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खास खबर: 2019 से पहले क्‍या मोदी के लिए 'नसीब वाला' साबित होगा मानसून?

पूर्वानुमान बताते हैं कि मानसून अच्‍छा रहेगा तो क्‍या यह बरसात भी प्रधानमंत्री के अच्‍छे नसीब का संकेत दे रही है?

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नई दिल्‍ली. साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे तो अच्‍छे मानसून के कारण खाद्यान्‍न उत्‍पादन अधिक हुआ था और प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके अच्‍छे नसीब के कारण ही बरसात अच्‍छी हुई। अब वित्त वर्ष 2018-19 की शुरुआत हो चुकी है और प्रधानमंत्री के इस कार्यकाल का आखिरी मानसून का पूर्वानुमान घोषित हो चुका है। पूर्वानुमान बताते हैं कि मानसून अच्‍छा रहेगा तो क्‍या यह बरसात भी प्रधानमंत्री के अच्‍छे नसीब का संकेत दे रही है?  क्‍या इस बरसात से देश में रिकॉर्ड तोड़ खाद्यान्‍न उत्‍पन्‍न होंगे और इसका फायदा प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी को मिलेगा?  

क्‍या है अनुमान ? 
सोमवार को मौसम विभाग ने घोषणा की कि इस साल देश में मानसून नॉर्मल रहने की उम्मीद है। पूरे सीजन में 97% बारिश का अनुमान है। वहीं, लॉन्ग पीरियड एवरेज 96 से 104 फीसदी रह सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस साल सूखा पड़ने की संभावना जीरो फीसदी या फिर कम से कम है।


क्‍या है सरकार का दावा?  
मानसून के पूर्वानुमान के बाद एग्रीकल्‍चर सेक्रेट्री एसके पटनायक ने कहा कि इस साल देश का खाद्यान्‍न उत्‍पादन रिकॉर्ड हाई (277.49 मिलियन टन) पर पहुंच जाएगा, जो पिछले साल 275.11 मिलियन टन था। चालू कॉर्प ईयर 2017-18 अभी खत्‍म नहीं हुआ है। यह साल जून 2018 में खत्‍म होगा। पटनायक के मुताबिक, सामान्‍य मानसून जून में शुरू होने वाली खरीफ की बुआई के लिए बहुत फायदेमंद रहेगी। 

 

क्‍या पड़ेगा खेती पर असर?  
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की चाल पर आईएमडी का अनुमान 15 मई को आएगा, वहीं मानसून पर अगला अपडेट जून में आएगा। जून के अपडेट में यह पता चलेगा कि किस इलाके में कितनी बारिश होगी। फूड बास्‍केट एरिया में अच्‍छी बारिश होने से ही खेती पर अच्‍छा असर पड़ता है। 
बावजूद इसके, पिछले कुछ सालों से मौसम विभाग के अप्रैल का पूर्वानुमान सटीक रहा है, ऐसे में अनुमान है कि अगला मानसून खेती के लिए अच्‍छा रहेगा। कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने कहा कि पिछले तीन साल से अच्‍छे मानसून के कारण खेती पर अच्‍छा असर पड़ा है और सरप्‍लस प्रोडक्‍शन हुआ है। उम्‍मीद है कि इस बार भी यही होगा। 

 

लेकिन किसे होगा फायदा? 
देवेंद्र शर्मा ने moneybhaskar.com से कहा कि सवाल यह उठता है कि इस नॉर्मल मानसून का फायदा किसे होगा? मानसून की वजह से फसल का उत्‍पादन तो बंपर हो जाता है, लेकिन हम इतने सालों में बंपर उत्‍पादन का मैनेजमेंट करना नहीं सीखे। यही वजह है कि इस बंपर उत्‍पादन का फायदा नहीं होता, उल्टे किसानों को नुकसान होता है। शर्मा ने कहा कि हो सकता है कि इसका फायदा सरकार या मध्‍य वर्ग को हो, लेकिन किसान तो बंपर उत्‍पादन के बाद उसे फैंकने को मजबूर हो जाएगा या उसे काफी कम दाम पर देना पड़ेगा। सरकारों ने आज तक ऐसा ढांचा खड़ा नहीं किया, जिससे फसल का एश्‍योर्ड प्राइस या डेफिनेट प्राइस किसानों को मिल सके। 

 

मानसून और खेती 

देश की जीडीपी में 15 प्रतिशत का योगदान देने वाली और देश की करीब 60 प्रतिशत जनता को रोजगार देने वाली कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है और कृषि भूमि का महज 40 प्रतिशत हिस्से में ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। 

 


इकोनॉमी को ऐसे होता है फायदा

-बता दें कि सामान्य बारिश से एग्रीकल्चर सेक्टर को फायदा होता है, जिसका सीधा असर देश की इकोनॉमी पर होता है। देश की जीडीपी में खेती का योगदान 16 फीसदी है, वहीं खेती से देश के 50 फीसदी लोगों को रोजगार मिलता है। 

- एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सामान्य मानसून से इकोनॉमी को व्यापक तौर पर फायदा होता है। सबसे बड़ा फायदा रूरल इकोनॉमी को बूस्ट मिलने के रूप में होता है। इससे वहां के लोगों की इनकम बढ़ती है,  जिसका फायदा एफएमसीजी सेक्टर, ऑटो सेक्टर, बैंकिंग सेक्टर से लेकर एग्री सेक्टर को मिलता है। विभिन्न सेक्टर्स को बूस्ट मिलने से देश में नौकरियों के ज्यादा अवसर पैदा होते हैं। 

-अच्छे मानसून से महंगाई में राहत मिलती है और कर्ज सस्ता होने की संभावनाएं बढ़ती हैं। महंगाई को देखते हुए ही आरबीआई ब्याज दरों पर फैसला लेता है। 

-इकोनॉमिस्ट्स के मुताबिक, मानसून अच्छा होने से छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोगों की इनकम बढ़ती है, जिसका सीधा असर उनके खर्च और सेविंग पर होता है। अगर अच्छा मानसून रहेगा तो लोगों की सेविंग तेजी से बढ़ती है, जिसका फायदा बैंकिंग सेक्टर को मिलता है।

-स्टॉक्स में ज्यादा रिटर्न के मौके पैदा होते हैं। खासकर ऑटो, एफएमसीजी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर्स के लिए आउटलुक बेहतर होता है।


कैसा रहा मोदी के लिए मानसून?  

दिलचस्‍प बात यह रही कि 2013 में हुई बारिश का फायदा प्रधानमंत्री मोदी के सत्‍ता संभालते ही मिला, लेकिन अगले दो साल बारिश कम होने के कारण खाद्यान्‍न का उत्‍पादन कम हो गया। परंतु पिछले दो साल से लगातार अच्‍छे मानसून की वजह से खाद्यान्‍न उत्‍पादन बढ़ रहा है। इस बार भी तीसरे साल लगातार अच्‍छे मानसून का अनुमान भाजपा के लिए अच्‍छी खबर साबित हो रही है। 

साल 2017 : 98 % 
साल 2016 : 97 % 
साल 2015 : 86 % 
साल 2014 : 88 % 
साल 2013 : 106 % 

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