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थर्मल-हाइड्रो प्‍लांट ठप होने से 16 हजार MW बिजली की कमी, इंडस्‍ट्री और खेती पर असर

कोयले की कमी के कारण थर्मल पावर प्‍लांट और वाटर रिजर्वायर में पानी न होने के कारण हाइड्रो प्‍लांट ठप पड़े हैं

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नई दिल्‍ली। कोयले की कमी के कारण जहां थर्मल पावर प्‍लांट ठप पड़े हैं, वहीं वाटर रिजर्वायर में पानी न होने के कारण हाइड्रो प्‍लांट भी कम जनरेशन कर रहे हैं। इस कारण लगभग 16 हजार मेगावाट पावर शॉर्टेज  हो रही है। यह संकट आगे और बढ़ सकता है। इसका असर इंडस्‍ट्री और खेती पर दिखने लगा है। इंडस्‍ट्री का कहना है कि छोटे कारखानों में दो से तीन घंटे बिजली कटौती हो रही है, जबकि किसानों का कहना है कि दिन भर में तीन से चार घंटे बिजली मिलती है, जबकि इस समय रबी की फसल के लिए सिंचाई का काम चल रहा है और बिजली का सख्‍त जरूरत है। 

 

9475 मेगावाट के थर्मल प्‍लांट ठप 
नेशनल पावर पोर्टल के मुताबिक इन दिनों लगभग 28 थर्मल यूनिट कोयले की शॉर्टेज की वजह से बंद पड़े हैं। इन थर्मल यूनिट की कैपेसिटी लगभग 9475 मेगावाट है। इसके अलावा भी कई बड़े थर्मल पावर प्‍लांट बंद पड़े हैं। ये प्‍लांट पोल्‍यूशन प्रॉब्लम, रिजर्व शट डाउन, लो शेड्यूल, शॉर्ट टर्म मेंटिनेंस की वजह से बंद पड़े हैं। कोयले की कमी का सामना थर्मल प्‍लांट लंबे समय से कर रहे हैं। इतना ही नहीं, गैस से चलने वाले पावर प्‍लांट भी फ्यूल शॉर्टेज का सामना कर रहे हैं। 

 

6770 मेगावाट के हाइड्रो प्‍लांट ठप 
थर्मल की तरह हाइड्रो पावर प्‍लांट भी ठप पड़े हैं। लगभग 181 हाइड्रो पावर यूनिट बंद होने से लगभग 6770 मेगावाट बिजली की कमी रिकॉर्ड की गई है। हाइड्रो प्‍लांट के बंद होने का बड़ा कारण वाटर रिजवार्यर में पानी की कमी बताई जा रही है। नेशनल वाटर कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्‍यादातर वाटर रिजवार्यर में कैपेसिटी से 50 फीसदी कम पानी है। जानकार मानते हैं कि आने वाले दिनों में पानी की कमी और बढ़ सकती है, जिसके चलते हाइड्रो पावर प्‍लांट्स का जनरेशन और कम हो सकता है। 

 

खेतों पर असर 
बिजली संकट की वजह से रूरल एरिया में भारी कटौती की जा रही है। हरियाणा में कई इलाकों में दिन भर में 3 से 4 घंटे ही बिजली सप्‍लाई हो रही है। हरियाणा के बल्‍लभगढ़ इलाके के रघुवीर डागर ने कहा कि इन दिनों खेतों में सिंचाई का काम चल रहा है। इसके लिए ट्यूबवेल का चलना बेहद जरूरी है। खेतों में हर 15 दिन में पानी लगाना होता है, लेकिन बिजली न होने के कारण कई बार ट्यूबवेल नहीं चल पाते। इतना ही नहीं, शहरों को बिजली देने के लिए गांवों में एक सप्‍ताह दिन और एक सप्‍ताह रात में बिजली दी जा रही है। जिस कारण किसानों को रात में उठकर सिंचाई करनी पड़ रही है। 

 

छोटे कारखानें भी प्रभावित 
बिजली संकट की वजह से छोटे कारखाने भी प्रभावित हो रहे हैं। मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन, फरीदाबाद के महासचिव रमणीक प्रभाकर ने कहा कि दिन में दो से तीन घंटे की कटौती हो रही है। इसके अलावा बिजली की क्‍वालिटी अच्‍छी नहीं है, जिस कारण मैन्युफैक्‍चरिंग क्‍वालिटी प्रभावित हो रही है। 

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