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प्राइवेट बैंकों ने रिटेल के बाद SME लोन में लगाई सेंध, सरकारी बैंकों का 6% गिरा मार्केट शेयर

नई दिल्‍ली। छोटे कारोबारियों को लोन देने के मामले में पब्लिक सेक्‍टर के बैंकों के मुकाबले प्राइवेट और नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कं‍पनियों की हिस्‍सेदारी बढ़ रही है। एमएसएमई सेगमेंट की लेंडिंग मार्केट में प्राइवेट बैंकों और एनबीएफसी का शेयर पिछले दो सालों में 6 फीसदी से अधिक बढ़ चुका है। साल 2015 में इनका मार्केट शेयर 34 फीसदी था, जो 2017 में बढ़कर 40 फीसदी हो चुका है। यह खुलासा स्‍मॉल इंडस्‍ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) और ट्रांस यूनियन, सिबिल द्वारा तैयार की गई पहली रिपोर्ट एमएसएमई पल्‍स में हुआ है। 

 

कैसे गिरा मार्केट शेयर 
- एमएसएमई सेगमेंट के लैंडिंग मार्केट में दिसंबर 2015 तक पब्लिक सेक्‍टर बैंक की हिस्‍सेदारी 61.5 फीसदी थी, जो दिसंबर 2017 में गिरकर 55.4 फीसदी तक पहुंच गई। 
- प्राइवेट बैंक की हिस्‍सेदारी दिसंबर 2015 तक 25.4 फीसदी थी, जो दिसंबर 2017 तक बढ़कर 28.5 फीसदी हो गई। 
- एनबीएफसी ( नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) की हिस्‍सेदारी दिसंबर 2015 तक 7.9 फीसदी थी, जो दिसंबर 2017 में बढ़कर 10.4 फीसदी तक पहुंच गई।

 

पब्लिक सेक्‍टर बैंकों में है ज्‍यादा एनपीए 
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राइवेट बैंकों के मुकाबले पब्लिक सेक्‍टर के बैंकों में एमएसएमई सेगमेंट में एनपीए रेट भी काफी अधिक है। 
- दिसंबर 2015 में पब्लिक सेक्‍टर बैंकों में एमएसएमई सेगमेंट में एनपीए रेट 10.3 फीसदी था, जो दिसंबर 2017 में बढ़कर 12.4 फीसदी पहुंच गया। 
- जबकि प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों में दिसंबर 2015 में एनपीए रेट 3.7 फीसदी था, जो दिसंबर 2017 में भी 3.7 फीसदी ही रहा। 
- हालांकि एनबीएफसी में एनपीए रेट बढ़ गया। दिसंबर 2017 में एनबीएफसी में एमएसएमई सेगमेंट का एनपीए 3 फीसदी था, जो दिसंबर 2017 में बढ़कर 5 फीसदी पहुंच गया। 

 

क्‍या हैं वजह 
फेडरेशन ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (फिस्‍मे ) के जनरल सेक्रेट्री ने. अनिल भारद्वाज ने moneybhaskar.com से कहा कि  

- पब्लिक सेक्‍टर बैंकों लेंडिंग मार्केट शेयर में कमी आने की प्रमुख वजह है कि उसके पास देने को पैसा ही नहीं है। पब्लिक सेक्‍टर बैंकों का पैसा माइन, स्‍टील, टेलीकॉम सेक्‍टर में फंसा हुआ है। 
- जबकि प्राइवेट बैंकों के पास पैसा है तो उनका शेयर बढ़ रहा है। वहीं, प्राइवेट बैंकों द्वारा लोन देने की प्रक्रिया भी आसान है, जो छोटे कारोबारियों को पसंद आ रही है, इस वजह से वे प्राइवेट बैंकों के पास जा रहे हैं। 
- वहीं, एनबीएफसी के मार्केट शेयर में बढ़ोतरी की वजह भी यही है कि उनसे लोन लेने में झंझट नहीं होता। वे आसानी से कारोबारी की व्‍यक्तिगत छवि देखकर ही लोन दे देते हैं। 

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