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मुद्रा स्‍कीम में 75% लोन पुराने कारोबारियों को, नए के लिए बैंकों से फंड जुटाना मुश्किल

आंकड़े बताते हैं कि मुद्रा स्‍कीम का ज्‍यादातर लोन पुराने स्‍थापित कारोबारियों को दिया गया।

New entrepreneurs are not priority of banks

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार लगातार दावा करती आ रही है कि मुद्रा स्‍कीम की वजह से बेरोजगारों को रोजगार मिला है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि मुद्रा स्‍कीम का ज्‍यादातर लोन पुराने स्‍थापित कारोबारियों को दिया गया। मुद्रा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016-17 में केवल 25 फीसदी नए कारोबारियों को लोन दिया गया, बाकी पुराने कारोबारियों को लोन दिया गया। दिलचस्‍प बात यह है कि इससे पिछले साल लगभग 35 फीसदी नए कारोबारियों को लोन दिया गया था, लेकिन अगले साल इसमें भी गिरावट आ गई। 

 

क्‍या कहती है रिपोर्ट?  
मुद्रा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016-17 में कुल 3 करोड़ 97 लाख 1 हजार 47 कारोबारियों को मुद्रा लोन दिया गया। जबकि इनमें से केवल 99 लाख 89 हजार 470 नए कारोबारियों को लोन दिया गया। यानी कि लगभग 75 फीसदी पुराने व स्‍थापित कारोबारियों को लोन दिया गया। 

 

लोन बढ़ा, नए कारोबारियों घटे 
दिलचस्‍प बात यह है कि 2015-16 के मुकाबले, 2016-17 में मुद्रा लोन लेने वालों की संख्‍या में तो बढ़ोतरी हुई, लेकिन नए कारोबारियों की संख्‍या में कमी आ गई। जैसे कि 
- 2015-16 में कुल 3 करोड़ 44 लाख कारोबारियों ने लोन लिया, जिनकी संख्‍या 2016-17 में बढ़कर 3 करोड़ 97 लाख हो गई। 
- जबकि 2015-16 में 1 करोड़ 24 लाख 74,668 लोगों ने मुद्रा स्‍कीम के तहत लोन लेकर कारोबार शुरू किया, जबकि 2016-17 में यह संख्‍या घटकर 99 लाख 89 हजार रह गई। 

 

'तरूण' कारोबारियों की संख्‍या 2 फीसदी 
मुद्रा स्‍कीम को तीन कैटेगिरी में बांटा गया है। 50 हजार रुपए तक के लोन कैटेगिरी को शिशु, 50 हजार से अधिक लेकिन 5 लाख से कम राशि का लोन लेने वालों को किशोर और 5 से 10 लाख रुपए की लोन कैटेगिरी को तरूण कहा जाता है। दिलचस्‍प बात यह है कि 99 लाख नए कारोबारियों में से केवल 2 फीसदी यानी 2 लाख 92 हजार 974 नए कारोबारियों को तरूण कैटेगिरी का लोन दिया गया। जबकि 81 लाख 10 हजार नए कारोबारियों को शिशु कैटगिरी का लोन मिला और 15.86 लाख नए कारोबारियों को किशोर लोन मिला। 

 

क्‍या है वजह ? 
जानकार बताते हैं कि मुद्रा स्‍कीम के तहत बैंक लोन तो दे रहे हैं, लेकिन बैंक अधिकारी उन बिजनेस मैन को लोन दे रहे हैं, जिनका खाता उनके बैंकों में है और जिनका ट्रेक रिकॉर्ड अच्‍छा है। इंटिग्रे‍टेड एसोसिएशंस ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (आई एम एसएमई) ऑफ इंडिया के चेयरमैन राजीव चावला ने कहा कि बैंक नए लोगों को लोन देने से कतराते हैं। या उनकी औपचारिकताएं इतनी होती हैं कि नए एंटरप्रेन्‍योर के लिए उन शर्तों को पूरा करना संभव नहीं होता। वहीं, सरकार को अपना टारगेट अचीव दिखाने के लिए बैंक पुराने कारोबारियों को लोन देना ज्‍यादा मुनासिब समझते हैं। 

 

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