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मोदी सरकार ने दलितों की इनकम बढ़ाने के लिए चलाई 3 स्कीम, सभी टारगेट से दूर

सरकार द्वारा बड़े जोर-शोर से शुरू की गई स्‍टैंड अप इंडिया स्‍कीम स्‍लो स्‍पीड से चल रही है

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नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने दलितों में एंटरप्रेन्‍यारशिप को बढ़ावा देने के लिए तीन स्‍कीम शुरू की , लेकिन यह स्कीम अब तक टारगेट से बहुत दूर हैं। सरकार द्वारा बड़े जोर-शोर से शुरू की गई स्‍टैंड अप इंडिया स्‍कीम स्‍लो स्‍पीड से चल रही है। पब्लिक प्रोक्‍योरमेंट पॉलिसी के तहत सरकारी कंपनियां भी टारगेट के मुताबिक एससी/एसटी कारोबारियों से खरीददारी नहीं कर रही है, जबकि मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई की स्‍पेशल सीएलसीएसएस के बारे में तो कारोबारियों को अभी जानकारी तक नहीं है।

 
कहां पहुंची स्‍टैंड अप इंडिया 
 
5 अप्रैल 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्‍टैंड अप इंडिया स्‍कीम लॉन्‍च की थी। इस स्‍कीम को दो साल पूरे होने वाले हैं। इस स्‍कीम का टारगेट पांच साल के भीतर 1.25 लाख एससी/एसटी कारोबारियों को 10 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का लोन देना है। आंकड़े बताते हैं कि अब तक लगभग 15 हजार कारोबारियों को 250 करोड़ रुपए का लोन मिला है। जबकि लगभग 25 हजार एप्‍लीकेशन पाइप लाइन में हैं। डिक्‍की के फाउंडर चेयरमैन मिलिंद कांबले ने moneybhaskar.com से कहा कि यह स्‍कीम थोड़ी स्‍लो चल रही है, बावजूद इसके उम्‍मीद है कि सरकार अपना टारगेट पूरा कर लेगी। 
 
किस हाल में पब्लिक प्रोक्‍योरमेंट पॉलिसी 
पब्लिक प्रोक्‍योरमेंट पॉलिसी के तहत सभी सरकारी कंपनियों (पीएसयू) और मंत्रालयों के लिए अपनी कुल खरीद का 20 फीसदी हिस्‍सा माइक्रो और स्‍मॉल एंटरप्राइजेज से करना अनिवार्य है। इस 20 फीसदी में से 4 फीसदी खरीददारी एससी/एसटी कारोबारियों से करना होता है। मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई के पोर्टल 'संबंध' के मुताबिक, साल 2017-18 में कई मिनिस्‍ट्री ने अपने टारगेट से काफी कम खरीददारी की है। 
मंत्रालय            - टारगेट (रु.)    -   कुल खरीददारी  
रेलवे                -  146 करोड़     -  1.22 करोड़ 
पावर                -  236 करोड़     - 25 करोड़ 
पेट्रोलियम         -  2100 करोड़   -  240 करोड़ 
शिपिंग             -  76.86 करोड़   - 1.45 करोड़ 
स्‍टील               -  221 करोड़      - 3.86 करोड़ 
वाटर रिसोर्स      -  8.42 करोड़     - 0.00 
सोशल जस्टिस  -  4.09 करोड़      - 0.09 करोड़ 
कॉम्‍युनिकेशन   -  37.11 करोड़    -  0.00 
माइंस               -  160 करोड़      -  0.52 करोड़ 
 
प्रोक्‍योरमेंट बढ़ी 
कांबले का कहना है कि सरकार ने साल 2015 में पब्लिक प्रोक्‍योरमेंट मेंडेटरी की, उससे पहले तक पीएसयू दलित कारोबारियों से 100 करोड़ रुपए से कम की खरीददारी करते थे, लेकिन वर्तमान सरकार द्वारा मेंडेटरी करने के बाद खरीददारी बढ़ रही है। बीते साल लगभग 373 करोड़ रुपए की खरीददारी हुई है। 
 
आगे पढ़ें : किस हाल में है स्‍पेशल सीएससीएसएस 
 

स्‍पेशल सीएससीएसएस 
 

मई 2017 में केंद्र सरकार द्वारा स्पेशल क्रेडिट लिंक्‍ड कैपिटल सब्सिडी स्‍कीम की शुरुआत की गई। इसका मकसद एससी/एसटी कारोबारियों को प्‍लांट एंड मशीनरी खरीदने पर 25 फीसदी की कैपिटल सब्सिडी देना है। कांबले कहते हैं कि यह स्‍कीम अभी तक पूरी तरह लोगों तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन सरकार और डिक्‍की मिलकर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, जिससे स्‍पेशल सीएलसीएसएस सहित अन्‍य सभी योजनाएं अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच पाएं। उन्‍होंने कहा कि उन्‍होंने सरकार से मांग की है कि सर्विस सेक्‍टर को भी सीएलसीएसएस का लाभ दिया जाए। 

 

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