Home » SME » Industry VoiceLaghu Udyog Bharti will oppose new definition of MSMEs

छोटे कारोबारियों की परिभाषा में बदलाव पर अड़ंगा, RSS के SME संगठन ने किया विरोध

लघु उद्योग भारती का कहना है कि परिभाषा तो इन्‍वेस्‍टमेंट के आधार पर ही होनी चाहिए

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नई दिल्‍ली। छोटे कारोबारियों को बिजनेस करना आसान बनाने के मकसद से सरकार माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) की परिभाषा में बदलाव कर रही है, लेकिन राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से जुड़े एसएमई संगठन ही इसका विरोध करने लगे हैं। आरएसएस के संगठन लघु उद्योग भारती का कहना है कि परिभाषा तो इन्‍वेस्‍टमेंट के आधार पर ही होनी चाहिए, जब व्‍यापारी इन्‍वेस्‍टमेंट ही नहीं करेगा तो टर्नओवर कैसे होगी? बुधवार को नई परिभाषा को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद बृहस्‍पतिवार को लघु उद्योग भारती की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर्नाटक में हुई, जिसमें इस परिभाषा का विरोध करने का निर्णय लिया गया 

 

विरोध की घोषणा आज 
बैठक के बाद लघु उद्योग भारती के राष्‍ट्रीय महामंत्री जितेंद्र गुप्‍ता ने moneybhaskar.com से कहा कि कैबिनेट का यह फैसला उसी तरह से है, जैसे कि हम बच्‍चे की शिक्षा दीक्षा पर ध्‍यान देने की बजाय सीधा उसके रोजगार की चिंता करने लगें। उन्‍होंने कहा कि इन्‍वेस्‍टमेंट के आधार पर ही कारोबारी की परिभाषा तय होनी चाहिए, ताकि वह जैसे ही कारोबार शुरू करे, उसे परिभाषा के मुताबिक सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने लगे। गुप्‍ता ने कहा कि कैबिनेट के इस फैसले के लिए लघु उद्योग भारती की रणनीति का खुलासा शुक्रवार को किया जाएगा। 

 

क्‍या किया बदलाव
नए निर्णय के मुताबिक 5 करोड़ रुपए तक सालाना कारोबार (टर्नओवर) करने वाले को माइक्रो, 5 से 75 करोड़ रुपए तक सालाना कारोबार करने वाले को स्‍मॉल और 75 से 250 करोड़ रुपए तक सालाना कारोबार करने वाले कारोबारी को मीडियम एंटरप्राइजेज माना जाएगा। इसके अलावा अब मैन्‍युफैक्‍चरिंग और सर्विस सेक्‍टर की अलग-अलग कैटेगिरी को भी खत्‍म कर दिया गया है।
पढ़ें पूरी खबर : 

बदल जाएगी छोटे कारोबारियों की परिभाषा, टर्नओवर के आधार पर होगा तय

 

अचानक आया प्रस्‍ताव 

मोदी सरकार शुरू से एमएसएमई की परिभाषा बदलने की बात कर रही है, लेकिन अब तक इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट बढ़ाने की बात कही जा रही थी, लेकिन बुधवार को अचानक कैबिनेट में प्रस्‍ताव आया कि इन्‍वेस्‍टमेंट नहीं, बल्कि एनुअल टर्नओवर के आधार पर एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया जाए, जिसे कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी। 

 

पहले से कर रहे हैं विरोध 
लघु उद्योग भारती शुरू से ही एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव का विरोध कर रही है। संगठन के अधिकारियों ने दावा किया था कि उनके विरोध के कारण ही सरकार ने परिभाषा में बदलाव का इरादा त्‍याग दिया था। इसमें कुछ हद तक सच्‍चाई भी हो सकती है, क्‍योंकि लगभग ढाई साल तक प्रस्‍ताव आगे नहीं बढ़ पाया। 

 

क्‍या था पहला प्रस्‍ताव 
दरअसल अप्रैल 2015 में माइक्रो, स्‍माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज मिनिस्‍ट्री की ओर से लोकसभा में एमएसएमई डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल प्रस्‍तुत किया गया था। इस बिल में कहा गया था कि एमएसएमई की परिभाषा में बदलाव किया जाएगा। मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में 25 लाख रुपए तक का इन्वेस्‍टमेंट करने वालों को माइक्रो एंटरप्रेन्योर कहा जाता है, इसे बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने का प्रपोजल रखा गया था। इसी तरह स्‍मॉल एंटरप्रेन्‍योर्स की इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए और मीडियम एंटरप्रेन्‍योर्स की इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट 10 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 30 करोड़ रुपए करने का प्रपोजल था। इसी तरह सर्विस सेक्‍टर में माइक्रो एंटरप्रेन्‍योर्स की इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट 10 से बढ़ाकर 20 लाख रुपए, स्‍माल एंटरप्रेन्‍योर्स की इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट 2 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए और मीडियम एंटरप्रेन्‍योर्स की इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 15 करोड़ रुपए करने का प्रपोजल था। 
 
क्‍या था विरोध 
एंटरप्रेन्‍योर्स की इंवेस्‍टमेंट लिमिट बढ़ाने को लेकर ज्‍यादातर एसएमई संगठन सरकार के साथ थे, लेकिन लघु उद्योग भारती ने इसका विरोध किया। नेशनल बोर्ड फॉर एमएसएमई की बैठकों में लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी लगातार इसका विरोध करते रहे। लघु उद्योग भारती के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष ओमप्रकाश मित्‍तल ने moneybhaskar को बताया था कि देश में लगभग 99 फीसदी कारोबारी एमएसएमई सेक्‍टर से हैं। इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट बढ़ने से बड़े कारोबारी भी एमएसएमई के दायरे में आ जाएंगे और सरकार की ओर से जो सुविधाएं व सब्सिडी एमएसएमई को मिलती हैं, वे इन बड़े कारोबारियों को भी मिलने लगेंगी और छोटे कारोबारियों का हक मारा जाएगा। बड़े उद्योगों की नजर मीडियम एंटरप्रेन्‍योर्स की परिभाषा पर ज्‍यादा है। इसीलिए, माइक्रो और स्‍मॉल एंटरप्रेन्‍योर्स की इन्‍वेस्‍टमेंट लिमिट तो दोगुनी की गई, लेकिन मीडियम एंटरप्रेन्‍योर्स की लिमिट 10 करोड़ रुपए से बढ़ा कर 30 करोड़ रुपए करने का प्रपोजल था, यानी तीन गुणा। यही वजह है कि लघु उद्योग भारती ने इसका विरोध किया। हम माइक्रो एंटरप्रेन्‍योर्स की लिमिट बढ़ाने की बात तो मान सकते हैं, लेकिन मीडियम एंटरप्रेन्‍योर्स की लिमिट बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। 

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