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नोटबंदी के 12 दिनों में इन 7 को हुआ सबसे ज्‍यादा नुकसान, जानें कैसे

नोटबंदी के फैसले को 12 दिन बीत चुके हैं। इन 7 दिनों में पूरे देश में जनता बैंक और एटीएम की लाइनों में खड़ी हुई है।

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नई दिल्‍ली। नोटबंदी के फैसले को 12 दिन बीत चुके हैं। इन 12 दिनों में पूरे देश में जनता बैंक और एटीएम की लाइनों में खड़ी हुई है। सरकार ने कुछ क्षणिक आदेशों में ढील दी तो कुछ में बाद में बदलाव कर जनता को राहत दिलाने की कोशिश की। कुछ हद तक राहत मिल भी रही है। लिहाजा, अब लाइनें छोटी होनी शुरू हो गई हैं। लेकिन देश में 7 लोग ऐसे हैं, जिनकी इस फैसले से रातों की नींद हराम हो गई है। आम जनता की चिंता तो शायद 31 दिसंबर के बाद बिल्‍कुल भी न रहे, लेकिन इन 7 लोगों की रीढ़ पर जो चोट लगी है, उससे संभलने में इन्‍हें शायद सालों लग जाएं। आइए बताते हैं आपको आखिर कौन हैं ये 7 लोग और कैसे हुआ इन्‍हें नुकसान...
 
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1-हवाला डीलर
 
देश में हवाला के जरिए काले धन का लेन-देन बहुत बड़े पैमाने पर होता है। बड़े-बड़े शहरों से लेकर छोटे कस्‍बों तक में हवाला डीलर पैले हुए हैं। ये कमीशन आधारित व्‍यवस्‍था से बड़े से बड़े कैश को इधर-उधर ट्रांसफर करते थे। नोट बंदी के तीसरे ही दिन इस तरह की रिपोर्ट सामने आने लगी थी दिल्‍ली जैसे बड़े शहरों में हवाला का धंधा 80 फीसदी तक प्रभावित हुआ है।
 
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2.रीयल एस्‍टेट माफिया
 
काले धन की सबसे बड़ी खपत कराने वालों में रीयल एस्‍टेट माफिया भी शामिल हैं। ये भी बड़े शहरों से लेकर कस्‍बों तक में फैले हैं। सरकारी जमीनों पर कब्‍जा कर इलीगल तरीके से इसे बेचकर काले धन को इकट्ठा करते हैं। लेकिन, नोट बंदी के बाद से रीयल एस्‍टेट माफिया की कमर टूट गए हैं। उम्‍मीद  जताई जा रही है कि आने वाले सालों में इनके उभरना मुश्किल है। 
 
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3.फेक करेंसी डीलर
 
देश में फेक करेंसी का भी बड़ा मुद्दा है। पड़ोसी देश पाकिस्‍तान में काम कर रहे आतंकी संगठनों के माध्‍यम से भी फेक करेंसी भारत में आती है। नेशनल इन्‍वेस्टिगेटिंग एजेंसी (एनआईए) के मुताबिक देश में 10 लाख नोटों में से 250 नोट नकली हैं। एजेंसी की पड़ताल के अनुसार हमारे नोटों में जो पेपर इस्‍तेमाल होता है उससे बिल्‍कुल मिलता जुलता पेपर पाकिस्‍तान में भी सप्‍लाई होता है। ऐसे में हजारों करोड़ के जीरो एरर नकली नोट देश में आने वाले थे। लेकिन, नोट बंदी से यह बंद हो गया।  
 
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4.टेररस्टि ऑर्गेनाइजेशनंस
 
भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भी बड़े नोटों का ही इस्‍तेमाल होता है। टेरर फंडिंग कराने वाले लोगों की भी इससे कम टूटी है। पहले नकली नोटों को देश में चलाया जाता है और फिर इसके बदले मिलने वाले असली नोटों के जरिए टेरर फंडिंग होती है। लेकिन, आंकलन यह कहता है कि नोट बंदी के बाद से इस तरह के काम में भी बहुत कमी आई है।
 
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5.  स्‍पोर्ट्स सट्टेबाज
 
देश में खेलों में जो सट्टा लगाया जाता है उसका मार्केट लगभग 150 बिलियन डॉलर यानी करीब 1.50 लाख करोड़ रुपए का है। किसी भी बड़े क्रिकेट मैच या अन्‍य किसी खेल में रातों रात मोटी रकम इधर से उधर हो जाती है। लेकिन, नोट बंदी के बाद से इन सट्टेबाजों का कामकाज ठप हो गया है। हालांकि, आने वाला समय बताएगा कि किस तरह से इनको खत्‍म किया जा सकता है।
 
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6. एजुकेशन माफिया
 
एजुकेशन सेक्‍टर में सक्रिय माफिया के काम पर भी नोट बंदी का बुरा असर पड़ा है। बड़े बड़े स्‍कूलों में नर्सरी तक के एडमिशन में लाखों रुपए का खेल होता है। इसके अलावा एमबीबीएस या इंजीनियरिंग की सीटों का धंधा करने वाले माफिया की कहानी किसी से छिपी नहीं है कि कैसे में इनमें करोड़ों रुपए एक एक दाखिले पर लिए जाते हैं। एंट्रेंस एग्‍जाम में पास कराने तक को लेकर समय-समय पर ये माफिया मोटी रकम के साथ दबोचे गए हैं।
 
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7.फेक ट्रस्‍ट व एनजीओ
 
भारत में तमाम नकली ट्रस्‍ट व एनजीओ काम कर रहे हैं। इन पर समय-समय पर कार्रवाई होती रहती है। काले धन की खपत वाले ये बड़े क्षेत्रों में से एक हैं। कई एक तो ऐसे हैं जो छूट के दिलाने के नाम पर ही खोले गए हैं। इसके अलावा मोटी रकम लेकर प्रोटेस्‍ट व तमाम गतिविधियों में काम करने वाले फर्जी एनजीओ भी इससे प्रभावित हुए हैं।
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