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GST के क्रेडिट चेन से बाहर रहने वाले MSME को चुकानी होगी कीमत

लेखक अनिल भारद्वाज, फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्मॉमल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के जनरल सेक्रेट्री हैं

GST is a single tax to be levied on the supply of goods and services.
 
जीएसटी एक ट्रांसफॉर्मेटिव बिजनेस प्रोसेस रिफॉर्म है। सबसे पहला, जीएसटी से 1991 में एक्‍सर्टनल ट्रेड पर लगे बेरियर्स हट जाएंगे। इंटरनल ट्रेड पर लगे बेरियर्स हटने से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत के इंटरनल ट्रेर्ड में अच्‍छा खासा एक्‍सपेंशन होगा।
 
दूसरा, टैक्‍सों का प्रभाव कम होने पर मैन्‍युफैक्‍चरिंग और एक्‍सपोर्ट सेक्‍टर और अधिक कॉम्पिटिटिव बनेगा।
 
तीसरा, रेवेन्‍यू बढ़ने पर राज्‍य सरकारें इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर जोर देंगी, जो इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है।
 
जीएसटी का रियल टाइम डाटा, एमएसएमई की दो बड़ी समस्‍याओं को हल करने में सहायक होगा। पहला एमएसएमई के लिए फाइनेंस की उपलब्‍धता बढ़ जाएगी और पेमेंट मिलने में देरी की समस्‍या भी नहीं रहेगी। इंफॉर्मेशन बेस्‍ड कोलेटरल का दौर शुरू हो जाएगा। दूसरा, जीएसटी सिस्‍टम से फाइनेंशियल डिसिप्लिन को मजबूती मिलेगी।
 
दूसरी ओर, मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट (छोटी हो या बड़ी) जीएसटी क्रेडिट चैन का पार्ट नहीं होंगी, उन्‍हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। जीएसटी से बाहर होने के कारण न केवल उन्हें भारी टैक्‍स चुकाने होंगे, बल्कि सभी बड़े बायर्स उनसे माल खरीदना बंद कर देंगी, क्‍योंकि बायर्स केवल जीएसटी के अधीन कारोबारी कर रहे सप्‍लायर्स को ही वरीयता देंगे।
 
इसके अलावा छोटी मैन्‍युफैक्‍चरिंग यूनिट्स के स्‍पेशल स्‍कीम्‍स जैसे कम्‍पो‍जिशन स्‍कीम कुछ हद तक मदद करेंगी, क्‍योंकि वे यूजर को इंटर-स्‍टेट ट्रेड से रोक देंगी।
 
मैन्‍युफैक्‍चरर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नये जीएसटी का संदेश साफ है, जीएसटी क्रेडिट चैन में शामिल लोगों को फायदा हो या न्‍यूट्रल रहे, लेकिन जो जीएसटी से बाहर रहने वाले लोगों के लिए यह बेहद महंगा साबित होगा।
 
भारत के आकार, डायवर्सिटी और कॉम्प्लेक्सिटी को देखते हुए इनडायरेक्‍ट टैक्‍स में बदलाव, जिसमें केंद्र और राज्‍य दोनों शामिल हों, एक आसान काम नहीं है। एक पूर्ण जीएसटी का दौर लाने के लिए जो प्रयास भारत में किया जा रहा है, वह दुनिया भर में कहीं नहीं हुआ। आज यह टेलीकॉम, आईटी और स्‍पेस टैक्‍नोलॉजी सेक्‍टर की बदौलत सच होने जा रहा है, जिन्‍होंने जीएसटीएन को जीएसटी की बेकबोन बना दिया।
 
  • लेखक अनिल भारद्वाज, फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्‍मे) के जनरल सेक्रेट्री हैं 
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