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ईंट की जगह ले रहा AAC ब्‍लॉक, हाउसिंग को फायदा

ईंट की जगह ले रहा AAC ब्‍लॉक, हाउसिंग को फायदा
 नई दिल्‍ली। एक-एक ईंट जोड़कर महल बनाने वाली कहावत अब शायद गुजरे जमाने की बात रह जाएगी, क्योंकि अब मकानों और अन्य कंस्ट्रक्शन में ईंट की जगह तेजी से एएसी ब्लॉक यानी ऑटोक्लेव्ड एयरेटेड कंक्रीट ले रहा है। इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर खासकर हाउसिंंग सेक्‍टर में एएसी की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। किफायती होने के साथ-साथ यह ईको फ्रेंडली भी है। एएसी को लेकर अभी जागरूकता अधिक नहीं है लेकिन शहरी क्षेत्रों खासकर टीयर-1 में हाउसिंग सेक्‍टर में इसका इस्‍तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा सरकारी भवनों के निर्माण में एएसी को तरजीह दी जा रही है। एएसी ब्‍लॉक इंडस्‍ट्री का कहना है कि विदेश में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर में एएसी ब्‍लॉक्‍स का बड़े पैमाने पर इस्‍तेमाल हो रहा है। अपने देश में जागरूकता बढ़ने से एएसी की डिमांड दिल्‍ली, मुंबई जैसी मेट्रो सिटी के अलावा दूसरे छोटे शहरों से भी आएगी। सरकार को इस इंडस्‍ट्री को अपने ग्रीन इंफ्रा प्रोजेक्‍ट के तौर पर आगे बढ़ाने के कदम उठाने चाहिए। 
 
क्‍या है एएसी की खायिसत 
 
एएसी यानी ऑटोक्लेव्ड एयरेटेड कंक्रीट परंपरागत ईंट की तुलना में हल्‍के, आकार में बड़े और मजबूत होते हैं। इसका निर्माण भी ईको फ्रेंडली तरीके से होता है। जहां एक भट्ठा ईंट बनाने के लिए दो एकड़ जमीन की मिट्टी का इस्तेमाल करता है, वहीं एएसी ब्लॉक का निर्माण थर्मल पावर प्लांट की राख से किया जाता है। एक एएसी ब्लॉक 8 ईंटों के बराबर काम करता है। इसके अलावा यह आग प्रतिरोधी, कीट प्रतिरोधी, ध्वनि अवशोषक, ताप रोधक तथा भूकंप प्रतिरोधी भी होता है।
 
कंस्ट्रक्शन लागत में आती है 20-25% की कमी  
 
फरीदाबाद बेस्ड कंपनी रिचा इंडस्ट्रीज के चेयरमैन सुशील गुप्ता कहते हैं कि एएसी ब्लॉक से कंस्ट्रक्शन लागत में 20-25 फीसदी कमी आ जाती है, क्योंकि एक ब्लॉक का आकार ईंट की तुलना में काफी ज्यादा होता है यानी बिल्डिंग बनाने में आठ ईंट के बराबर एक ब्लॉक का इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही बिल्डिंग बनाने में सीमेंट, सरिया, मजदूरी की लागत भी 20-25 फीसदी कम हो जाती है। इससे बनने वाले मकानों का तापमान भी औसतन 3-4 डिग्री तक कम होता है। इसीलिए सरकारी और निजी क्षेत्र की परियोजनाओं में इसका चलन तेजी से बढ़ रहा है। 
 
इंडस्ट्री को सरकार से बड़ी राहत की उम्मीद
 
पर्यावरणविद् ईंट में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी के खनन पर रोक लगाने के लिए कई बार सरकार को लिख चुके हैं। हाल में सुप्रीम कोर्ट ने भी पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरकता के लिए चिंता जाहिर की थी। इसीलिए ईंट के विकल्प के तौर पर एएसी ब्लॉक को देखा जा रहा है। हालांकि इंडस्ट्री चाहती है कि सरकार कंस्ट्रक्शन में इसके इस्तेमाल को अनिवार्य कर दे और विदेशों से एएसी ब्लॉक निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के इंपोर्ट पर छूट मिले। व्हाइट ब्रिक्स के एमडी अंकित प्रधान कहते हैं कि अगर इंडस्ट्री को सरकार का प्रोत्साहन मिलता है तो देश में ग्रीन कंस्ट्रक्शन तेजी से बढ़ेगा। अभी यह नई इंडस्‍ट्री है। अधिकतर निजी डेवपलर्स और कुछ सरकारी भवनों के निर्माण में इसका इस्‍तेमाल किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके प्रति जागरूकता बढ़ने से डिमांड में तेजी आने की उम्‍मीद है। 
 
 
नए प्लांट की कुल लागत 30-35 करोड़ रुपए
एएसी ब्लॉक के 2 लाख क्यूबिक मीटर प्लांट के निर्माण में करीब 30-35 करोड़ रुपए तक का खर्च आता है, जो लगभग पूरी तरह से ऑटोमेशन प्रणाली पर काम करता है। इस प्लांट को चलाने के लिए 50 लोगों के कार्यबल की आवश्यकता होती है। वहीं इस प्लांट में लगने वाले उपकरणों में 60 फीसदी मशीनरी चीन और जर्मनी जैसे देशों से आयात की जाती है।
 
 
विदेशों में बड़े स्तर पर होता है एएसी ब्लॉक का इस्तेमाल
चीन में इंफ्रास्ट्रक्चर में एएसी ब्लॉक का 100 फीसदी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, यूरोपीय देशों में इसका इस्तेमाल 60 फीसदी से अधिक हो रहा है। भारत में अभी इसको वो पहचान नहीं मिली है जो मिलनी चाहिए थी। फिलहाल देश में गुजरात और दिल्ली के सरकारी भवनों और मेट्रो निर्माण निर्माण में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

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