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    एक भी प्राइवेट डेवलपर नहीं बना रहा है सस्तेे घर, जानें क्या है वजह

     
    नई दिल्‍ली। साल 2022 तक सबको घर देने का वादा पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2015 में हाउसिंग फॉर ऑल मिशन लॉन्‍च किया था, लगभग डेढ़ साल के दौरान केंद्र सरकार देश भर में 16.50 लाख घरों के निर्माण की मंजूरी दे चुकी है, लेकिन अब तक प्राइवेट डेवलपर्स का एक भी प्रोजेक्‍ट इसमें शामिल नहीं है। प्राइवेट डेवलपर्स अफोर्डेबल हाउसिंग स्‍कीम से दूरी बनाए हुए हैं। प्राइवेट डेवलपर्स का कहना है कि अभी स्‍कीम में काफी खामियां हैं, उन्‍हें दूर किए बिना वे इसमें शामिल नहीं हो पाएंगे।
     
    फाइनेंस सस्‍ता होना चाहिए
     
    पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री के वाइस प्रेसिडेंट और नेशनल रियल एस्‍टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) के चेयरमैन राजीव तलवार ने कहा कि सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग को इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का दर्जा देकर एक बड़ा काम किया है, लेकिन डेवलपर्स के पास पैसा नहीं है कि वे अफोर्डेबल हाउस बना सके, इसलिए सरकार, डेवलपर्स को सस्‍ता फाइनेंस उपलब्‍ध कराए। आने वाले महीनों में डेवलपर्स को सस्‍ता लोन उपलब्‍ध कराया जाना चाहिए।
     
    पॉलिसी में क्लियरिटी नहीं
     
    नारेडको के वाइस प्रेसिडेंट एवं जिंदल रियल्‍टी के सीइओ गौरव जैन ने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर अभी काफी क्लियरिटी नहीं है। जैसे कि हर राज्‍य की अपनी पॉलिसी है, जिसके नियम अलग अलग हैं। राज्‍यों में राज्‍य सरकार की नीतियों में काफी खामियां हैं। केंद्र को भी अभी नए सिरे से पॉलिसी लानी होगी। हाउसिंग मिनिस्‍टर एम. वैंकेया नायडू ने आज हाउसिंग सेक्रेट्री को कहा है कि वे हर मुद्दे पर राउंड टेबल डिस्‍क्‍शन करे। उम्‍मीद है कि इससे कोई रास्‍ता निकलेगा।
     
    डेन्‍सटी बढ़ानी होगी
     
    गौरव जैन ने कहा कि कई राज्‍यों में रियल एस्‍टेट प्रोजेक्‍ट्स के लिए फ्लोर एरिया रेश्‍यो (एफआईआर) तो बढ़ा दिया है, लेकिन डेन्‍सटी नहीं बढ़ाई गई है। इसके चलते अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्‍ट्स नहीं आ रहे हैं। रिक्‍स स्‍कूल ऑफ बिल्‍ट इन्‍वायरमेंट के असोसिएट डीन एंड डायरेक्‍टर सुनील अग्रवाल ने कहा कि अगर एफएआर बढ़ जाए और डेन्‍सटी न बढ़े तो उससे बड़े फ्लैट्स बनेंगे, जो अफोर्डेबल हाउसिंग के दायरे में नहीं आएंगे। सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए कि सिटी एरिया में डेन्‍सटी बढ़ाई जाए। अगर सिटी से बाहर डेन्‍सटी से बाहर बढ़ाई जाती है तो उसका कोई फायदा नहीं होगा।
     
    इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर है नहीं तो कैसे बनेंगे सस्‍ते घर
     
    सरकार जिस इलाके में अफोर्डेबल प्रोजेक्‍ट्स लाना चाहती है, उन इलाकों में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर है ही नहीं। अग्रवाल के मुताबिक, ज्‍यादातर एरिया ऐसे हैं, जहां न रोड है, न मेट्रो, न सीवर, बिजली-पानी। सरकार पहले वहां इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप करे, तब डेवलपर्स अफोर्डेबल प्रोजेक्‍ट्स ला सकते हैं।
     
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