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    1 लाख करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी हो सकती है जब्त, शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक को सदन की मंजूरी

    1 लाख करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी हो सकती है जब्त, शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक को सदन की मंजूरी
    नई दिल्‍ली। लोकसभा ने मंगलवार को शत्रु संपत्ति संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। शुक्रवार को राज्‍यसभा ने भी इसे पारित कर दिया था। इस तरह इस बिल को संसद की मंजूरी मिल गई है। बिल का मकसद चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के बाद वहां जाकर बसे लोगों और उनके उत्तराधिकारियों को भारत में उनकी प्रॉपर्टी पर किसी भी दावे से वंचित करना है। देश में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की शत्रु संपत्ति मौजूद है और इससे जुड़े 15 सौ से अधिक मामले लंबित हैं।
     
    सेलेक्‍ट कमेटी को सौंपा गया था बिल
     
    पिछले साल मार्च माह में लोकसभा ने इस बिल को पारित कर दिया था, लेकिन राज्‍यसभा ने इसे सेलेक्‍ट कमेटी के पास भेज दिया था। इस बिल के लंबित रहने के कारण सरकार को इसके संबंध में पांच बार अध्यादेश लाना पड़ा था। आखिरी बार लाए गए की अवधि मंगलवार को समाप्त हो रही है। सेलेक्‍ट कमेटी ने बिल में कुछ संशोधनों की सिफारिश की थी। राज्‍यसभा ने इन संशोधनों के साथ इस विधेयक को पारित कर शुक्रवार को ही लोकसभा को लौटा दिया। संक्षिप्त चर्चा के बाद लोकसभा ने इसे पारित कर दिया।
     
    सरकार को होगा जब्‍त करने का अधिकार
     
    विधेयक में भारत विभाजन के समय या 1962, 1965 और 1971 के युद्ध के बाद चीन या पाकिस्तान पलायन करके वहां की  नागरिकता लेने वाले लोगों को 'शत्रु नागरिक' और उनकी संपत्ति को 'शत्रु संपत्ति की श्रेणी में रखने का प्रावधान किया गया है और सरकार को इसे जब्त करने का अधिकार दिया गया है।
     
    कस्‍टोडियन भी नियुक्‍त कर सकती है सरकार
     
    सरकार को यह अधिकार भी मिला है कि वह ऐसी प्रॉपर्टी के लिए अभिरक्षक या संरक्षक (कस्टोडियन) नियुक्त करे। शत्रु नागरिकों के भारत में रह रहे उत्तराधिकारियों का भी उनकी छूटी संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहेगा। हालांकि इस नए कानून से प्रभावित लोग अपने दावों के हक में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकेंगे।
     
    संशोधन के बाद पास हुआ बिल
     
    गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इसके प्रावधानों को लेकर विपक्षी सदस्यों ने जो भी आपत्तियां और चिंताएं व्यक्त की थीं, सरकार ने उन सभी पर ध्यान दिया है। इस कानून को जाति और धर्म के दायरे में बांट कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह सिर्फ पाकिस्तान चले गए लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि चीन गए लोगों के संदर्भ में भी है।
     
    सिंह ने कहा, सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं, कानून के दायरे में उठाए हैं। इस मामले में  नैसर्गिक न्याय या मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं किया गया है। इसमें भारत के किसी भी नागरिक का कोई अधिकार नहीं छीना जा रहा है। यह सिर्फ और सिर्फ शत्रु देशों की नागरिकता लेने वाले लोगों और उनके उत्तराधिकारियों के लिए बनाया गया है। 

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