मनी भास्कर खास /उधारी ने तोड़ी अलीगढ़ के ताला उद्योग की कमर, 1500 से अधिक कारखानों पर लटका ताला

  • एमएसएमई में पंजीकरण न होने पाने से नहीं मिलता सरकारी योजनाओं का लाभ

Moneybhaskar.com

Aug 02,2019 04:23:16 PM IST

नई दिल्ली। देश के अलग-अलग शहरों में कई तरह के छोटे और लघु कारोबार चल रहे हैं। कभी इन छोटे और लघु उद्योगों से लाखों लोगों को रोजगार मिलता था। लेकिन सस्ता आयात बढ़ने और फैशन में बदलाव के साथ यह उद्योग अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। हालात यह हैं सरकारी मदद नहीं मिल पाने के कारण कई शहरों में यह छोटे उद्योग या तो बंद हो चुके हैं या फिर बंद होने की कगार पर हैं। हम आपको ऐसे ही छोटे शहरों के उद्योगों के बारे में बताने जा रहे है जहां के उद्योग धंधे बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। आज हम आपको अलीगढ़ के ताला कारोबार के बारे में बता रहे हैं।

ताला नगरी पर ताला लगने की नौबत

उत्तर प्रदेश का अलीगढ़ पूरे देश में ताला नगरी के रूप में मशहूर है। एक समय यहां पर पूरे देश की जरूरत के करीब 75 फीसदी ताले बनते थे। आज ताला नगरी का ताला उद्योग ताला लगने के संकट से जूझ रहा है। अलीगढ़ में ताला कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आज यह कारोबार बुरी तरह से संकट से जूझ रहा है। पिछले कुछ सालों में 1500 से ज्यादा कारखानों पर ताला लग चुका है जबकि 1 हजार से ज्यादा कारखाने ताला लगने की कगार पर खड़े हैं। कभी लाखों लोगों को रोजगार देने वाले ताला कारोबार से इस समय मात्र 10 हजार लोग जुड़े हैं जबकि कारखानों की संख्या घटकर करीब 2 हजार रह गई है।

उधारी बनी बड़ा संकट

कारोबारियों का कहना है कि इस उद्योग से जुड़े लोगों की सबसे बड़ी समस्या उधारी है। कारोबारियों के अनुसार, बिक्री के अनुसार भुगतान नहीं मिलने से पूंजी का संकट खड़ा हो जाता है। बड़े उद्योग इस संकट को झेल जाते हैं लेकिन छोटे कारखानों के मालिकों के सामने आर्थिक तंगी खड़ी हो जाती है। यही कारण है कि लगातार छोटे कारखाने बंद हो रहे हैं। जीएसटी और नोटबंदी में भी छोटे कारोबारियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके अलावा एमएसएमई में पंजीकरण न हो पाने के कारण कच्चे माल पर भी छोटे कारोबारियों को सरकारी छूट का लाभ नहीं मिल पाता है।

बिल्डिंग हार्डवेयर और डाई कास्टिंग का काम भी चौपट

अलीगढ़ के कारोबारियों का कहना है कि कभी यहां पर बिल्डिंग हार्डवेयर, डाई कास्टिंग, पीतल की मूर्तियां और ऑटो पार्ट्स बनाने का काम भी खूब होता था। लेकिन सस्ते आयात और बदलते फैशन के कारण यह कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है। इन उद्योगों के दम तोड़ने के पीछे सरकारी लाभ नहीं मिलना भी बड़ा कारण रहा है।

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