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छोटे कारोबारियों को इन 4 स्‍कीम का भी नहीं मिल रहा फायदा, सरकार कर रही है 'रिव्‍यू'

एमएसएमई मिनिस्‍ट्री द्वारा चलाई जा रही चार और स्‍कीम का फायदा छोटे कारोबारियों को नहीं मिल रहा है।

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नई दिल्‍ली। बृहस्‍पतिवार को moneybhaskar.com ने खुलासा किया था कि मोदी सरकार ने छोटे कारोबारियों के लिए चल रही क्रेडिट लिंक्‍ड सब्सिडी स्‍कीम बंद कर दी है। आज हम आपको बता रहे हैं कि माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) मिनिस्‍ट्री द्वारा चलाई जा रही चार और स्‍कीम का फायदा छोटे कारोबारियों को नहीं मिल रहा है। सरकार इन स्‍कीम का भी रिव्‍यू करने की बात कह रही है। जबकि मिनिस्‍ट्री की एक रिपोर्ट बताती है कि अप्रैल से नवंबर 2017 के दौरान इन स्‍कीम की परफॉरमेंस रिपोर्ट जीरो है। 

 

कौन सी हैं ये 4 स्‍कीम ? 
मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई की नवंबर माह की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन चार स्‍कीम की परफॉरमेंस जीरो है। उनमें - 
- लीन मैन्‍युफैक्‍चरिंग स्‍कीम
- टैक्‍नोलॉजी अपग्रेडेशन एंड क्‍वालिटी सर्टिफिकेशन सपोर्ट टू एमएसएमई (टैकअप), 
- डिजाइन क्‍लीनिक स्‍कीम फॉर एमएसएमई सेक्‍टर 
- परफॉरमेंस बेस्‍ड क्रेडिट रेटिंग स्‍कीम 

 

रिव्‍यू का वादा 
एक एमएसएमई संगठन के वरिष्‍ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर moneybhaskar.com को बताया कि क्रेडिट लिंक्‍ड कैपिटल सब्सिडी स्‍कीम (सीएलसीएसएस) की तरह इन स्‍कीमों के बारे में भी उन्‍हें आश्‍वासन दिया जा रहा है कि इन स्‍कीम को रिव्‍यू किया जा रहा है  और इन्‍हें नए सिरे से शुरू किया जाएगा। 

 

क्‍या होता है फायदा ? 
- लीन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का मकसद एमएसएमई सेक्‍टर को अपनी मैन्युफैक्चरिंग कास्ट कम करने के साथ-साथ बेहतर स्पेस मैनेजमेंट, प्रोडक्शन टाइम और रिजेक्शन रेट में कटौती के बारे में बताना है। इसके लिए नियुक्‍त कंसलटेंट की फीस का 80 फीसदी हिस्‍सा मिनिस्‍ट्री ऑफ एमएसएमई द्वारा वहन किया जाता है। 


- टैकअप का मकसद कारोबारियों को यह बताना था कि वे मैन्‍युफैक्‍चरिंग प्रोसेस के दौरान एनर्जी एफिशिएंसी टैक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल कैसे कर सकते हैं। इस पर होने वाले खर्च पर मिनिस्‍ट्री द्वारा 25 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा इस स्‍कीम के तहत कारोबारियों को नेशनल और इंटरनेशनल संस्‍थाओं से मिलने वाले प्रोडक्‍ट सर्टिफिकेशन  व लाइसेंस के बारे में जागरूक करना था। इस पर होने वाले खर्च पर मिनिस्‍ट्री द्वारा 75 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। 


- डिजाइन क्‍लीनिक स्‍कीम फॉर एमएसएमई सेक्‍टर का मकसद एमएसएमई मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर के लिए डिजाइन एक्‍सपर्टिज उपलब्‍ध कराना है। इसके लिए मिनिस्‍ट्री द्वारा लर्निंग एवं स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम चलाए जाते हैं। मिनिस्‍ट्री की ओर से फाइनेंशियल असिस्‍टेंस भी उपलब्‍ध कराई जाती है। 


- परफॉरमेंस बेस्‍ड क्रेडिट रेटिंग स्‍कीम का मकसद माइक्रो एवं स्‍मॉल एंटरप्राइसेज (एमएसई) का थर्ड पार्टी (एजेंसी) द्वारा रेटिंग कराना है। ताकि छोटे कारोबारियों को अपनी स्‍ट्रेंथ और वीकनेस का पता चल सके। इस रेटिंग के आधार पर बैंकों से लोन लेना भी आसान हो जाता है। इसके लिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसी की फीस का 75 फीसदी भुगतान मिनिस्‍ट्री द्वारा किया जाता है। 

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