Home » Personal Finance » Property » Updateजेपी समूह - भारत का उच्चतम न्यायालय का फैसला, जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक जमा कराने होंगे 275 करोड़

जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक जमा कराने होंगे 275 करोड़, डायरेक्‍टर्स नहीं बेच पाएंगे पर्सनल प्रॉपर्टी

सुप्रीम कोर्ट ने जेपी एसोसिएट्स से 275 करोड़ रुपए स्‍वीकार कर लिए हैं।

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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने जेपी ग्रुप को 31 दिसंबर तक 275 करोड़ रुपए जमा कराने को कहा है। यह पैसा कंपनी को दो किश्‍तों में जमा कराना होगा। इसके साथ ही कोर्ट ने कंपनी के सभी 13 डायरेक्‍टर्स को अपनी पर्सनल असेट बेचने से भी रोक दिया है ।  सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की डेट 10 जनवरी, 2018 तय की है।साथ ही, इस सुनवाई में कंपनी के सभी 13 डायरेक्‍टर्स को उपस्थित रहने को कहा है।  

 

अदालत की मंजूरी के बिना प्रॉपर्टी नहीं बेच जाएंगे प्रमोटर और डायरेक्‍टर 

 

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कंपनी के प्रमोटर्स और इंडी‍पेंडेंट डायरेक्‍टर्स कोर्ट की मंजूरी के बिना अपनी या अपने परिवार के सदस्‍यों के नाम वाली प्रॉपर्टी नहीं बेच सकते हैं। इससे पहले, कोर्ट ने कंपनी को एक राहत भी दी। जेपी एसोसिएट से कहा गया कि वो लैंड और बाकी प्रॉपर्टी बेचकर दो हजार करोड़ रुपए इकट्ठा कर लें, लेकिन इससे पहले कंपनी को आईआरपी का अप्रूवल लेना होगा।  

 

कंपनी के डायरेक्‍टर्स के देश छोड़ने पर रोक 

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्‍टेट  डेवलपर जेपी इन्फ्राटेक 27 अक्टूबर तक दो हजार करोड़ रुपए जमा कराने को कहा था। होम बायर्स की की अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के डायरेक्टर्स के देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी थी।  इसके अलावा जेपी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रॉसेस जारी रखने को भी कहा गया था। कोर्ट ने इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) से भी कहा है कि होम बायर्स और क्रेडिटर्स के हितों की रक्षा की जाए। इससे पहले 4 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने होम बायर्स की पिटीशन पर सुनवाई करते हुए दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। 

 

45 दिन में मांगा था रिजॉल्यूशन प्‍लान  

 इन्‍सोल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड के मुताबिक, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) द्वारा किसी एक प्रोफेशनल को इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) अप्वॉइंट किया जाता है। ये कंपनी का पूरा मैनेजमेंट संभाल लेता है और तय वक्त में प्‍लान तैयार कर एनसीएलटी को सौंपता है। इस प्‍लान के मुताबिक, कंपनी के क्रेडिटर्स को उनका पैसा लौटाया जाता है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम. खानविलकर और जस्टिस डीवाई. चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था- हमने इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल से कहा है कि 45 दिन में  सुप्रीम कोर्ट को रिजॉल्यूशन प्‍लान बनाकर सौंपे। 

 

बायर्स का फंसा है 25 हजार करोड़ रुपए

पिछली सुनवाई में होम बायर चित्रा शर्मा के वकील अजीत सिन्‍हा ने कहा था कि होम बायर्स का करीब 25 हजार करोड़ रुपए फंसा है, लेकिन बैंक के सिर्फ 500 करोड़ रुपए की रकम के लिए इन्‍सॉल्‍वेंसी प्रोसेस शुरू कर दिया गया। बता दें कि जेपी इन्फ्राटेक के प्रोजेक्ट्स में करीब 32 हजार लोगों ने फ्लैट बुक कराए थे। 

 

यह है मामला

9 अगस्‍त को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) ने जेपी इन्‍फ्राटेक लिमिटेड को दिवालिया (इनसॉल्वेंट) की श्रेणी में डालते हुए उसके खिलाफ इनसॉल्‍वेंसी का प्रोसेस शुरू करने की मंजूरी दी थी। यह ऑर्डर आईडीबीआई बैंक की पिटीशन पर दिया गया था।  जेपी इन्फ्राटेक पर उसका करीब 526.11 करोड़ रुपए का डिफॉल्‍ट है। एनसीएलटी ने गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट अनुज जैन को इं‍टरिम रिजॉल्युशन प्रोफेशनल अप्वॉइंट किया है। लेकिन होम बायर्स की शिकायत थी कि कि उन्‍हें सिक्‍योर्ड क्रेडिटर्स नहीं माना जा रहा है, इसलिए इन्‍सॉलवेंसी प्रोसेस रोका जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर को मामले की सुनवाई हुई और इन्‍सॉल्‍वेंसी प्रोसेस पर स्‍टे लगा दिया गया।

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