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    बिजनेस रिवाइव करने को कारोबारियों का कैशलेस पर फोकस, वर्कर्स को होगा फायदा

     
    नई दिल्‍ली। नोटबंदी के कारण लगभग ठप हो चुके अपने बिजनेस को रिवाइव करने के लिए छोटे कारोबारियों ने वर्कर्स को कैशलेस पेमेंट पर फोकस कर लिया है। कारोबारियों का कहना है कि ऐसा करने में उन्‍हें कुछ दिक्‍कतें पेश आ रही हैं, लेकिन उन्‍हें उम्‍मीद है कि अगले कुछ महीनों में फिर से उनका बिजनेस पटरी आ जाएगा। वहीं, इस प्रयास से वर्कर्स को भी बड़ा फायदा होने की उम्‍मीद जताई जा रही है।
     
    25 से 50 फीसदी हो रहा है बिजनेस
     
    नोटबंदी का सबसे अधिक असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। यहां लगभग पूरा बिजनेस कैश ट्रांजैंक्‍शन पर टिका था। नोटबंदी की वजह से पूरा बिजनेस लगभग ठप हो गया। सबसे बड़ी दिक्‍कत हुई, जब कारोबारियों के पास अपने वर्कर्स को सैलरी देने के लिए कैश नहीं था। नवंबर महीना त‍क किसी तरह खिंच गया, लेकिन दिसंबर में सैलरी न होने के कारण बड़ी संख्‍या में कैजुअल लेबर काम छोड़ कर चले गए और प्रोडक्‍शन 25 से 50 फीसदी तक कम हो गया। हालांकि कुछ कारोबारियों का कहना है कि 15 दिसंबर के बाद से हालात सुधरने लगे हैं।
     
    वर्कर्स के खुलवाए अकाउंट्स
     
    कारोबारियों की कैश विदड्रॉल की लिमिट न बढ़ाने के कारण जब दिसंबर में तनख्‍वाह देने के लाले पड़ गए तो कारोबारियों ने अपने वर्कर्स के बैंक अकाउंट खुलवाने शुरू कर दिए। छतीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के प्रेसिडेंट हरीश केडिया ने कहा कि उनके यहां तो कि‍सी वर्कर का बैंक खाता नहीं था। बैंकों, प्रशासन और कारोबारियों के सहयोग से इंडस्ट्रियल एरिया में कैंप लगाकर अकाउंट्स खोले गए। उन्‍होंने कहा कि 50 फीसदी से अधिक वर्कर्स के अकाउंट्स खुल चुके हैं। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि जनवरी में लगभग सभी वर्कर्स के अकाउंट्स खुल जाएंगे और जनवरी माह की सैलरी उनके बैंक खातों में ही जमा कराई जाएगी। उनके जैसे छोटे शहरों में वर्कर्स कैश में ही तनख्‍वाह लेना चाहते हैं, इसलिए उन्‍हें समझाने में दिक्‍कतें पेश आ रही है।
     
    बढ़ने लगा है प्रोडक्‍शन
     
    केडिया ने कहा कि प्रोडक्‍शन कम होने का एक कारण डिमांड न होना भी था, लेकिन 15 दिसंबर के बाद स्थिति सुधरने लगी है। यही वजह है कि स्‍टील प्राइस में भी बढ़ोतरी हुई है। डिमांड बढ़ने से प्रोडक्‍शन भी बढ़ने लगा है। मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन ऑफ फरीदाबाद के महासचिव रमणीक प्रभाकर ने कहा कि हालात में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है। सरकार नए साल में कैशलेस ट्रांजैंक्‍शन में छूट और कैश का फ्लो बढ़ा दे तो उम्‍मीद है कि फरवरी-मार्च तक स्थिति सामान्‍य होने लगेगी।
     
    लॉन्‍ग टर्म फायदा होगा
     
    फेडरेशन ऑफ स्‍मॉल एंड मीडियम इंडस्‍ट्रीज, कोलकाता के पूर्व प्रेसिडेंट डीके मोहता ने कहा कि अभी उनके यहां 25 फीसदी प्रोडक्‍शन हो रहा है, लेकिन अब कैशलेस ट्रांजैक्‍शन बढ़ने के कारण स्थिति सुधर रही है। कई कारोबारी वर्कर्स की सैलरी उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने की पूरी तैयारी कर चुके हैं। कारोबारी इस उम्‍मीद में है कि सरकार के इस फैसले से लॉन्‍ग टर्म में फायदा होगा। सरकार बजट में टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर ठीक करेगी, जिसका फायदा कारोबारियों को मिलेगा।
     
    वर्कर्स को होगा फायदा
     
    सरकार के इस फैसले का वर्कर्स को फायदा हो सकता है, क्‍योंकि कैशलेस ट्रांजैक्‍शन के कारण वर्कर्स के बैंक खाते में सैलरी ट्रांसफर होगी तो मिनिमम वेज सहित पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्‍युटी जैसे कानूनों का पालन भी करना होगा। इसका वर्कर्स को ओवरऑल फायदा होगा। 

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