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इकोनॉमिक सर्वे : 10 में से 8 बैंक लोन बड़े कॉरपोरेट्स को, SME की हिस्‍सेदारी केवल 17%

इकोनॉमिक सर्वे ने एक बार फिर छोटे कारोबारियों की दुखती रग को छेड़ दिया है।

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नई दिल्‍ली। सोमवार को लोकसभा में पेश इकोनॉमिक सर्वे ने एक बार फिर छोटे कारोबारियों की दुखती रग को छेड़ दिया है। सर्वे में कहा गया है कि बैंक बड़ी कंपनियों को अधिक से अधिक लोन देते हैं, जबकि छोटे कारोबारी (एमएसएमई सेक्‍टर) को लोन मिलने में खासी परेशानी होती है। सर्वे के मुताबिक नवंबर 2017 तक बैंकों द्वारा इंडस्‍ट्री को दिए गए लोन में बड़ी कंपनियों की 82.6 फीसदी हिस्‍सेदारी रही, जबकि एमएसएमई सेक्‍टर को केवल 17.4 फीसदी ही लोन दिया गया। हालांकि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के कारण एमएसई (माइक्रो, स्‍मॉल एंटरप्राइजेज) सेक्‍टर के लोन में पिछले साल के मुकाबले थोड़ी बहुत वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन मीडियम सेक्‍टर के लोन में पिछले साल के मुकाबले 8.3 फीसदी कमी आई है। 

 

 

 

 

किसकी-कितनी हिस्‍सेदारी 
सर्वे के मुताबिक, नवंबर 2016 तक इंडस्‍ट्री पर कुल क्रेडिट आउटस्‍टेडिंग लगभग 2579300 करोड़ रुपए था, जबकि नवंबर 2017 में यह बढ़कर 2604100 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी कि एक साल में केवल 1 फीसदी की वृद्धि हुई। इसमें से 343500 करोड़ रुपए माइक्रो और स्‍मॉल सेक्‍टर पर थी, जो नवंबर 2017 में बढ़कर 359200 करोड़ रुपए हो गई। यानी कि 4.6 फीसदी वृद्धि हुई। लेकिन मीडियम सेक्‍टर पर क्रेडिट आउटस्‍टेडिंग 103300 करोड़ रुपए से घटकर 94700 करोड़ रुपए पहुंच गई। लगभग 8.3 फीसदी की कमी रिकॉर्ड की गई। जबकि लार्ज यानी बड़ी कंपनियों पर नवंबर 2016 तक क्रेडिट आउटस्‍टेडिंग 2132500 करोड़ रुपए थी, जो नवंबर 2017 में बढ़ कर 2150200 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इसमें 0.8 फीसदी की वृद्धि हुई। इन आंकड़ों के मुताबिक, बड़ी कंपनियों के पास कुल क्रेडिट का 82.6 फीसदी और एमएसएमई के पास केवल 17.4 फीसदी है। 

 

एमएसएमई सेक्‍टर में है सबसे ज्‍यादा रोजगार 
सर्वे में कहा गया है कि देश के ग्रोस वेल्‍यू एडेड (जीवीए) में एमएसएमई सेक्‍टर की हिस्‍सेदारी लगभग 32 फीसदी है। एमएसएमई सेक्‍टर कम इन्‍वेस्‍टमेंट के बावजूद देश में नौकरियां देने के मामले बड़ी इंडस्‍ट्री के मुकाबले बेहद महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एमएसएमई सेक्‍टर की भूमिका छोटे और पिछड़े क्षेत्रों के अलावा रूरल एरिया में अधिक होती है। सर्वे में नेशनल सेंपल सर्वे के 73वें राउंड के हवाले से कहा गया है कि साल 2015-16 में 633.8 लाख एमएसएमई अलग-अलग गतिविधियों में जुटी हुई हैं। जहां लगभग 11.10 करोड़ वर्कर्स काम कर रहे हैं। 

 

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मुद्रा से मिला सहारा
सर्वे में कहा गया है कि सरकार द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से माइक्रो सेक्‍टर को काफी सहयोग मिला है। मुद्रा स्‍कीम का मकसद नॉन-कॉरपोरेट स्‍मॉल बिजनेस सेक्‍टर को फंड उपलब्‍ध कराना है। साल 2016-17 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 1.8 लाख करोड़ रुपए का लोन दिया गया। जिसमें 1.23 लाख करोड़ रुपया बैंकों द्वारा लोन के रूप में दिया गया, जबकि नॉन-बैंकिंग संस्‍थाओं ने 57 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया। दिसंबर 2017 में लोन लेने वालों की संख्‍या 10.1 करोड़ तक पहुंच गई, जिसमें से 7.6 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। 

 

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