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    वर्कर्स की सैलरी में कैशलेस ऑप्शंस भी हो रहे फेल, देनी होगी 4 दिन तक की छुट्टी

     
    नई दिल्‍ली। नोटबंदी के बाद एक तारीख से सैलरी को लेकर मचे घमासान के बाद सरकार और बैंकों का दबाव है कि कंपनियों को अपने वर्कर्स के बैंक अकाउंट खुलवाएं, लेकिन इंडस्‍ट्रीज का कहना है कि वर्कर्स के खाते में तो सैलरी ट्रांसफर कर दी है, लेकिन बैंक से पैसा निकलवाने के लिए वर्कर्स को तीन से चार दिन की छुट्टी देनी पड़  जाएगी, जिससे उनका प्रोडक्‍शन प्रभावित हो सकता है। इंडस्‍ट्री एसोसिएशन्‍स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्‍तक्षेप करने की अपील की है।
    7 दिसंबर से होगी बड़ी मुसीबत
    इंडस्‍ट्रीज एसोसिएशन्‍स का कहना है कि कॉरपोरेट सेक्‍टर और सरकारी विभागों में 1 तारीख को सैलरी मिलती है, लेकिन लगभग सभी छोटी और मीडियम क्‍लास की इंडस्‍ट्रीज में 7 तारीख को सैलरी मिलती है। कॉरपोरेट सेक्‍टर के इम्प्लॉइज कैशलेस ट्रांजैक्‍शन को लेकर जागरूक हैं, लेकिन स्‍मॉल एवं मीडियम लेवल क्‍लास की इंडस्‍ट्रीज में काम कर रहे इम्‍प्‍लॉइज इस बारे में जागरूक नहीं हैं। इस वजह से इन सेक्‍टर के इंडस्ट्रियलिस्ट ज्‍यादा परेशान हैं। उनका कहना है कि उनके इम्‍प्‍लॉइज कैश सैलरी लेते हैं, जबकि उन सबके अकाउंट भी खुले हुए हैं।
    पीएम से कहा, राहत दिलाएं
    फरीदाबाद की प्रमुख इंडस्‍ट्री एसोसिएशन एफआईए ने प्राइम मिनिस्‍टर नरेंद्र मोदी को लैटर लिखा है कि मैन्‍युफैक्‍चरिंग सिटी होने के कारण फरीदाबाद में लगभग 5 लाख वर्कर्स परमानेंट और लगभग 2.5 लाख वर्कर्स कॉन्‍ट्रेक्‍ट पर काम करते हैं। जिनको 7 तारीख को सैलरी देनी है। सैलरी तो बैंकों के माध्‍यम से दी जा सकती है, लेकिन वर्कर्स को तो बैंक से कैश ही निकालना होगा। बैंकों और एटीएम में कैश नहीं पहुंच रहा है। इस वजह से इन लाखों वर्कर्स को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है और इंडस्‍ट्री के प्रोडक्‍शन पर भी इसका असर पड़ेगा।
    इंडस्ट्रियल सेक्‍टर्स में पहुंचाएं कैश
    एफआईए के अध्‍यक्ष नवदीप चावला ने कहा कि सैलरी डे के बाद दो तीन दिन के लिए बैंक्‍स को इंडस्ट्रियल सेक्‍टर्स पर विशेष फोकस करना चाहिए और वहां स्‍पेशल मोबाइल एटीएम वैन लगाई जानी चाहिए, ताकि वर्कर्स अपनी जरूरत का पैसा निकाल लें और उनको कंपनी से छुट्टी भी न करनी पड़ी।
     
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