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रियल एस्टेट सेक्टर ने बजट का किया स्वागत, कहा- पुराने दिन लौटेंगे

रियल एस्‍टेट डेवलपर्स ने बजट 2017 का स्‍वागत किया है। डेवलपर्स का कहना है कि बजट से अफोर्डेबल हाउसिंग को बूस्‍ट मिलेगा।

Arun Jaitely gives cheers to real estate developers
नई दिल्‍ली। रियल एस्‍टेट डेवलपर्स ने बजट 2017 का स्‍वागत किया है। डेवलपर्स का कहना है कि बजट से अफोर्डेबल हाउसिंग को बूस्‍ट मिलेगा और एक बार फिर से मार्केट पटरी पर आ जाएगा। नेशनल हाउसिंग बैंक के रिफाइनेंसिंग टारगेट के बढ़ने से डेवलपर्स के साथ साथ होम बायर्स को भी लोन मिलना शुरू हो जाएगा। डेवलपर्स ने कहा कि नोटबंदी के वजह से जो असर मार्केट पर पड़ा है, वह बजट के असर से खत्‍म हो जाएगा।
 
नेशनल रियल एस्‍टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नरेडको) के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन ने कहा कि बजट 2017 ने एक ऐसी सीरिरज की शुरुआत की है, जो हाउसिंग सेक्‍टर के लिए फायेदमंद साबित होंगे। इन घोषणाओं से अर्बन पुअर की हालत में सुधार होगा। उन्‍होंने कहा कि इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सेक्‍टर को इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर का दर्जा मिलने से सरकार के उस टारगेट को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिसमें वह 2022 तक सबको घर उपलब्‍ध कराना चाहती है।
 
क्रेडाई पश्चिमी यूपी के प्रेसिडेंट एवं गुलशन होम्‍स के डायरेक्‍टर दीपक कपूर ने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग और हाउसिंग फॉर ऑल, रियल एस्टेट के लिए सरकार के इस बजट में दो मुख्य मुद्दे रहे | फिलहाल प्रधान मंत्री अवास योजना का लाभ केवल इ.डब्लू.एस और एल.आई.जी. वर्ग के लोगो तक ही सीमित है, पर कम दामों के घरों की मांग देश में सभी वर्ग के लोगो को है | सरकार के 2019 तक के 1 करोड़ घर की टारगेट अफोर्डेबल हाउसिंग को काफी बढ़ावा देगी | कुल मिलाकर इस बार के बजट में आम जनता के लिए सरकार द्वारा सराहनीय  कदम लिए गये हैं और यह पूरे तरीके से देश के विकास में भी कारगर होगा |
 
सुपरटेक के चेयरमैन आरके अरोड़ा ने कहा कि रियल एस्‍टेट मार्केट के लिए बजट बेहद खास रहा। अफोर्डेबल हाउसिंग पर खास ध्‍यान दिया गया। एनएचबी का टारगेट बढ़ा कर लोन का दायरा बढ़ाएगा और खास बात यह है कि अब तक डेवलपर्स को 3 साल के भीतर अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्‍ट पूरे करने होते थे, जिसे बढ़ाकर 5 साल कर दिया गया है।
 
एसीएमई ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्‍टर राजेश दोषी ने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग के साथ-साथ दूसरे सेगमेंट की हाउसिंग के लिए बजट में बहुत कुछ है। एनएचबी का टारगेट बढ़ने से होम लोन का दायरा बढ़ेगा। प्रॉपर्टी को होल्‍ड करने पर कैपिटल गेन टैक्‍स की अवधि कम करने से भी रियल एस्‍टेट सेक्‍टर को फायदा होगा।
 
अजनारा इंडिया के सीएमडी अशोक गुप्ता ने कहा कि बजट 2017-2018 से लोगों ने जितनी उम्मीद की थी उससे और भी बेहतर नतीजें सामने आये हैं | टैक्स से राहत और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से रियल एस्टेट सेक्टर को अच्छी बूस्ट मिलने वाला है | अब घरों की डिमांड और भी ज्यादा बढ़ने वाली है | अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट की अगर बात करें तो यह सभी वर्गों के लिए सरकार द्वारा सबसे लाभकारी कदम उठाये गये हैं
 
सिग्नेचर ग्लोबल के प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि इस बजट से सरकार ने सभी सेक्टरों को काफी राहत दी है खासकर अफोर्डेबल हाउसिंग को इंफ्रास्ट्रक्चरल स्टेटस मिलने से से हमें रियल एस्टेट सेक्टर में भी काफी विकास होता नज़र आएगा | इसके साथ ही सरकार ने जो मध्यम वर्गीय लोगों में टैक्स से राहत दी है उनके लिए अब एक घर होना और भी आसान हो सकेगा जिससे की अब अफोर्डेबल हाउसिंग की डिमांड और भी बढ़ेगी |
 
प्रतीक ग्रुप के चेयरमैन प्रशांत तिवारी ने कहा कि फाइनेंस मिनिस्‍टर ने घोषणा की है कि अब प्रोजेक्‍ट्स कारपेट एरिया के आधार पर बिकेंगे, इससे बायर्स के सेंटिमेंट्स में सुधार होगा। बायर्स को यह समझ आएगा कि उन्‍हें कितना एरिया का घर मिलेगा। इसके अलावा मिनिस्‍टर ने इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट्स पर भी फोकस किया है, जिससे रियल एस्‍टेट मार्केट में सुधार होगा।
 
टीडीआई इंफ्राटेक लिमिटेड के एमडी अक्षय तनेजा ने कहा कि टियर टू सिटीज में एयरपोर्ट बनाने के सरकार के वादे की वजह से छोटे शहरों में भी रियल एस्‍टेट मार्केट में बूस्‍ट आएगा।
 
पैसिफ़िक ग्रुप के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अभिषेक बंसल ने कहा कि टैक्स दरों में राहत मिलने से अब मध्य वर्गीय परिवार आसानी से अपना घर खरीद सकेंगे। पैरामाउंट ग्रुप के ईडी अश्वनी प्रकाश ने कहा कि 2017 का बजट आम जनता के लिए खुशियों से भरा रहा। साल के शुरुआत में कई बैंको ने भी अपने ब्याज दरों में कटौती की।  यानी कि कुल मिलाकर सभी संकेत सेक्टर के लिए अच्छे नज़र आ रहे हैं।
 
अन्तरिक्ष इंडिया ग्रुप के चेयरमैन राकेश यादव ने कहा कि पिछले साल हाउसिंग फॉर ऑल को गति मिली और साथ ही कई अहम् बिल भी पास हुए | इस साल बजट में इंफ्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं की गयी हैं।  हालांकि इस बजट में सरकार को सिंगल विंडो क्लिअरेंस पर भी ध्यान केन्द्रित करना चाहिए था जिसमे कोई भी निर्णय नहीं लिया गया |  देश में जीएसटी एवं रेरा के लागू होने बाद शायद सिंगल विंडो क्लिअरेंस को भी वास्तविकता मिल सके |

 
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