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थोड़ी पूंजी निवेश कर लाखों कमाए, रियल एस्टेट में शुरू करें अपना बिजनेस

वजह, देश में अभी करीब 2 करोड़ घरों की जरूरत है और इसको पूरा करने के लिए सरकार ने 2022 तक का लक्ष्य तय किया है।

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नई दि‍ल्ली. रियल एस्टेट तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है। मौजूदा समय में सिर्फ मेट्रो और कुछ टियर टू सिटी तक अपनी पहुंच बना चुका रियल एस्टेट सेक्टर आने वाले समय में टियर थ्री शहरों में भी पहुंचेगा। वजह, देश में अभी करीब 2 करोड़ घरों की जरूरत है और इसको पूरा करने के लिए सरकार ने 2022 तक का लक्ष्य तय किया है। यहां पर जॉब से लेकर कमाई करने के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं। अगर, आप रियल एस्टेट से जुड़कर पैसा कमाना चाहते हैं और आपके पास निवेश करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं है तब भी टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। आप, अपना एक कंसल्टिंग फर्म खोलकर, बिना बड़ा निवेश किए ही मोटा पैसा कमा सकते हैं।
 
कैसे शुरू करें कंसल्टिंग फर्म

कंसल्टिंग फर्म का बिजनेस एक छोटे ऑफिस या घर से भी शुरू किया जा सकता है। शुरुआत में दो से चार लोगों की टीम ही काफी है। आपके पास एक टेलीफोन कनेक्शन, एक कंम्प्यूटर या लैपटॉप होना चाहिए। आपके पास शुरुआती पूंजी 30 से 50 हजार रुपए भी हो तो भी यह काम शुरू कर कसते हैं। शुरुआत में आप दो या तीन अच्‍छे बिल्डर का चयन करें। फिर उसके प्रोजेक्‍ट के विषय में जानकारी इकट्ठी करें। अगर, उस बिल्डर की साख मार्केट में अच्‍छी है तो उससे मिलकर उसके प्रोजेक्‍ट को सेल या कंसल्टिंग देने के लिए गठजोड़ करें।
 
खरीददारों को समझने की जरूरत
 
अच्‍छे बिल्डर होने से आपको खरीददारों को समझाने में ज्‍यादा मशक्कत नहीं करनी होगी। इसके बाद आप अपने नेटवर्क को खंगाले। पता करें की किनको घर की जरूरत है। दोस्तो, रिश्तेदारों से भावी खरीददारों की जानकारी इकट्ठी करें। मार्केट में भी भावी खरीददारों के डाटा मिलते हैं। इनसे भी आप एक टेली कॉलर के मदद से संपर्क कर सकते हैं। जो दिलचस्‍पी दिखाए उससे मीटिंग कर प्रोजेक्‍ट, कीमत और दूसरी जानकारी दे सकते हैं।
 
कंसल्टिंग फर्म आप प्रोपराइटरशिप या किसी के साथ पार्टनरशिप में भी खोल सकते हैं। बड़े पैमाने पर रियल एस्‍टेट के क्षेत्र में कारोबार करने के लिए आप बाद में कंपनी नियमों के मुताबिक अपनी फर्म को प्राइवेट लिमिटेड, लिमिटेड या लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) का रूप भी दे सकते हैं। इससे आपके फर्म की विश्‍वसनीयता भी बढ़ेगी।
 
आगे की स्लाइड में पढ़िए कैसे होती है इस बिजनेस में कमाई...
 
