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बैंकों पर दबाव बनाए आरबीआई, रियल एस्‍टेट सेक्‍टर ने रखी मांग

बैंकों पर दबाव बनाए आरबीआई, रियल एस्‍टेट सेक्‍टर ने रखी मांग
 
नई दिल्‍ली।रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में बदलाव न करने पर रियल एस्‍टेट सेक्‍टर निराश तो है, लेकिन डेवलपर्स ने इसे अपेक्षित कदम बताते हुए मांग की है कि रिजर्व बैंक और सरकार को बैंकों पर दबाव बनाना चाहिए कि वे अब ब्‍याज दरों में कमी करें। डेवलपर्स का कहना है कि नोटबंदी के बाद रियल एस्‍टेट मार्केट में बायर्स के सेंटिमेंट्स में सुधार हो सकता है, लेकिन अब बैंकों को आगे आना चाहिए।
 
कंफेडरेशन ऑफ रियल एस्‍टेट डेवलपर्स एसोसिएशन (क्रेडाई) के दिल्‍ली एनसीआर के प्रेसिडेंट मनोज गौरने कहा कि वित्तीय संस्थाओं के नजरिये से आरबीआई का कदम सराहनीय हैं। अब देखना यह है कि इन सभी नीतियों एवं निर्णयों का फायदा वित्तीय संस्थाए कैसे उठाती हैं ताकि इनका लाभ सभी उपभोक्ताओं को मिल सके एवं मार्किट में सकरात्मक स्तिथि जारी रहे।
 
क्रेडाई वेस्‍टर्न यूपी के वाइस प्रेसिडेंट अमित मोदीने कहा कि रेपो रेट में बदलाव न करना अपेक्षित कदम है, क्योंकि आरबीआई ने अक्टूबर में रेपो रेट 6.25 फीसदी में 0.25 फीसदी की कमी की थी। इसलिए आरबीआई ने अपनी भूमिका को पूरा किया है। वहीं, दूसरी ओर बैंक उस फायदे को अंतिम उपभोक्‍ता तक पहुंचाने के लिए तैयार नहीं हैं। बैंकों के पास पर्याप्त नकद राशि आ चुकी है, इसलिए उन्हें ब्‍याज दरों में कटौती का फायदा अंतिम उपभोक्‍ता को देना चाहिए। हमें उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय और आरबीआई दोनों बैंकों पर दबाव बनाएंगे कि यह फायदा कंज्‍यूमर को मिले।
 
क्रेडाई (राज नगर एक्सटेंशन) के जनरल सेक्रेटरी गौरव गुप्ताने कहा कि एमएसएफ को 6.25 की दर पर रखने से बैंक या वित्तीय संस्थाएं अब आरबीआई से ओवरनाईट बोर्रोविंग के तहत कम दर पर क़र्ज़ ले सकते हैं ,जिससे उन्हें आगे उधार देने में ज्यादा आसानी होगी | बहरहाल अगर रेट्स में सीधे तौर से कोई कटौती की जाती तो इसका प्रभाव हमें रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखने को मिलता, क्योंकि हाल ही में आरबीआई द्वारा जारी हाउसिंग प्राइस इंडेक्स में भी बढ़ोतरी आंकी गयी हैं |
 
 
साया ग्रुप के एमडी विकास भसीनने कहा कि साल की शुरुआत में आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी से मार्केट में माहौल जरुर सुधरा है, जिसका असर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही तरीके से उपभोक्ताओं पड़ा है। महागुन ग्रुप के डायरेक्टर धीरज जैनने कहा कि अगली मोनिटिरी पॉलिसी तक आरबीआई इन्फ्लेशन को और भी ज्यादा संतुलित रखने की कोशिश करेगी और साथ ही भविष्य की नीतियों पर काम करेगी, तब तक वित्तीय संस्थाए को भी उपभोक्ताओं के हित में कार्य करते हुए नई नीतियां लानी चाहिए।
 
क्रेडाई-वेस्टर्न यूपी के वाईस प्रेसिडेंट राजेश गोयलने कहा कि आरबीआई द्वारा रेट कट्स को लेकर लिया गया फैसला काफी पूर्व अनुमानित रहा। बजट सत्र के बाद बाजार धीरे धीरे अपनी गति में आ रहा है। आरबीआई द्वारा रेट में कटौती न करने से भी होम बायर्स को निराशा हाथ नही लग रही है। बैंकों ने पहले से ही होम लोन और ईएमआई काफी कम हो चुकी है, जो खरीददारों और बाजार के लिए राहत की बात है।  
 

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