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छोटे कारोबारियों पर मोदी की 'मेहरबानी' आई काम, हुआ करोड़ों का फायदा 

सरकारी कंपनियों ने छोटे कारोबारियों से की 18  हजार करोड़ रुपए की खरीदारी

Govt procurement policy benefited MSMEs

नई दिल्ली.  छोटे कारोबारियों पर मोदी सरकार की मेहरबानी का असर दिखने लगा है। इसके लिए सरकार ने सरकारी कंपनियों पर सख्ती बढ़ा दी है, ताकि वे छोटे कारोबारियों से खरीदारी करे। इसका असर दिखने भी लगा है। 139  सरकारी कंपनियों ने सरकार को बताया है कि उन्होंने 47808 छोटे कारोबारियों से लगभग 18 हजार करोड़ रुपए की खरीदारी की है। यह आंकड़े नवंबर 2018 तक के हैं। 
 

मोदी सरकार ने दिए थे सख्त निर्देश 

मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने साल 2015 में सरकारी कंपनियों को निर्देश दिए थे कि वे अपनी कुल खरीदारी का 20 फीसदी छोटे कारोबारियों से करे। पहले साल सरकारी कंपनियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन उसके बाद केंद्र सरकार ने सख्ती बरतते हुए कहा था कि कंपनियां हर हाल में छोटे कारोबारियों से खरीदारी करे, जिसका असर दिखने लगा है। 

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सरकार ने बनाया पोर्टल 
सरकार ने सरकारी कंपनियों पर नजर रखने के लिए एमएसएमई संबंध नाम से एक पोर्टल बनाया और कंपनियों को निर्देश दिए कि वे छोटे कारोबारियों से की जा रही खरीदारी का ब्यौरा इस पोर्टल पर अपलोड करे। इसके बाद से कंपनियों ने गंभीरता दिखाई है। 

 

क्या है टारगेट 
142 कंपनियों ने सरकार को बताया था कि वे साल 2018-19 में 1.27 लाख करोड़ रुपए की कुल खरीदारी करेंगे। नवंबर 2018 तक इन कंपनियों ने कुल 71289 करोड़ रुपए की खरीदारी की है, इसमें से 18029 करोड़ रुपए की खरीदारी माइक्रो एवं स्मॉल एंटरप्राइजेज से की गई है। इसमें से 302 करोड़ रुपए की खरीदारी एससी-एसटी कैटेगिरी के कारोबारियों से की गई है। जबकि 150 महिलाओं से 7.14 करोड़ रुपए की खरीदारी की गई है। 

 

क्या है सरकारी खरीद नीति 
पब्लिक प्रोक्‍योरमेंट पॉलिसी के प्रोविजन 6 में कहा गया है कि एमएसई से 20 फीसदी तक खरीदारी करना अनिवार्य होगा। यदि बड़ी कंपनियां किसी टेंडर के लिए सबसे कम प्राइस कोट करती है, तब भी एमएसई से प्रोक्‍योरमेंट करना होगा। इसके सरकारी कंपनियों को सबसे कम प्राइस कोट करने वाली (एल1) बड़ी कंपनी से 15 फीसदी अधिक कोट करने वाले एमएसई को वह टेंडर देना होगा। 

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