बाजार अस्थिर होने के कारण लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौका, लॉन्ग टर्म में उतार-चढ़ाव कम

  • इन्वेस्टमेंट एडवाइजर जिग्नेश गोपानी एनएसई का निफ्टी इंडेक्स एक महीने में 31.85% नीचे आ चुका है। 
  • कोरोनावायरस संक्रमण का विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव अंदेशे से अधिक हो सकता है। 

Moneybhaskar.com

Mar 20,2020 02:12:00 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस का प्रर्कोप पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले रहा है। अब तक यह 175 देशों में फैल चुका है। इससे विश्व अर्थव्यवस्था की रफ्तार मंद पड़ने की आशंका से न सिर्फ तेल की कीमतों, बल्कि दुनिया के शेयर बाजार में भारी गिरारावट के साथ उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इन्वेस्टमेंट एडवाइजर जिग्नेश गोपानी (हेड, इिक्वटी, एक्सिस एएमसी) एनएसई का निफ्टी इंडेक्स एक महीने में 31.85% नीचे आ चुका है। 19 फरवरी को यह 12,125.90 पर था। 19 माचर् तक यह 3,862.45 अंक गिरकर 8,263.45 पर आ चुका है। सऊदी अरब और रूस मे प्राइज वॉर छिड़ने के बीच बीते एक माह में ब्रेंट क्रूड की कीमत 52.52% घट चुकी है। 19 फरवरी को यह 58.72 डॉलर प्रति बैरल थी। 19 मार्च को यह 27.88 डॉलर प्रति बैरल रह गई। कोरोनावायरस संक्रमण का विश्व अर्थव्यवस्था पर प्रभाव अंदेशे से अधिक हो सकता है। कई देशों ने यात्रा पर प्रतिबंध लगाए हैं।

अगले कुछ हफ्तों तक बनी शॉट टर्म में उतार-चढ़ाव की स्थिति

जहां तक शेयर बाजारों की बात है शॉट टर्म में उतार-चढ़ाव की स्थिति अगले कुछ हफ्तों तक बनी रह सकती है। एक चिंता यह है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो मौजूदा मंदी का दौर लंबे समय तक भी चल सकता है। हालांकि आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए विथिन्न देशों के केंद्रीस बैंकों ने ब्याज दरों में आक्रामक कटौती का ऐलान किया है। लेकिन इसका शॉर्ट टर्म में जितनी जरूरत है उतना प्रभावी असर नहीं होगा। वजह जब तक कोरोनावायरस का खौफ पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक प्रोडक्ट्स की मांग कमजोर रहेगी। भारत में अभी कोरोनावायरस के बहुत कम मामले सामने आए हैं। इसके प्रकोप से बचाव के लिए उठाए जाने वाले एहितयाती कदमों से एयरलाइंस, पयर्टन सेक्टर जैसे कुछ क्षेत्रों की मांग प्रभावित हुई है।


बैंको की हालत भी कमजोर

बाजार की एक चिंता यह भी है कि कंपिनयों पर भारी कर्ज है और उन्हे कर्ज देने वाले बैंको की हालत एनपीए की वजह से कमजोर है। यस बैंक को बचाने के लिए जिस तरह से योजना लाई गई इससे यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। सरकार और रिजर्व बैंक क्रेडिट मार्केट में फिर से भरोसा कायम करने के लिए क्या कदम उठाते है, बाजार की धारणा में स्थिरता लाने में इनकी अहम भूमिका होगी।


लॉन्ग टर्म में उतार-चढ़ाव कम

शॉर्ट से मीडियम टर्म शेयर बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन जहां तक उद्योग-धंधों की बात है लॉन्ग टर्म में इतनी अस्थिरता नहीं आएगी। हां, मौजूदा चुनौतियों से निपटने के दौरान एक-दो तिमाही तक इनकी गितिविधियों में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।


शेयरों में तीन से पांच साल का लक्ष्य लेकर निवेश करें

शेयर बाजार में जारी मौजूदा बिकवाली से फिलहाल दूरी बनाकर रखनी चाहिए। बाजार की इस गिरावट को अच्छे शेयरों को कम कीमत पर खरीदने के मौके के रूप में देखना चाहिए। कम से कम तीन से पांच साल का लक्ष्य लेकर निवेश करना चाहिए। तीन से छह माह की अविध में नियिमत आधार पर निवेश करना चाहिए।

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