निवेश /पीएफ के पैसों के निवेश पैटर्न पर रखें नजर, बच सकेंगे बड़े घोटाले से

  • उत्तर प्रदेश में 45,000 बिजली कर्मचारियों के करीब 2200 करोड़ रुपए पीएफ घोटाले में फंस गए हैं। 

Moneybhaskar.com

Nov 09,2019 02:04:52 PM IST

नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश में बिजली कर्मचारियों के भविष्य निधि यानी पीएफ के पैसों का घोटाला किया गया। जिसमें करीब 45,000 कर्मचारियों के करीब 2200 करोड़ रुपए फंस गए हैं। मामले की जांच चल रही है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के पूर्व चेयरमैन सेतुरत्नम रवि (एस रवि) ने मनी भास्कर किसी भी विभाग के कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों के फंड का निवेश करना होता है, उसे ट्रस्ट का एक बोर्ड तक करता है। इसमें कर्मचारी संघ का एक प्रतिनिधि भी शामिल होता है। लेकिन डीएचएफएल के फंड ट्रांसफर करने को लेकर हुई बैठक में कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि को नहीं शामिल किया गया।

बोर्ड तय करता है निवेश पैटर्न

ट्रस्ट के कुल फंड का 10 से 20 फीसदी पैसा एक ही कंपनी में निवेश नहीं किया जा सकता है। ट्रस्ट की बैठक में ही तय होता है कि पैसों को बैंक, डेट फंड निवेश या फिर कहां निवेश करना है। जानकारों के मुताबिक, पीएफ़ की धनराशि सिर्फ़ राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही जमा की जा सकती थी, किसी अन्य लाभ वाली योजना या निजी एजेंसी में नहीं। लेकिन डीएचएफएल के मामले में इसका उल्लंघन किया गया।

क्या था मामला

16 मार्च 2017 को यूपी पॉवर कार्पोरेशन ट्रस्ट की बैठक में पीएफ़ की राशि को डीएचएफ़एल में 18 करोड़ रुपए निवेश का निर्णय लिया गया। बीसीसी की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक बिजली विभाग के क़रीब 45,000 कर्मचारियों, इंजीनियरों और अधिकारियों के प्रॉविडेंट फ़ंड के क़रीब चार हज़ार करोड़ रुपये को पावर सेक्टर एंप्लॉईज ट्रस्ट ने मार्च 2017 में डीएचएफएल में निवेश किया है। एक साल पहले 1800 करोड़ रुपये मैच्योर होने पर वापस आ गए लेकिन क़रीब 2268 करोड़ की राशि इसलिए अधर में लटक गई है क्योंकि बॉम्बे हाई कोर्ट ने कई संदिग्ध कंपनियों और सौदों से जुड़ा होने की सूचना पर डीएचएफएल कंपनी के भुगतान पर रोक लगा दी है।

ऐसे करें शिकायत

सेतुरत्नम रवि की मानें, तो पीएफ़ खाता धारक के पास यह अधिकार होता है, कि वो रेसिडेंट प्रॉविडेंट फंड को पत्र लिखकर पैसों के निवेश के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। इसके लिए ट्रस्ट को पत्र लिखा जा सकता है। इसके अलावा कुछ संदिग्ध होने पार आईपीसी के सेक्शन 405 सेक्शन में कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मौजूदा वक्त में ऑनलाइन माध्यम से अपने पीएफ अकाउंट पर नजर रखी जा सकती है। कुछ कंपनियां मैसेज के माध्यम से पीएफ अकाउंट में जमा होने वाले फंड की जानकारी देती हैं।

जानें कहां निवेश हुआ पैसा


ट्रस्ट का इनवेस्टमेंट प्लान पहले से तय होता है। ऐसे में कर्मचारी पूछ सकता है कि निवेश तय इनवेस्टमेंट पैटर्न के तहत किया गया है या नहीं। आमतौर पर सभी के पास यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) होता है, जिससे अपने पीएफ अकाउंट के बारे में सारी जानकारी हासिल की जा सकती है। मान लीजिए ट्रस्ट में 1 लाख रुपए हैं, तो ट्रस्ट इस पैसों को कई जगह निवेश करता है। इसका कुछ पैसा डेड फंड में तो कुछ अन्य जगह निवेश किया जाता है। ट्रस्ट के पास जो भी कार्पस है, उस पूरे का गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। ट्रस्ट को पता होता है कि तीन साल में कितने लोगों को रिटायरमेंट होना है। उसकी के मुताबित फंड को शार्ट टर्म इनवेस्टमेंट के तौर पर यूज करते हैं। मेरे हिसाब से आज तक ऐसा नहीं हुआ है कि प्राविडेंट का पैसा नहीं मिला है।

एक साथ नहीं निकाल सकते हैं पीएफ का पैसा

पीएफ का पैसा एक साथ नहीं निकाल सकते हैं। कुछ स्पेशनल कंडीशन जैसे बच्चों की पढ़ाई, शादी या अन्य मौके पर तय मात्र में पीएफ अकाउंट से पैसा निकाला जा सकता है। जबकि रिटायरमेंट के वक्त पीएफ का पूरा पैसा निकाला जा सकता है। मतलब अगर रिटारमेंट से पहले मुझे अपने पैसों का मात्र 30 फीसदी ही फंड मिल सकेगा।

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