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    नोटबंदी से छोटे कारोबार पर पड़ा बुरा असर, कैश ही नहीं, लोन की भी आई दिक्‍कत

     
    नई दिल्‍ली। नोटबंदी का सबसे अधिक बुरा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है। उनको बिजनेस के लिए वर्किंग कैपिटल की दिक्‍कत हुई। वर्कर्स को सैलरी देने से लेकर लोन चुकाने में परेशानी हुई। इतना ही नहीं, छोटी एनबीएफसी का डिफॉल्‍ट रेट बढ़ गया, जिसका असर उनके रेवेन्‍यू पर पड़ा। देश की दो नामी रिसर्च एंड रेटिंग एजेंसीज के ताजा सर्वे में यह बात कही गई है। क्रिसिल ने यह सर्वे 24 नवंबर से 24 दिसंबर के बीच देश भर के लगभग 1100 छोटे कारोबारियों पर किया है।
     
    इन सेक्‍टर्स पर पड़ा बुरा असर
     
    क्रिसिल के मुताबिक, कैश ट्रांजैंक्‍शन पर निर्भर रहने वाले ट्रेडिशनल सेक्‍टर जैसे टैक्‍सटाइल, एग्री प्रोडक्‍ट्स, स्‍टील, कंज्‍यूमर ड्यूरेबल, कंस्‍ट्रक्‍शन और आटोमोबाइल सेक्‍टर पर नोटबंदी का सबसे बुरा असर पड़ा। जबकि इंजीनियरिंग, कंज्‍यूमर प्रोडक्‍ट्स, फार्मा, एग्रीकल्‍चर, इलेक्ट्रिकल इक्‍वीपमेंट, पैकेजिंग पर कम असर पड़ा, लेकिन आईटी सर्विसेज, रिक्रयूटमेंट एजेंसी और सिक्‍योरिटी सर्विसेज पर न के बराबर असर पड़ा।
     
    इस फिसकल पर दिखेगा असर
     
    सर्वे के मुताबिक डिमोनिटाइजेशन की वजह से करंट फिसकल में ग्रोथ में कमी आएगी।
    केवल 41 फीसदी एमएसएमई ने स्‍वीकार किया कि डिमोनिटाइजेशन के बाद उनके क्‍लाइंट्स चेक और इलेक्‍ट्रॉनिक पेमेंट में शिफ्ट हुए हैं। एमएसएमई सेक्‍टर को डे-टू-डे ऑपरेशन में बड़ी दिक्‍कतें आई, इस वजह से अक्‍टूबर से मार्च ( सेकेंड हाफ) में एमएसएमई सेक्‍टर की ग्रोथ पर असर पड़ेगा और एनुअल ग्रोथ भी कम रहेगी।
     
    कारोबारियों को हुई ये परेशानी
     
    क्रिसिल के एसएमई रेटिंग हेड मनीष जयसवाल ने कहा कि सर्वे में शामिल हर पांचवां एमएसएमई चाह रहा है कि वह अगले महीनों में फंडिंग का इंतजाम करे, इसमें से आधे व्‍यापारी वर्किंग कैपटिल चाहते हैं। दोस्‍तों और एसोसिएट्स से लिया जाने वाला फंड अब नहीं मिलेगा, इसलिए 4 में 3 एसएमई लोन के लिए बैंक के पास जाने पर विचार कर रहे हैं, जबकि बाकी कारोबारी इंटरनल अक्रूअल की तैयारी में हैं।
     
    एनबीएफसी को आई यह दिक्‍कत
     
    रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने नोटबंदी के दौरान छोटे कारोबारियों (एमएसएमई) को लोन देने वाले एनबीएफसी पर सर्वे किया है। सर्वे के मुताबिक, एनबीएफसी की कलेक्‍शन एफिशिएंसी में काफी कमी आई है। 10 हजार से 60 हजार रुपए का लोन वाले लोग, जिनसे अक्‍टूबर माह तक का कलेक्‍शन 99.7 से 99.9 फीसदी तक रहा, नवंबर माह में गिर कर 91.3 फीसदी रह गया। इसी तरह 50 हजार से लेकर 15 लाख रुपए तक का लोन वाले से कलेक्‍शन एफिशिएंसी 83.4 फीसदी तक पहुंच गई, जो कि अक्‍टूबर माह में 94.6 फीसदी थी। 5 लाख से 1 करोड़ रुपए तक का लोन लेने वालों से कलेक्‍शन एफिशिएंसी 98.1 फीसदी रही, जबकि सितंबर में यह 101 फीसदी थी।
     

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