नोटः तस्वीरों का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।
 
कैसे होती कमाई
 
कंसल्टिंग फर्म, घर खरीददारों की जरूरत को समझते हुए सही प्रोजेक्‍ट का चयन करने में मदद करता है। अगर, खरीददार को आपके द्वारा सुझाई गई प्रॉपर्टी पंसद आती है तो वह उसमें निवेश करता है। आप उस खरीददार को डेवलपर के पास लेकर जाते हैं और उसकी पंसद की प्रॉपर्टी की बुकिंग कराते हैं। बिल्डर इसके एवज में आपको पहले से तय एक कमीशन देता है। एपीएस कंसल्टिंग के पंकज चौधरी बताते है कि बिल्डर 3 से 8 फीसदी तक कमीशन देते हैं। यानी अगर, प्रॉपर्टी 30 लाख रुपए की है और 5 फीसदी कमीशन बिल्डर देता है तो एक प्रॉपर्टी की बिक्री पर आपको करीब 1.5 लाख रुपए मिलते हैं। खरीददार को भी कमीशन का एक हिस्‍सा दे सकते हैं। यानी, एक महीने में अगर आप दो नई डील करा देते हैं तो आप आसानी से दो से तीन लाख रुपए की कमाई कर सकते हैं।
 
 
 
विश्‍वसनीयता है सफलता का मंत्र
 
नोएडा स्थित प्रॉपर्टी कंसल्टिंग फर्म फिनलेस के डायरेक्‍टर पवन जसुजा कहते हैं कि इस बिजनेस में कदम रखने के लिए नेटवर्क और रियल एस्टेट की समझ होनी जरूरी है। पैसा हो न हो आप अपना काम शुरू कर सकते हैं। जसुजा कहते हैं कि रियल एस्टेट में पारदर्शिता का अभाव है। घर खरीददार के पास सही जानकारी देने वाले कंसल्टेंट बहुत कम है। अगर,  खरीददारों को जरूरत को समझते हुए सही जानकारी उपलब्‍ध कराई जाए तो न सिर्फ मार्केट में एक नई पहचान बनाई जा सकती है बल्कि किसी दूसरे बिजनेस से अधिक तेजी से पैसा भी कमाया जा सकता है। हालांकि, खरीददारों के बीच विश्वास बहाली करना बहुत कठिन काम है क्‍योंकि बहुत सारे छोटे ब्रोकर जल्द से जल्द पैसा कमाने के चक्‍कर में खरीददारों के साथधोखाधड़ी भी करते हैं। इसके चलते खरीददार जल्दी नए प्रॉपर्टी कंसल्‍टेंट देने वाले पर भरोसा नहीं करते हैं।
 
 
 
इस बिजनेस में क्‍या हैं समस्‍याएं
 
प्रॉपर्टी कंसल्टिंग का बिजनेस आसानी से शुरू की जा सकती है पर इसमें कई समस्याएं है जिन्‍हें शुरुआत में ही समझ लेना जरूरी है। पहली समस्या होती है नए घर के खरीददारों को ढूंढना क्‍योंकि मार्केट में बहुत ज्‍यादा प्रतिस्पर्धा है। इसके चलते एक खरीददार को कई कंसल्टेंट संपर्क करते हैं। दूसरा, बिल्डर के साथ टाइअप और सही कमीशन स्लैब लेना। होता यह है कि बिल्डर बड़ी कंसल्टिंग कंपनी को अधिक कमीशन देते हैं क्‍योंकि वह उसके अधिक फ्लैट को सेल करता है। इससे मार्केट में नए खरीददार को ढूंढना मुश्किल होता है क्‍योंकि बड़े कंसल्टिंग फर्म अपने कमीशन का एक हिस्‍सा खरीददारों को भी देते हैं जिससे प्रॉपर्टी की कीमत कम हो जाती है। 
इसके अलावा, बिल्डर से कमीशन का पैसा निकालना भी थोड़ा मुश्किल होता है। कुछ बिल्डर कमीशन देने के लिए एक समय सीमा तय किए होते हैं तो कुछ का नहीं होता है। इस चक्‍कर में पैसा रुक जाता है। कई दफा कमीशन का पैसा ही नहीं मिलता। इसलिए हमेशा वैसे बिल्डर का चयन करें जिसकी साख मार्केट में अच्‍छी हो। 
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