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​150 दिन में मिल रही है छोटे कारोबारियों को पेमेंट, इसलिए मोदी ने कॉरपोरेट को लगाई फटकार

मोदी सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद बड़ी व सरकारी कंपनियों का रवैया नहीं सुधर रहा है।

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नई दिल्‍ली. मोदी सरकार के भरसक प्रयासों के बावजूद बड़ी व सरकारी कंपनियों का रवैया नहीं सुधर रहा है। बड़ी कंपनियां, छोटे कारोबारियों का पेमेंट 120 से 150 दिन में कर रही हैं, जबकि नियम के अनुसार कंपनियों को 45 दिन के भीतर पेमेंट करनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक बड़ी कंपनियों के इस रवैये से नाखुश हैं और उन्‍होंने बुधवार को फिक्‍की की एजीएम के मौके पर अपनी नाखुशी जता दी है। बावजूद इसके, छोटे कारोबारियों का मानना है कि बड़ी कंपनियां, जिसमें सरकारी कंपनियां (पीएसयू) भी शामिल हैं, पर सरकार को सख्‍त होना होगा, तब ही उनकी समस्‍या का समाधान हो सकता है। 

 

पीएम ने क्‍या कहा 
फिक्‍की की एजीएम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ' मेरी एक और अपेक्षा आपसे है कि MSME का जो पैसा बड़ी कंपनियों पर Due रहता है, और यहां कई लोग बैठे हैं उनके लिए खास मैं प्रार्थना करना चाहता हूं। बड़ी-बड़ी कंपनियों में MSME के पैसे बहुत लंबे अरसे तक Due रहते हैं। वो समय पर चुकाया जा सकते हैं क्‍या? क्‍या इसके लिए आप कुछ कर सकते हैं क्‍या? नियम है लेकिन ये भी सच है कि छोटे उद्यमियों का पैसा ज्यादातर बड़ी कंपनियों के पास अटका रहता है। तीन महीने, चार महीने बाद उन्हें पेमेंट मिलता है। अब कारोबारी रिश्ते बिगड़ ना जाएं, छोटा व्‍यक्ति है अगर वो खरीदना बंद कर दे तो परेशान हो जाए। इसलिए छोटा उद्यमी अपने पैसे जो हक के हैं, वो भी बड़ी कंपनियों से मांगने में भी हिचकिचाता है। उसकी इस चिंता को, इस समस्या को दूर करने के लिए भी FICCI जैसी संस्‍थाओं की तरफ से आग्रहपूर्वक प्रयास होगा। तो Economy को एक बहुत अच्‍छी नई गति मिलेगी'। 

 

क्‍या है दिक्‍कत 
दरअसल, छोटे कारोबारी जब बड़ी कंपनियों को अपना माल या सर्विस देते हैं तो नियम के अनुसार बड़ी कंपनियों को 45 दिन के भीतर बिल की पेमेंट करनी चाहिए। तय समय पर न देने पर ब्‍याज देना होता है, लेकिन छोटे कारोबारियों का कहना है कि उन्‍हें 120 से 150 दिन के भीतर पेमेंट मिलती है। उनकी दिक्‍कत यह भी है कि वे न तो ब्‍याज की मांग कर पाते हैं और ना ही इसकी शिकायत कर पाते हैं। 

 

सरकार ने उठाए कदम 
साल 2006 में लागू एमएसएमई डेवलपमेंट एक्‍ट में यह प्रावधान किया गया है कि 45 दिन के बाद पेमेंट करने पर ब्‍याज देना होगा। इस पर नजर रखने के लिए राज्‍यों में माइक्रो एंड स्‍मॉल एंटरप्राइज फैसिलिटेशन कौंसिल बनाई गई, जिसमें छोटे कारोबारी शिकायत कर सकते हैं। बावजूद इसके, कई सालों तक छोटे कारोबारियों को कोई फायदा नहीं मिला। लेकिन भाजपा के सत्‍ता में आने के बाद पीएसयू को सख्‍त निर्देश दिए गए कि वे छोटे कारोबारियों को समय पर पेमेंट करें। पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां छोटे कारोबारी पेमेंट डिले होने पर शिकायत कर सकते हैं। 

 

थोड़ा सुधार, लेकिन रवैया नहीं बदला 
फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्‍मे) के नवीन जैन ने http://moneybhaskar.com से कहा कि 2014-15 तक बड़ी कंपनियों पर छोटे कारोबारियों का लगभग 70 हजार करोड़ रुपए बकाया था, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद डिले पेमेंट के मामले में थोड़ा बहुत सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी बड़ी कंपनियों का रवैया नहीं सुधरा है। पीएसयू का रवैया तो बिल्‍कुल नहीं बदला। शिकायत के डर से कुछ निजी कंपनियों में सुधार हुआ है, परंतु इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। 

 

आगे पढ़ें : नहीं मिल रहा सपोर्ट 

कौंसिल नहीं कर रही सपोर्ट 
जैन ने कहा कि 27 राज्‍यों में लगभग 50 फैसिलिटेशन कौंसिल बनी हुई हैं, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए एमएसएमई समाधान पोर्टल में केवल 15-20 कौंसिल ही डाटा अपलोड कर रही हैं। इससे केंद्र को यह नहीं पता चल पा रहा है कि आखिर बड़ी कंपनियों पर कितना बकाया है। केंद्र को सख्‍त रवैया अपनाना चाहिए, ताकि कौंसिल सपोर्ट करें। इससे पीएसयू और निजी कंपनियों पर दबाव बनेगा। 

 

पीएचडी चैंबर ने बनाई रणनीति 
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री के एमएसएमई कमेटी के सदस्‍य जेपी मल्‍होत्रा ने moneybhaskar.com को बताया कि बृहस्‍पतिवार को चैंबर की एमएसएमई कमेटी की मीटिंग में इस मुद्दे पर विचार विमर्श किया गया। सदस्‍यों ने कहा कि छोटे कारोबारी बड़ी कंपनियों की शिकायत करके अपने कारोबारी रिश्‍ते खराब नहीं कर सकते, इसलिए बड़ी कंपनियों पर नैतिक दबाव  बना कर यह कोशिश की जाएगी कि बड़ी कंपनियां अपने पेमेंट शेड्यूल में सुधार करें। साथ ही, केंद्र सरकार से एमएसएमई समाधान पोर्टल में सुधार करने को कहा जाएगा और इस बारे में छोटे कारोबारियों को जागरूक किया जाएगा। 

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