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जीएसटी, नोटबंदी ने शहरों की रियल एस्‍टेट रैंकिंग घटाई : रिपोर्ट

नोटबंदी और जीएसटी की वजह से रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में लिक्विडिटी की दिक्‍कत पैदा हुई

survey conducted jointly by the Urban Land Institute and consultancy PwC
मुंबई। पिछले साल की नोटबंदी और इस साल जीएसटी की वजह से रियल एस्‍टेट सेक्‍टर में जहां लिक्विडिटी की दिक्‍कत पैदा हुई, वहीं इसका इन्‍वेस्‍टमेंट और शहरों के डेवलपमेंट प्रोसपेक्‍ट्स पर भी असर पड़ा है। इस कारण भारत के शहरों की रैकिंग गिरी है। अर्बन लैंड इंडस्‍टीट्यूट और कंसलटेंसी फर्म पीडब्‍ल्‍यूसी की एक स्‍टडी रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। 
 
रिपोर्ट जारी 
इमर्जिंग टेंड इन रियल एस्‍टेट एशिया पैसेफिक 2018 के नाम से जारी यह रिपोर्ट 600 से अधिक रियल्‍टी प्रोफेशनल्‍स और इन्‍वेस्‍टर्स के ओपनियन पर आधारित है। 
 
 
इन शहरों की रैकिंग गिरी 
पीडब्‍ल्‍यूसी इंडिया लीडर (रियल एस्‍टेट टैक्‍स प्रेक्टिस) अभिषेक गोयनका ने कहा कि देश में अफोर्डेबल हाउसिंग में  इन्‍वेस्‍टमेंट में जरूर इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ा है और इसमें अवसर भी बढ़े हैं। यह सेक्‍टर जरूर बड़े इन्‍वेस्‍टर्स को लुभा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक  साल 2018 के लिए मुंबई इन्‍वेस्‍टमेंट डेस्टिनेशन की लिस्‍ट में 12वें स्‍थान पर है, जबकि पिछले साल मुंबई का स्‍थान दूसरा था। वहीं, डेवलपमेंट प्रोस्‍पेक्‍ट़स के मामले में मुंबई का स्‍थान आठवां हे। 
 
इसी तरह इन्‍वेस्‍टमेंट डेस्टिनेशन के मामले में बेंगलुरु का स्‍थान 15वां है और दिल्‍ली 20वें नंबर पर है। जबकि पिछले साल बेंगलुरु पहले और दिल्‍ली 13वें स्‍थान पर थी। डेवलपमेंट डेस्टिनेशन रैंकिंग में बेंगलुरु का स्‍थान 16 वां और दिल्‍ली का 18वां स्‍थान है। 
 
रेंसिडेंशियल मार्केट दबाव में 
सर्वे में पाया गया कि रिटेल एसेट अब काफी पापुलर है रेंट में औसत एप्रिसिएशन 8 से 10 फीसदी सालाना हो रही है, जबकि ऑफिस स्‍पेस में एप्रिसिशन 5 से 7 फीसदी है। लेकिन रेसिडेंशियल स्‍पेस प्रभावित हो रहा है। पीडब्‍ल्‍यूसी इंडिया के टैक्‍स एंड रेग्‍युलेटरी सर्विस पार्टनर अनीष संघवी ने कहा कि नोट बंदी, जीएसटी के अलावा रेग्‍युलेटरी रिफॉर्म के कारण रेसिडेंशियल सेक्‍टर पर दबाव बढ़ा है। 
 
इंटरनेशनल इन्‍वेस्‍टर्स भी दूर 
ज्‍यादातर इंटरनेशनल इन्‍वेस्‍टर्स भारत में कॉमर्शियल प्रॉपर्टी को प्राथमिकता देते हैं, जिसका कैपिटल रेट का औसत 8.5 से 8.75 फीसदी है। लेकिन पिछले तीन क्‍वार्टर के दौरान देश में अफोर्डेबल होम्‍स की सप्‍लाई बढ़ी है, जबकि इन्‍वेस्‍टर्स इस सेगमेंट पर इन्‍वेस्‍टमेंट करने में सतर्क रहते हैं। क्‍योंकि सस्‍ती दर पर जमीन की उपलब्‍धता, सिंगल विंडो अप्रूवल और प्रोजेक्‍ट पूरा होने में समय का लगना ऐसी चुनौतियां हैं, अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्‍ट्स इनका लगातार सामना कर रहे हैं। 
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