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MSME के लिए PM की अध्यक्षता में बन सकती है अथॉरिटी, कारोबार करना होगा आसान

MSME के लिए PM की अध्यक्षता में बन सकती है अथॉरिटी, कारोबार करना होगा आसान
 
नई दिल्‍ली। छोटे कारोबारियों के लिए प्राइम मिनिस्‍टर की अध्‍यक्षता में एक अथॉरिटी बन सकती है। नेशनल एमएसएमई पॉलिसी के लिए गठित एक सदस्‍यीय प्रभात कुमार कमेटी ने अथॉरिटी बनाने की  सिफारिश की है। कमेटी ने कहा है कि इस अथॉरिटी में एमएसएमई से संबंधित सभी मिनिस्‍ट्री को शामिल किया जाए। अथॉरिटी का काम पॉलिसी बनाने से लेकर एमएसएमई के समक्ष आ रही परेशानियों को दूर करना होगा।
 
 
कौन सी मिनिस्‍ट्री हों शामिल
प्रभात कुमार कमेटी ने कहा है कि एमएसएमई सेक्‍टर के कॉम्प्रिहेंसिव डेवलपमेंट नेशनल एमएसएमई अथॉरिटी की जरूरत है। इस अथॉरिटी का कामकाज कैबिनेट सचिवालय संभाले। इसमें मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई, मिनिस्‍ट्री ऑफ फाइनेंस, मिनिस्‍ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स, डिपार्टमेंट ऑफ लीगल अफेयर्स, डीआईपीपी, मिनिस्‍ट्री ऑफ लेबर एंड इम्प्लॉइमेंट, मिनिस्‍ट्री ऑफ टेक्‍सटाइल्‍स, मिनिस्‍ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग इंड‍स्‍ट्रीज, मिनिस्‍ट्री ऑफ कैमिकल एंड फर्टिलाइजर्स, डिपार्टमेंट ऑफ आईटी एंड इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स के साथ नीति आयोग का एक प्रतिनिधि शामिल होना चाहिए।
 
बोर्ड देगा एडवाइस
 
अभी एमएसएमई मिनिस्‍टर के नेतृत्‍व में नेशनल एमएसएमई बोर्ड का गठन किया जाता है। कमेटी ने सिफारिश की है कि इस बोर्ड का काम नेशनल एमएसमई अथॉरिटी को एडवाइज देना होगा। बोर्ड द्वारा एमएसएमई से संबंधित मंत्रालयों और विभागों के कामकाज की समीक्षा करना और उन मुद्दों की पड़ताल करना होगा, जिनकी वजह से कारोबारियों को दिक्‍कतें आ रही है। बोर्ड इस मारे में तुरंत अथॉरिटी को जानकारी देगा और संभव हुआ तो दिक्‍कतों के समाधान के बारे में सुझाव भी देगा।
 
क्‍या होगा फायदा
 
कमेटी का कहना है कि अभी मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई द्वारा छोटे करोबारियों के मुद्दों का निपटारा किया जाता है, लेकिन कारोबारियों को मिनिस्‍ट्री ऑफ टेक्‍सटाइल्‍स, मिनिस्‍ट्री ऑफ फूड प्रोसेसिंग और आईटी मिनस्ट्री से कोई दिक्‍कत होती है तो वे अपनी बात नहीं रख पाते, इसलिए ऐसे विशेष मुद्दों को नेशनल अथॉरिटी के समक्ष रखा जा सकता है।  
 
लोन की समस्‍या का भी होगा समाधान
 
कमेटी के मुताबिक, छोटे कारोबारियों की बड़ी समस्‍या यह है कि उन्‍हें आसानी से लोन नहीं मिलता । ऐसे में, ऐसे मामले नेशनल अथॉरिटी के समक्ष रखे जा सकते हैं। अथॉरिटी में फाइनेंस  मिनिस्‍ट्री के प्रतिनिधि होंगे, जो लोन से संबंधित दिक्‍कतों को दूर करने के लिए अहम फैसले ले सकते हैं।
 

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