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    Home »SME »Industry Voice» SMEs May Face Extra Burden After The Implementation Of GST Law

    छोटे कारोबारियों के लिए 1.5 क‍रोड़ हो GST की लिमिट, काउंसिल की मीटिंग में उठ सकता है मुद्दा

     
    नई दिल्‍ली। मोदी सरकार की कोशिश है कि शीतकालीन सत्र में ही जीएसटी बिल को पास कर दिया जाए, लेकिन एसएमई संगठनों की कोशिश है कि बिल में आवश्‍यक संशोधन करने के बाद ही बिल सदन में रखा जाए। इसके लिए‍ संगठनों ने जीएसटी काउंसिल के मेंबर्स से मुलाकात का सिलसिला शुरू कर दिया है। एसएमई संगठनों का कहना है कि जीएसटी के प्रावधान उनकी मुसीबतें बढ़ाने वाले हैं, इसलिए उनमें संशोधन होना चाहिए।
     
    एलयूबी ने संभाली कमान
     
    लघु उद्योग भारती, राष्ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से संबद्ध औद्योगिक संगठन है। लघु उद्योग भारती के राष्‍ट्रीय महामंत्री जितेंद्र गुप्‍ता ने moneybhaskar.com को बताया कि जीएसटी में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जो छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं। हमारी पूरी कोशिश है कि सरकार इसमें बदलाव करे। हम अपनी बात मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई में रख चुके हैं। अब हम जीएसटी के काउंसिल मेंबर्स से मिलेंगे। कोशिश है कि काउंसिल की अगली बैठक में एसएमई के सवालों पर चर्चा हो।
     
    इस राज्‍य ने किया सपोर्ट
     
    गुप्‍ता ने कहा कि एमएसएमई मिनिस्‍ट्री ने एसएमई के मुद्दों को फाइनेंस मिनिस्‍ट्री के समक्ष उठाने का आश्‍वासन दिया है, जबकि राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे ने जीएसटी काउंसिल में इस मुद्दे को रखने का आश्‍वासन दिया है। गुप्‍ता ने उम्‍मीद जताई कि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में यह मुद्दा उठेगा और ठोस निर्णय लिया जाएगा।
     
    क्‍या है बड़ी दिक्‍कत
     
    जीएसटी बिल के ड्राफ्ट में कहा गया है कि सालाना 20 लाख रुपए से कम बिजनेस करने वाले को जीएसटी के दायरे में नहीं रखा जाएगा, जबकि अभी 1.50 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाले एसएसई को एक्‍साइज से छूट दी जाती है। गुप्‍ता ने कहा कि सरकार सर्विस इंडस्‍ट्री, ट्रेडर्स और मैन्‍युफैक्‍चरर्स को एक ही तरह से ट्रीट कर रही है। ऐसा नहीं होना चाहिए। छोटे कारोबारियों को कम से कम 1.5 करोड़ रुपए तक के बिजनेस की छूट होनी चाहिए। औद्योगिक संगठन सीआईआई ने भी सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की अपील की है।
     
    हर महीने होगी दिक्‍कत
     
    गुप्‍ता ने कहा कि अब तक छोटे कारोबारियों को हर तीन महीने में वैट की रिटर्न जमा करानी होती है, लेकिन जीएसटी में हर महीने तीन रिटर्न देनी होगी। इससे छोटे कारोबारियों, जिनके पास पर्याप्‍त स्‍टाफ या इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर नहीं होता, उन्‍हें खासी परेशानी होगी। साल में 36 रिटर्न जमा करानी पड़ेगी। सरकार से अपील की गई है कि रिटर्न तिमाही ही जमा होनी चाहिए।
     
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