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प्राइवेट सेक्‍टर के साथ मिलकर तैयार होंगे मेट्रो प्रोजेक्‍ट्स, सरकार बना रही नई पॉलिसी

 
नई दिल्‍ली. राजधानी‍ दिल्‍ली में रिलायंस के साथ मिलकर शुरू किए गए एयरपोर्ट मेट्रो प्रोजेक्‍ट के फेल होने के बावजूद मोदी सरकार मेट्रो के नए प्रोजेक्‍ट्स में प्राइवेट सेक्‍टर को भी शामिल करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए सरकार नई मेट्रो पॉलिसी तैयार कर रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि इस पॉलिसी में यह विशेष ध्‍यान रखा जाएगा कि इन प्रोजेक्‍ट्स का हाल एयरपोर्ट मेट्रो जैसा न हो।
 
कैपिटल इन्‍टेंसिव होंगे प्रोजेक्‍ट्स
 
मिनिस्‍ट्री ऑफ अर्बन डेवलपमेंट द्वारा यह पॉलिसी तैयार की जा रही है। पॉलिसी में प्रस्‍ताव रखा गया है कि मेट्रो प्रोजेक्‍ट्स में पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप मॉडल को अपनाया जाए। इसके लिए मिनिस्‍ट्री का प्रस्‍ताव है कि एक डिस्पियूट रिसोल्‍यूशन मैकेनिज्‍म डेवलप किया जाएगा। साथ ही, प्रोजेक्‍ट कैपिटल इन्‍टेंसिव होगा, ताकि प्राइवेट सेक्‍टर प्रोजेक्‍ट्स के प्रति आकर्षित हों।
 
100 साल के असर का होगा आकलन
 
मिनिस्‍ट्री का कहना है कि अभी जो मेट्रो प्रोजेक्‍ट्स बनते हैं कि उनका एसेसमेंट 30 से 40 साल के लिए किया जाता है, लेकिन अब जो प्रोजेक्‍ट बनेंगे, उन प्रोजेक्‍ट का असेसमेंट 100 साल से अधिक के लिए किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि इस पॉलिसी के तहत बनने वाले मेट्रो प्रोजेक्‍ट्स का अगले 100 साल तक इकोनॉमी और इन्‍वायरमेंट पर क्‍या असर पड़ेगा, इसका आकलन करते हुए प्रोजेक्‍ट का अप्रेजल किया जाएगा। मिनिस्‍ट्री का कहना है कि मेट्रो की वजह से जहां इम्‍प्‍लॉयमेंट जनरेट होता है, वहीं इकोनॉमी में भी भी ग्रोथ होता है और पोल्‍यूशन भी कम होता है।
 
ऐसे भी होगी इनकम
 
अभी मेट्रो की इनकम का बड़ा जरिया यात्रियो का किराया है, इसके अलावा एडवर्टाइजमेंट और प्रॉपर्टी डेवलपमेंट से मेट्रो को आमदनी होती है, लेकिन नई मेट्रो पॉलिसी में प्रोविजन किया जा रहा है कि मेट्रो प्रोजेक्‍ट ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (डीओडी) पर आधारित होंगे। इसका मतलब है कि मेट्रो स्‍टेशन के आसपास डेवलपमेंट होगा और उस डेवलपमेंट के बदले लोगों से वेल्‍यू कैप्‍चरिंग फाइनेंस (वीसीएफ) मॉडल के तहत टैक्‍स और सरचार्ज वसूले जाएंगे। इस पैसे का इस्‍तेमाल मेट्रो प्रोजेक्‍ट्स में होगा।
 
अभी यहां है मेट्रो रेल नेटवर्क
 
अभी देश भर में मेट्रो रेल की लंबाई 326 किलोमीटर है, जबकि 500 किलोमीटर के प्रोजेक्‍ट्स पर काम चल रहा है और 600 किलोमीटर के प्रोजेक्‍ट्स पर विचार किया जा रहा है। दिल्‍ली एनसीआर में 212 किलोमीटर में मेट्रो रेल चलती है, जबकि बेंगलुरु में 33, चैन्‍नई में 20, मंबई में 11.40 किमी, मुंबई मोनोरेल 9 किमी, जयपुर में 9, कोलकाता में 27 और गुरुग्राम में 5 किमी रैपिड रेल नेटवर्क है।
 
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