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संशोधन / कालेधन पर एक और वार, विदेशी चंदा ले रहे ट्रस्टों को बताना होगा पूरा हिसाब-किताब

45 साल में पहली बार ट्रस्ट के लिए बदलेगा आयकर विभाग का नियम, ड्राफ्ट जारी

The trusts have to give details of foreign funds to the Income Tax Department.

नई दिल्ली. विदेश से चंदा पाने वाले न्यास, ट्रस्ट और संस्थान आयकर विभाग की निगरानी में आ गए हैं। अब ट्रस्टों को आयकर विभाग को विदेशी चंदे का पूरा ब्यौरा यानी हिसाब-किताब बताना होना। इसके लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आयकर नियम, 1962 के फॉर्म 10 बी में संशोधन की अधिसूचना का मसौदा जारी किया है। सीबीडीटी ने इस पर पांच जून तक सुझाव मांगे हैं। 

 

45 साल में पहला मौका 

 

यह 45 साल में पहला मौका है जबकि ट्रस्ट-संस्थानों की आडिट रिपोर्ट में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत ऑडिट रिपोर्ट के फार्म को और विस्तार दिया गया है। इसमें विदेश से मिलने वाले चंदे का स्रोत लिखना होगा। सीबीडीटी ने कहा कि नियम और फॉर्म को काफी समय पहले अधिसूचित किया गया था। ऐसे में मौजूदा समय की जरूरत के हिसाब से इनमें तालमेल बैठाने को इन्हें तर्कसंगत बनाने की जरूरत है।

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भारत में हमेशा उठते रहे हैं विदेशी चंदे पर विवाद 

 

राजनीतिक दलों से लेकर ट्रस्टों पर विदेशी चंदे के स्रोत और राशि पर सवालिया निशान लगते रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि भारत से विदेश गया कालाधन विदेशी चंदे के रूप में हवाला के जरिए लौटता है। इससे भारत को टैक्स का नुकसान होता है। यही नहीं कई बार विदेशी चंदे को संदिग्ध भी पाया गया। भारत में राजनीतिक प्रभाव जमाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। 

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