की बदनामी न हो। कोई ऐसा काम न हो जिससे इसके अस्तित्व पर प्रश्न चिन्ह लग जाए।

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