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गौतमबुद्ध नगर में बनेगा पहला हाईवे विलेज, देश भर में 1000 लोकेशन पर होगा काम

पहला हाइवे विलेज ईस्‍टर्न पैरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे पर गौतम बुद्ध नगर में बनेगा।

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नई दिल्‍ली. हाईवे किनारे हर तरह की सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए सरकार ने देश भर में 1000 हाईवे विलेज बनाने का प्‍लान किया है। पहला हाइवे विलेज ईस्‍टर्न पैरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे पर गौतम बुद्ध नगर में बनेगा। बिल्‍ट-ऑपरेट और ट्रांसफर मोड पर बनाने वाले इस पहले विलेज के लिए नेशनल हाइवे अथॉरिटी (एनएचएआई) ने टेंडर जारी कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि 1000 हाईवे विलेज से लगभग 20 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। 
 
कितनी होगी कॉस्‍ट  
सरकार का मकसद है कि हाईवे के किनारे वे-साइड अमेनिटीज डेवलप की जाएं। इसे हाईवे विलेज नाम दिया गया है। एनएचएआई ने पहले हाईवे विलेज का टेंडर जारी किया है। यह टेंडर 30 नवंबर को खुलेगा। इस टेंडर के बिड डॉक्‍यूमेंट के मुताबिक, ये वे-साइड अमेनिटीज 5 एकड़ जमीन पर डेवलप की जाएगी। जो ईस्‍टर्न पेरिफेरल एक्‍सप्रेस-वे के लैफ्ट हैंड साइड पर गौतमबुद्ध नगर में 83+100 किलोमीटर पर होगी। एनएचएआई ने इस प्रोजेक्‍ट की एस्टिमेट कॉस्‍ट 28.69 करोड़ रुपए आंकी है। इसमें कॉस्‍ट ऑफ लैंड, फर्नीचर- फिटिंग जैसे खर्च शामिल हैं।
 
क्‍या होगा इस हाईवे विलेज में 
इस हाईवे विलेज में हाईवे पर सफर करने वाले पैसेंजर्स के लिए हर तरह की सर्विसेज उपलब्‍ध होगी। जैसे : 
  • फ्यूल स्‍टेशन यानी पेट्रोल पम्‍प
  • विलेज हाट
  • ढाबा
  • कार वाश सेंटर
  • मीटिंग एवं कॉन्‍फ्रेंस फेसिलिटी
  • मोटल व गेस्‍ट रूम
  • शॉप
  • आर्ट एंड क्राफ्ट हैंडलूम शॉप
  • क्‍योस्‍क
  • फूड कोर्ट या रेस्‍टोरेंट
  • कार-बस पार्किंग
  • एटीएम 
  • मेडिकल क्‍लीनक 
  • चिल्‍ड्रन प्‍ले एरिया
 

183 स्थानों पर जमीन अधिग्रहण 

मिनिस्‍ट्री ऑफ रोड एंड ट्रांसपोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि पैसेंजर्स की आवश्यकता के अनुसार हाईवे विलेज व नेस्ट की तीन श्रेणियां होंगी। एनएचएआइ को योजना के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अब तक 183 स्थानों पर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। 

हाईवे नेस्‍ट से जुड़ेंगे आम लोग 

हाईवे विलेज के अलावा एनएचएआई ने हाईवे नेस्‍ट योजना भी शुरू की है। हाईवे नेस्ट योजना से आम लोगों को भी जोड़ा जाएगा। जिन लोगों के पास हाईवे के नजदीक एक हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है वे एनएचएआइ से संपर्क कर फै्रंचाइजी ले सकते हैं। उन्हें एनएचएआइ द्वारा प्रदत्त प्रारूप के अनुसार सुविधाएं विकसित करनी होंगी। लैंड यूज कन्वर्जन, ब्रांडिंग, लोगो, साइनेज, सुविधाओं के स्तर आदि के विषय में उन्हें एनएचएआइ की ओर से हर तरह की सहायता प्रदान की जाएगी।

 
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